आप पर शामत

- in दस्तक-विशेष

राम शिरोमणि शुक्ल
aap par shamatऐसे समय जब दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने की रणनीति तय करने में लगे हैं, दिल्ली और पंजाब दोनों ही जगह उनके विधायकों और सांसद पर आफत आती जा रही है। उनके नेताओं पर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं। उनके प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार की भ्रष्टाचार के आरोप में पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। पंजाब से आप सांसद भगवंत मान संसद जाते हुए वीडियो बनाकर और फिर उसे सोशल मीडिया पर डालकर फंस गए। विपक्षी भाजपा और कांग्रेस को नए सिरे से केजरीवाल और उनकी पार्टी पर हमले करने का मौका मिल गया है। इसके विपरीत केजरीवाल अपने निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिए हुए हैं। वह लगातार आरोप लगा रहे हैं कि प्रधानमंत्री उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं और अडं़गा लगा रहे हैं। वह इसे धर्मयुद्ध की संज्ञा दे रहे हैं और कह रहे हैं कि चाहे जो कर लें वह विकास कार्यों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। वस्तुस्थिति कुछ भी हो लेकिन लोगों में यह सवाल जरूर उठने लगा है कि आखिर क्या कारण है कि जिस पार्टी को जनता ने इतना बड़ा बहुमत दिया उसके विधायक और सांसद कैसे इस तरह के आरोपों में घिर रहे हैं। एक दूसरी तरह की धारणा भी बनती नजर आ रही है कि आखिर क्या कारण है कि ऐसे आरोपों में जिन पर अन्य पार्टियों के नेताओं-जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कुछ नहीं होता, उन आरोपों पर आप विधायकों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है। बात चाहे जो हो लेकिन यह तो लगने लगा है कि आप पर शामत आई हुई है।
अभी हाल-फिलहाल एक ही दिन में दो आप विधायकों नरेश यादव और अमानतउल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया। महरौली से विधायक नरेश यादव पंजाब के मालेरकोटला में पवित्र ग्रंथ कुरान का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। पंजाब पुलिस का कहना है कि यादव पर भारतीय दंड संहिता की धारा 109, 153ए और 295 के तहत मामला दर्ज है। ओखला से विधायक अमानतउल्ला पर एक 35 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह बिजली कटौती की समस्या की शिकायत करने विधायक के पास गई थी तब उन्होंने उसे बलात्कार और हत्या की धमकी दी थी। नरेश यादव के बारे में बताया जाता है कि मालेरकोटला में अज्ञात लोगों ने पवित्र धार्मिक ग्रंथ के कुछ पन्ने फाड़कर फेंक दिए थे। इसके बाद एक समुदाय विशेष के लोगों ने एक अकाली दल विधायक के घर पर तोड़फोड़ कर दी थी। इस पर हालात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से पुलिस की ओर से फायरिंग की गई। पुलिस ने इस पूरे मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक आरोपी ने पूरी साजिश के लिए आप विधायक नरेश यादव का नाम लिया।
पुलिस के मुताबिक इसके लिए विजय अपने साथियों के साथ दिल्ली स्थित नरेश यादव के घर से ही मालेरकोटला आया था। उसका यह भी आरोप था कि नरेश ने इस काम के बदले विजय को एक करोड़ रुपये देने का वादा किया था। पुलिस का यह भी कहना है कि विधायक नरेश यादव इस साजिश के बहाने पंजाब में हालात तनावपूर्ण करना चाहता था ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका आम आदमी पार्टी को फायदा मिल सके। फिलहाल इन आरोपों की सच्चाई तो बाद में पता चलेगी लेकिन अभी तो नरेश यादव को गिरफ्तार कर ही लिया गया है। विधायक नरेश यादव का इस बारे में कहना है कि यह मेरे खिलाफ साजिश है। हमारे साथी हिंदू, मुसलमान और सिख हैं। उसी से घबराकर ये साजिश कर रहे हैं। भाजपा-अकाली इस साजिश के पीछे हो सकते हैं। मेरे खिलाफ कोई सबूत हो तो दीजिए और आरोप साबित हों तो फांसी चढ़ा दीजिए।
