अखिलेश यादव के फैसले से पशोपेश में हैं मायावती

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नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव के लिए सियासी दल तैयारियों में जोरशोर से जुट गए हैं। उत्तर प्रदेश में ‘बुआ-भतीजे’ की जोड़ी ताल ठोंक रही है। पिछले दिनों हुए उत्तर प्रदेश के उप-चुनावों में केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी को पटखनी देने वाली सपा-बसपा में गठबंधन के बाद सीटों का बंटवारा भी हो चुका है, लेकिन अब चुनाव की दहलीज पर खड़ी बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा उठाया गया एक मुद्दा ही ‘गले की हड्डी’ बनता दिखाई दे रहा है। यह मामला मायावती के मुख्यमंत्री रहते बने पार्को और स्मारकों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है और एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में सुुप्रीम कोर्ट ने इन पार्कों व स्मारकों में लगी मायावती और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी की प्रतिमाओं को लेकर गंभीर टिप्पणी की और कहा कि इन मूर्तियों पर खर्च हुई धनराशि को मायावती को सरकारी खजाने में जमा करना चाहिए। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में एक ही कश्ती पर सवार सपा मुखिया अखिलेश यादव खुद बसपा के कार्यकाल में बनी इन प्रतिमाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश की गद्दी संभालने के बाद अखिलेश यादव ने ही मायावती के कार्यकाल में बने पार्कों और स्मारकों की लोकायुक्त से जांच का आदेश दिया था। लोकायुक्त की जांच में लखनऊ और नोएडा में बने पार्कों और स्मारकों में 1,400 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का अनुमान लगाया गया था। यही नहीं, लोकायुक्त की सिफारिश पर अखिलेश यादव की सरकार ने पूर्ववर्ती मायावती सरकार के दो मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबूसिंह कुशवाहा समेत 19 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दर्ज करवाया था, अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह मामला गरमा गया है। चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने अपनी प्रतिमाओं पर 3.49 करोड़ रुपये, अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम की प्रतिमाओं पर 3.77 करोड़ रुपये और अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियों पर 52.02 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानी सभी प्रतिमाओं पर 59 करोड़ रुपये खर्च हुए, अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बसपा प्रमुख आर्थिक संकट में फंसती दिखाई दे रही हैं। हालांकि मायावती का कहना है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती के साथ रखेंगी। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में भी न्यायालय से पूरा इंसाफ मिलेगा। वहीँ लखनऊ स्थित अंबेडकर पार्क में हाथियों की 152 मूर्तियां हैं, जबकि नोएडा के पार्क में 56 मूर्तियां लगी हैं।