अमृतसर हादसे पर रेलवे प्रशासन का झूठ हुआ बेनकाब, सामने आई बड़ी लापरवाही

अमृतसर रेल हादसे के बाद से रेलवे प्रशासन लगातार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है और सफेद झूठ बोल रहा है. अब रेलवे का एक और सफेद झूठ पकड़ा गया है. दरअसल, अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर रेलवे ने सफाई देते हुए कहा था कि जिस जगह पर डीएमयू की वजह से रेल हादसा हुआ, वहां पर पटरियों में घुमाव है. लिहाजा दूर से लोको पायलट नहीं समझ पाया कि लोग पटरी पर जमा हैं.

अमृतसर हादसे पर रेलवे प्रशासन का झूठ हुआ बेनकाब, सामने आई बड़ी लापरवाही जब रेलवे के इस बयान की हकीकत जानने के लिए ‘आजतक’ संवाददाता सिद्धार्थ ने मौके का मुआयना किया, तो यह बात एकदम गलत पाई गई. जोड़ा फाटक से दोनों तरफ जालंधर-अमृतसर रेल ट्रैक एकदम सीधा है और सबसे बड़ी बात यह है कि लोको पायलट की नजर सिक्स बाई सिक्स होती है. ऐसे में ट्रैक पर जमा लोगों को न देख पाने की बात अपने आप में अचरज में डालने वाली है.

जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वहां पर जोड़ा फाटक के पास रेलवे की कोई फेंसिंग नहीं है. हालांकि रावण दहन के कार्यक्रम स्थल के पास रेलवे की ऊंची-ऊंची दीवार हैं. यहां पर विजयदशमी मेले के आयोजकों ने मेला ग्राउंड के साथ-साथ रेल पटरियों से लगी हुई दीवार के पार की रेलवे जमीन पर खरपतवार और पेड़ काटकर लोगों के बैठने की व्यवस्था की थी.

स्थानीय लोगों का कहना था कि एलईडी का मुंह पटरी की तरफ कर दिया गया था, ताकि लोग रावण दहन का आनंद उठा सकें. जब यह पूरी व्यवस्था की जा रही थी, तब रेलवे के ट्रैक की सुरक्षा की जिम्मेदारी का जिम्मा लिए आरपीएफ कहां थी और उनकी इंटेलिजेंस यूनिट क्या कर रही थी? जब यह कार्यक्रम हो रहा था, तब रेलवे के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी क्या सोए हुए थे?

अब रेलवे यह दावा कर रहा है कि ट्रैक पर लोग अनधिकृत रूप से आ गए थे. लिहाजा उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है. इसके साथ ही रेलवे का यह भी कहना है कि विजयदशमी के मेले के आयोजन की जगह भी उनके अंतर्गत नहीं आती है. लिहाजा उनसे परमिशन की भी जरूरत नहीं थी. इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन की लापरवाही तो है ही, लेकिन रेलवे को बेदाग नहीं कहा जा सकता है.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने क्या कहा?

बता दें कि शुक्रवार को अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास डीएमयू ट्रेन रावण दहन के लिए इकट्ठा हुए सैकड़ों लोगों की भीड़ को कुचलते हुए निकल गई थी. इसके बाद रेल मंत्रालय का कहना था कि ट्रेन के लोको पायलट की कोई गलती नहीं है और इसकी सीआरएस जांच की जरूरत नहीं है.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी के मुताबिक इस हादसे में लोको पायलट की कोई गलती नहीं है. कुल मिलाकर रेलवे का कहना है कि जहां पर यह हादसा हुआ वह जगह रेलवे के कानून के मुताबिक लोगों के इकट्ठा होने के लिए नहीं है. ऐसी किसी जगह पर जब लोग इकट्ठा होंगे, तो उसे गैर कानूनी एंट्री माना जाता है.

उन्होंने कहा कि रेल संरक्षा आयोग नागर विमानन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है और सभी रेल दुर्घटनाओं की अनिवार्य जांच करता है. यह एक ऐसा हादसा था, जिसमें लोगों ने रेल पटरी पर अनधिकृत प्रवेश किया और यह कोई रेल दुर्घटना नहीं है.

रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने क्या कहा था?

इसके अलावा रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा था कि घटना के वक्त शाम हो चुकी थी और वहां कि पटरी भी घुमावदार थी, जिसके चलते ड्राइवर को आगे नहीं दिखाई पड़ा होगा. जब उनसे ट्रेन की रफ्तार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा था कि ट्रेनें तो स्पीड से ही चलती हैं.

गेटमैन के खिलाफ कार्रवाई करने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि जिस जगह पर रावण का पुतला जलाया जा रहा था, वहां से रेल फाटक 300 मीटर दूर है. मामले की जांच के सवाल पर सिन्हा का कहना था कि किस बात की इनक्वायरी हम कराएं…? जब उनसे पूछा गया कि क्या ड्राइवर किसी भी तरह ट्रेन नहीं रोक सकता था. इस पर मंत्री ने कहा था कि पटरी से 70 मीटर दूर कार्यक्रम हो रहा था, इसके अलावा वहां हलका मोड़ भी था, तो ड्राइवर को कैसे दिखाई देता?

कैसे हुआ हादसा?

बता दें कि शुक्रवार शाम को अमृतसर के चौड़ा बाजार स्थित जोड़ा फाटक के रेलवे ट्रैक पर लोग मौजूद थे. पटरियों से महज 200 फुट की दूरी पर पुतला जलाया जा रहा था. इसी दौरान जालंधर से अमृतसर जा रही डीएमयू ट्रेन वहां से गुजरी और ट्रैक पर मौजूद लोगों को कुचल दिया. इसके बाद चारो ओर लाशें बिछ गईं. इस हादसे में 59 लोगों की मौत हुई है, जबकि 57 लोग घायल हैं. हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार करीब 100 किमी. प्रति घंटे थी.