इससे पहले आप विधायक दिनेश मोहनिया को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया था जब वह संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मोहनिया पर एक महिला से बदसलूकी का आरोप है। मोहनिया में वह संवाददाता सम्मेलन अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने के लिए कर रहे थे। उन पर तुगलकाबाद इलाके में एक बुजुर्ग को थप्पड़ मारने का भी आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिस आरोप में गिरफ्तारी की गई वह संगम विहार का मामला है। बताया जाता है कि विधायक ने कथित तौर पर पानी की किल्ल्त की शिकायत लेकर उनके दफ्तर आई संगम विहार की कुछ महिलाओं को अपशब्द कहे। इन्हीं में से एक महिला ने मामला दर्ज करवाया था जिसके बाद मोहनिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस तरह अब तक करीब एक दर्जन आप विधायकों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि अब तक किन विधायकों को किन आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। कभी आप सरकार में कानून मंत्री रहे सोमनाथ भारती को 2015 में उनकी पत्नी द्वारा मामला दर्ज कराए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा और हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था। दूसरे कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर को फर्जी डिग्री मामले में 2015 में गिरफ्तार किया गया था। इस आरोप में उन्हें करीब डेढ़ महीने तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। देवली से विधायक प्रकाश जारवाल को जुलाई में एक महिला से छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मई 2014 में भी दिल्ली जल बोर्ड के एक कर्मचारी को कथित रूप से थप्पड़ मारने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली छावनी से विधायक कमांडो सुरिंदर सिंह को 21 अगस्त को कथित तौर पर एक एनडीएमसी अधिकारी के खिलाफ जातिगत टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बताया जाता है कि कमांडो एनडीएमसी कर्मचारियों से एक सब्जी विक्रेता को बचाने की कोशिश कर रहे थे। कोंडली से विधायक मनोज कुमार को 10 जुलाई को धोखाधड़ी से जमीन पर कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मॉडल टाउन से विधायक अखिलेश त्रिपाठी को 26 नवंबर को दंगा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में गवाह के मुकर जाने पर उन्हें छोड़ दिया गया था। विकासपुरी से विधायक महेंद्र यादव को 29 जनवरी को एक सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और दंगा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। हरिनगर से विधायक जगदीप सिंह को 30 मई को हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक कचरा प्रबंधन कंपनी के प्रबंधक को कथित तौर पर पीट दिया था। इन सभी गिरफ्तारियों पर आम आदमी पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती रही है। मोहनिया की गिरफ्तारी पर आप का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई डराने-धमकाने के लिए की जा रही है। यह भी आरोप लगाया गया कि एमएस खान हत्याकांड से ध्यान हटाने के लिए पुलिस ने यह गिरफ्तारी की है। आप नेता दिलीप पांडे ने तब आरोप लगाया था कि भाजपा सांसद महेश गिरी को बचाने के लिए यह गिरफ्तारी की गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अघोषित इमरजेंसी लगा रखी है। पार्टी का यह भी आरोप रहा है कि दिल्ली पुलिस जानबूझकर पार्टी विधायकों को निशाना बना रही है। आप नेता आशुतोष का कहना है कि गिरफ्तारियां भाजपा और केंद्र में उसके नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की बौखलाहट को प्रदर्शित करती है। सांसद भगवंत मान भी शिकंजे में
