उत्तराखंड में सर्दियों में जम रहा झरने का पानी, नदियां बर्फ में तब्दील

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उत्तरकाशी: गंगा घाटी में बिना हिमपात के ही ठंड का कहर चरम पर है। यहां हर दिन तापमान गिरता जा रहा है। हाल ये है कि भीषण ठंड के कारण गंगनानी से लेकर गंगोत्री तक कई झरने और नाले पाले से जम कर फ्रिज बन चुके हैं।उत्तराखंड में सर्दियों में जम रहा झरने का पानी, नदियां बर्फ में तब्दील

गंगा (भागीरथी) के जिस हिस्से में पानी का बहाव कम है वहां भी पानी बर्फ बन चुका है। इस तरह के नजारे हर्षिल, धराली व झाला में आसानी से दिख रहे हैं। ये नजारे भले ही पर्यटकों के लिए रोमांचकारी हैं, लेकिन घाटी में इस भीषण ठंड ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है।उत्तरकाशी में पिछले 15 दिनों में शीत लहर का सितम बढ़ता जा रहा है। हालत ये है कि बिना बारिश और हिमपात के उत्तरकाशी में न्यूनतम तापमान माइनस डिग्री तक पहुंच रहा है। 

भले ही दिन में चटक धूप से लोगों को कुछ राहत मिल रही है, लेकिन उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर गंगनानी से लेकर गंगोत्री तक ठंड अपने चरम पर है। यहां दिन का अधिकतम तापमान भी 3 से लेकर 6 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। सुबह, शाम और रात को यहां का तापमान माइनस डिग्री में पहुंच रहा है। यहां पड़ रही कड़ाके की ठंड का अनुमान इस बात से लग रहा है कि यहां अपनी सुंदरता बिखेरने वाले झरने भी बर्फ में बदल चुके हैं। गंगा में मिलने वाले नाले भी जम चुके हैं। झाला और धराली के बीच जो छोटी नदियां गंगा में मिलती हैं उनका पानी भी मुहाने पर जम चुका है। 

इनमें कछोरा नाला, हर्षिल सेना के कैम्प के निकट के दोनों नाले भी जम चुके हैं। हर्षिल हेलीपैड के पास गंगा की एक छोटी धारा ने भी बर्फ का रूप ले लिया है। ठंड के कहर से बर्फ बने नाले और झरने पर्यटकों को रोमांचित कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह कोरी ठंड किसी मुसीबत से कम नहीं है। हर्षिल की प्रधान बसंती नेगी कहती हैं कि अभी तक हर्षिल में बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन ठंड बहुत अधिक बढ़ गई। ठंड के कारण गांवों में पाइपों में भी पानी जम चुका है। पानी के इंतजाम के लिए ग्रामीणों को भागीरथी नदी या फिर मूल स्रोत से पानी लाना पड़ रहा है।

तापमान की स्थिति 

स्थान———-अधिकतम——-न्यूनतम 

उत्तरकाशी——-19—————-1

गंगोत्री————–3———-माइनस 5

हर्षिल—————4———-माइनस 6 

यमुनोत्री————3———माइनस 7