उत्तराखंड में लगी आग ने धारण किया विकराल रुप, वन संपदा समेत कई दुर्लभ जड़ीबूटियां जलकर हो गई खाक

तापमान आसमान पर है। ऐसे में पहाड़ में तपन बढ़ने के साथ जंगलों की आग धीरे-धीरे विकराल होने लगी है। चंपावत जिले के जंगलों में लगी आग से 60 हेक्टयर से अधिक वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।

पिथौरागढ़ के नाचनी, थल सहित काफी बड़े क्षेत्रों में आग लगी है। आग से बीते 24 घंटों में आठ हेक्टेयर जंगल स्वाहा हो गए हैं वहीं अल्मोड़ा जिले के पांडवखोली, भटकोट के जंगलों में कई जीवनदायिनी जड़ी, बूटियां इस दवानल की चपेट में आकर नष्ट हो गई हैं।

चंपावत और बागेश्वर के आसमान पर छाई धुंध जंगलों में लगी आग की भयाहवता दर्शा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण वन विभाग उदासीन बना हुआ है, ऐसे में साधन विहीन ग्रामीण इन लपटों पर कैसे काबू पाएंगे।

रानीखेत के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पांडवखोली, भटकोट के जंगलों में कई जीवनदायिनी जड़ी, बूटियां नष्ट हो रही हैं। भीड़पानी के नीचे चांचरी जंगल सहित अनेक स्थानों पर आग लगी है।

नाड़, गवाड़ वन पंचायत आग की भेंट चढ़ चुके हैं। आग के कारण पूरे क्षेत्र में धुंध छाई है। इधर, ताड़ीखेत ब्लॉक के विशालकोट, मल्ला मयूं, मटेला मंडलकोट, तिपौला, सुकोली, मुसोली के जंगल जल चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश करायत का कहना है कि वन विभाग के प्रतिनिधि झांकने तक नहीं पहुंचे हैं। उधर अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले के जंगलों में बृहस्पतिवार को भी कई जगह आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। अल्मोड़ा के फलसीमा के पास सुंदरवन क्षेत्र, विश्वनाथ के जंगलों में आग लग गई। गनीमत यह रही कि बृहस्पतिवार सुबह आग खुद ही बुझ गयी। उधर बागेश्वर के कांडा, विजयपुर क्षेत्र के जंगलों और बृहस्पतिवार दोपहर जिला मुख्यालय से सटे आरे क्षेत्र के जंगलों में आग लग गई।

कपकोट क्षेत्र में भी कई जंगल आग की चपेट में हैं। ऊंची चोटियों स्थित चीड़ के वनों में लगी आग पर नियंत्रण पाना वन विभाग के लिए भी कठिन साबित हो रहा है। धुंध के कारण बृहस्पतिवार को दृश्यता सौ मीटर रही। डीएफओ आरके सिंह ने बताया कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चंपावत के पाटी विकासखंड के जंगलों में सातवें दिन भी आग धधकी रही।

रानीचौड़ रोड के ऊपरी इलाके, फटकशिला और बलदीकिला के बीच जंगल, परेवा, किमाडीधार, मैराली, लडा के जंगलों में भीषण आग लगी है। वन दरोगा सीएस जोशी ने बताया कि जंगलों में आग लगने से करीब 60 हेक्टेयर से अधिक वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। पिथौरागढ़ जिले के नाचनी से लगे घट-घोड़गाड़ी क्षेत्र में बीती रात से लगी आग में चार हेक्टेयर जंगल तबाह हुआ है।

यहां जंगल की आग हरडिय़ा की सीमा पार कर भैसखाल वन पंचायत तक पहुंची और एक हेक्टेयर जंगल को बर्बाद कर डाला। वन बीट अधिकारी रमेश लोडियाल ने विभागीय टीम और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया। इधर थल क्षेत्र से लगे आमथल का जंगल रातभर धू-धू कर जलता रहा। उडियारी बैंड, हजैती गांव में भी आग की लपटें पहुंची। तीन हेक्टेयर से अधिक जंगल को नुकसान पहुंचा। वन क्षेत्राधिकारी जगदीश चंद्र जोशी के नेतृत्व में पहुंची वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों के सहयोग से आग को शाम को नियंत्रित किया।