bhagavant manआम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक के बाद एक आफत उन्हें घेरे ही रहती है। अब ताजा मुश्किल पंजाब से आप सांसद भगवंत मान की वजह से आ गई है। मान ने अपने घर से निकलने के बाद से संसद में पहुंचने तक का वीडियो बना लिया और उसे फेसबुक पर डाल दिया। इसके साथ ही संसद की सुरक्षा को लेकर सांसदों की ओर से गंभीर चिंता जताई जाने लगी। बवाल मचने पर पहले तो उन्होंने कहा कि वह केवल अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को दिखाने के लिए बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह फिर बनाएंगे। लेकिन जब तकरीबन सभी दलों के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की तब मान ने बिना शर्त माफी मांग ली। लेकिन सांसद सिर्फ माफी मांगने को पर्याप्त नहीं मान रहे थे और लोकसभा अध्यक्ष ने भी मान के क्रियाकलाप को गंभीर गलती माना। बाद में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मान के वीडियो की जांच के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया। समिति की रिपोर्ट आने तक भगवंत मान की संसद की कार्यवाही और बैठकों में भाग लेने पर रोक लगा दी। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष की ओर से मान को संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ के आरोप में नोटिस भी दिया गया था। यहां यह भी ध्यान में रखना होगा कि गृह मंत्रालय मान के वीडियो का संज्ञान ले चुका है। मंत्रालय का कहना है कि अब संसद की सुरक्षा का पूरा ताना-बाना बदलना होगा। 13 दिसंबर 2001 को संसद के गेट नंबर एक से सफेद एंबेसडर कार जिसमें संसद का स्टिकर लगाकर आतंकवादी दाखिल हुए थे लेकिन अंदर पहुंचने के बाद संसद के भीतर कैसे घुसना है, इस बारे में आतंकवादियों को कोई जानकारी नहीं थी। इसीलिए वो अंदर दाखिल नहीं हो पाए थे। मान के वीडियो के बाद ये जानकारी आम हो गई है। इसीलिए इसे बेहद गंभीर मामला माना गया और सांसदों की चिंता के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई की है। हालांकि मान का बचाव करते हुए आप ने कहा है कि वीडियो से कोई सुरक्षा उल्लंघन नहीं हुआ है। आप का आरोप है कि भाजपा ने गुजरात में दलितों पर हुए हमले के मुद्दे से ध्यान बंटाने के लिए इस बात को तूल दिया।
प्रधान सचिव हो चुके हैं गिरफ्तार
PS delhiदिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार को आखिरकार चार जुलाई को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर बिना नीलामी के 50 करोड़ का ठेका देने का आरोप था। 1989 बैच के आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार फरवरी में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के प्रधान सचिव नियुक्त हुए थे। केजरीवाल के पहले कार्यकाल में उनके सचिव रह चुके थे। राजेंद्र कुमार को लेकर पिछले काफी समय से कार्रवाइयां की जा रही थीं। इससे पहले उनके दफ्तर पर छापा भी मारा गया था। सीबीआई को शिकायत मिली थी कि राजेंद्र कुमार बीते पांच साल में जहां भी रहे प्राइवेट कंपनियों को लाभ पहुंचाते रहे। दिल्ली डायलॉग कमीशन के पूर्व सदस्य वरिष्ठ नौकरशाह आशीष जोशी ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के प्रमुख एमके मीणा को लिखकर राजेंद्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जोशी ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा नियुक्त किए एबीसी प्रमुख मीणा से राजेंद्र कुमार के खिलाफ जांच की मांग की थी जब वह स्वास्थ्य शिक्षा और आईटी विभाग में थे। जोशी ने यह भी आरोप लगाया था कि मई 2002 से लेकर फरवरी 2005 तक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर और उसके बाद आईटी में सचिव बनने के बाद तथा स्वास्थ्य विभाग में कमिश्नर रहते हुए राजेंद्र कुमार ने कई कंपनियों की स्थापना की और उन्हें बिना टेंडर के काम दिया था जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। जोशी के आरोपों में यह भी था कि राजेंद्र कुमार ने कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई। सन 2007 में उन्होंने दिल्ली सरकार के आईटी विभाग में सचिव के पद पर रहते अपनी इस कंपनी को पीएसयू पैनल में शामिल कराया जो बिना टेंडर डाले काम कर सकती थी। ल्ल