अगले साल लखनऊ में होगी 11वीं रक्षा प्रदर्शनी

नई दिल्ली : रक्षा प्रदर्शनी भारत-2020 के 11वें द्विवार्षिक संस्करण का पहली बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 5 से 8 फरवरी तक आयोजन किया जाएगा। इसमें भारतीय रक्षा उद्योग को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और अपनी निर्यात संभावनाओं को बढ़ाने का एक उत्कृष्ट अवसर मिलेगा। रक्षा प्रदर्शनी भारत–2020 का मुख्य विषय भारत उभरता हुआ रक्षा निर्माण केन्द्र है और इसमें रक्षा के डिजिटल परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कराए जाने वाले इस तरह के आयोजनों से न केवल वरिष्ठ विदेशी प्रतिनिधियों के साथ व्यवसाय संबंधी बातचीत को बल्कि सरकारों के बीच बैठकें आयोजित करने और समझौता ज्ञापनों को कारगर बनाने में मदद मिलती है। प्रदर्शनी में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के एक आकर्षक स्थल के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला जाएगा। यह प्रदर्शनी रक्षा उद्योग में गठबंधनों और संयुक्त उद्यमों के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगी। इस उत्तरी राज्य में एक मजबूत रक्षा औद्योगिक बुनियादी ढांचा है। यहां लखनऊ, कानपुर, कोरबा और नैनी (प्रयागराज) स्थित हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स की चार इकाइयां, कानपुर, कोरबा, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद सहित नौ आयुध फैक्टरी इकाइयां तथा गाजियाबाद में भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की एक इकाई है।

भारत के दो रक्षा औद्योगिक गलियारों (डीआईसी) में से एक को उत्तर प्रदेश में बनाने की योजना बनाई गई है। ये गलियारे भारतीय रक्षा उद्योग सहित रक्षा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहित करेंगे तथा सार्वजनिक रक्षा क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) को बढ़ावा देंगे। अन्य डीआईसी तमिलनाडु में बनाने का प्रस्ताव है। यह रक्षा प्रदर्शनी बड़े विदेशी मौलिक उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भारतीय रक्षा उद्योग के साथ सहयोग करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगी। यह रक्षा प्रदर्शनी रक्षा उद्योग ओईएम, प्रदर्शनी लगाने वालों और निजी उद्योग को अपने नवीनतम अविष्कारों और क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक अनोखा मंच प्रदान करेगी। इस रक्षा प्रदर्शनी में देश- विदेश के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों और देश भर के और विदेशी मेहमानों के आने की संभावना है। इस प्रदर्शनी में भारत को एक उभरते हुए निर्माण केन्द्र के रूप में देखने का अवसर मिलेगा जो न केवल हमारी रक्षा सेनाओं को बल्कि दुनिया को निर्यात के लिए रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन का आकर्षक अवसर प्रदान करेंगे।