अब निदा खान के खिलाफ चोटी काटने और पत्थर मारने का फतवा


बरेली : हलाला, तीन तलाक और बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली उत्तर प्रदेश में बरेली के आला हजरत खानदान की पूर्व बहू निदा खान के खिलाफ एक बार फिर से मुस्लिम रुढ़िवादियों ने फतवा जारी किया है। निदा खान के अलावा आला हजरत खानदान की ही एक अन्य महिला फरहत नकवी के खिलाफ भी फतवा जारी किया गया है। इस बार जारी फतवे में कहा गया है कि निदा और फरहत की चोटी काट कर देने और उनको पत्थर मारने वाले को ईनाम दिया जाएगा। निदा और फरहत के खिलाफ इस बार यह फतवा ऑल इंडिया फैजान-ए-मदीना ने जारी किया है। ऑल इंडिया फैजान-ए-मदीना काउंसिल के अध्यक्ष मुईन सिद्दीकी नूरी ने निदा और फरहत की चोटी काटकर लाने और उन्हें पत्थर मारने वाले को 11,786 रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं निदा और फरहत को फतवे में 3 दिन के अंदर देश छोड़ने का आदेश भी दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, जारी किए गए फतवे में दोनों महिलाओं के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया गया है। गौरतलब है कि निदा को उसके शौहर ने तीन तलाक दे दिया था, इसके विरोध में निदा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने पिछले हफ्ते ही निदा को उसके पति द्वारा दिए गए तलाक को खारिज कर दिया। बीते सोमवार को बरेली के शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने भी निदा खान के खिलाफ फतवा जारी कर उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया था। इस फतवे में निदा की मदद करने वाले और उससे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को चेतावनी दी गई थी कि ऐसा करने वालों को भी इस्लाम से खारिज कर दिया जाएगा। मुफ्ती आलम द्वारा जारी फतवे में यह भी कहा गया था कि निदा अगर बीमार हो जाती हैं तो उसको दवा तक नहीं दी जाएगी। निदा की मौत पर जनाजे की नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है, इतना ही नहीं निदा की मौत होने पर उसे कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगाने की बात इस फतवे में थी। अपने खिलाफ जारी फतवे पर निदा खान ने कहा कि इस तरह का फतवा जारी करने वालों पर लगाम लगनी चाहिए। मैं इस मुद्दे पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करूंगी।

निदा खान ने कहा कि शनिवार को जब प्रधानमंत्री शाहजहांपुर में थे, तो वह वहां भी जा सकती थीं, लेकिन अपनी सुरक्षा के चलते वह नहीं गईं। इससे पहले जब निदा के खिलाफ फतवा जारी किया गया था, उस समय भी निदा ने जबरदस्त पलटवार करते हुए कहा था कि फतवा जारी करने वाले पाकिस्तान चले जाएं, उन्होंने कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहां दो कानून नहीं चलेंगे, किसी मुस्लिम को इस्लाम से खारिज करने की हैसियत किसी की नहीं है, सिर्फ अल्लाह ही गुनहगार और बेगुनाह का फैसला कर सकता है।