अलीगढ़ यूनिवर्सिटी पीएचडी का छात्र पढ़ाई छोड़ आतंकी कैसे बना, “डाॅ मनान बशीर वानी” आइए जानें

 


श्रीनगर: डाॅ मनान बशीर वानी “उर्फ” हमजा भाई का नाम इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह में सुर्खियों में आया था। सोशल मीडिया पर उसकी अंडर बैरेल ग्रेनेड लांचर के साथ एक तस्वीर वायरल हुई। हर तरफ यह सनसनी फैल गई कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पीएचडी का छात्र और कुपवाड़ा के टाकीपोरा, लाेलाब का रहने वाला डाॅ मनान वानी आखिरकार आतंकवादियों से क्यों जा मिला। दरअसल दिसंबर 2017 में यूनिवर्सिटी से घर के लिए रवाना हुआ मनन घर नहीं पहुंचा। 4 जनवरी 2018 तक वह अपने परिजनों के साथ केवल फोन पर ही संपर्क में रहा। पांच जनवरी को उसने आतंकी बनने का एलान कर दिया। आतंकी बनने से पहले वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एप्लाइन जियोलोजी में पीएचडी कर रहा था। उसने दसवीं तक पढ़ाई कुपवाड़ा में जवाहर नवोदय विद्यालय से की थी। पिता बशीर अहमद शिक्षा विभाग में लेक्चरर हैं, और एक भाई सरकारी इंजीनियर है। उसने वॉटर एन्वायरमेंट एनर्जी एंड सोसाईटी विषय पर आईसेक्टर विश्वविद्यालय भोपाल में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पत्र प्रस्तोता का सम्मान भी अर्जित किया है। इस सम्मेलन में चीन, अमरीका और इंग्लैंड सहित विभिन्न मुल्कों के 400 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था। आतंकी बनने के बाद उसने जिला कुपवाड़ा में नए लड़कों की भर्ती शुरु की और कुछ समय तक दक्षिण कश्मीर के कुलगाम, पुलवामा और शोपियां में सक्रिय भी रहा। हांलाकि वह कश्मीर शरियत की बहाली का कट्टर समर्थक था। वह जाकिर मूसा के साथ कई मामलों में सहमत नहीं था। डाॅ मनान बशीर वानी ने आतंकी बनने के बाद कश्मीर में जिहाद को सही ठहराते हुए सोशल मीडिया पर कई लेख भी लिखे। ऐसा ही उसका एक लेख गत जुलाई माह के दौरान सामने आया था। कश्मीर के हालात, इस्लाम और जिहाद के मुद्दे पर लिखने वाला वह कश्मीर में बीते 16 सालों में पहला सक्रिय आतंकी कमांडर रहा। करीब पंद्रह दिन पहले भी उसका एक लेख सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में आतंकी कमांडर डाॅ मनान बशीर वानी व उसके साथी की मौत पर दुख जताते हुए कश्मीरी अलगाववादियों के सांझा मंच ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप “जेआरएल” ने शुक्रवार 12 अक्टूबर को कश्मीर बंद का आह्वान किया है।