एम.पी. में भाजपा को बचने के लिए मैदान में उतारेगी आर.एस.एस.

नई दिल्ली। पिछले 15 साल में इस बार पहली बार बीजेपी को मध्यप्रदेश में कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन इस बार अगड़ी जातियों की नाराजगी ने बीजेपी की मुश्किल और बड़ा दी है। सवर्णों के गुस्से ने भाजपा के नेताओं की नींद उड़ा रखी है। सूत्रों का कहना है कि ऊपरी जाति के समुदाय का गुस्सा इतना है कि मध्य प्रदेश में आरएसएस का मजबूत आधार होने के बावजूद वो भी इन्हें नहीं समझा पा रही है। आरएसएस के मौजूदा सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी मध्यप्रदेश से ही हैं और पूर्व सरसंघलक केएस सुदर्शन ने काफी वक्त तक मध्यप्रदेश में काम किया था और संघ की जड़ों को मजबूत किया था।सवर्णों ने कई जगह तो पोस्टर और बैनर तक लगा दिए हैं और उसमें लिखा है ‘हम सवर्ण हैं कृप्या हमसे वोट न मांगे, हमारा वोट भाजपा के लिए नहीं है’। कई जगह नोटा का बटन दबाने की अपील की जा रही है। इसके अलावा ‘सपाक्स’ और ‘अजाक्स’ जैसे संगठन भी बीजेपी की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। अब तक अगड़ी जाति के मतदाता प्रदेश में बीजेपी का साथ देते आए हैं। एससी/एसटी कर्मचारियों के संगठन ‘अजाक्स’ के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि एससी/एसटी आरक्षण को कई खत्म नहीं कर सकता है। हम सुप्रीम कोर्ट के सबसे बड़े वकील को लेंगे और आरक्षण को बचाने के लिए जो भी आवश्यक होगा करेंगे। शिवराज के इस बयान से अगड़ों में नाराजगी है और इसके अलावा एससी/एसटी एक्ट को लेकर भी प्रदेश में सवर्ण बीजेपी से खासे नाराज हैं। कांग्रेस इस स्थिति का फायदा उठाना चाह रही है। कांग्रेस के नेता लगातार अगड़ों के नेताओं के संपर्क में हैं और उन्हें कांग्रेस का साथ देने के लिए मना रहे हैं। एससी/एसटी अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भी कांग्रेस ने सवर्णों का गुस्सा झेला, लेकिन कोई नारजगी नहीं दिखाई। जबकि दूसरी ओर बीजेपी के मंत्रियों के बंगलों के बाहर हुए प्रदर्शनों में उच्च जाति के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा और गिरफ्तार किया। बीजेपी के इस रवैये से भी सवर्ण नाराज हैं और अब आरएसएस की कोशिश भी सफल होती नजर नहीं आ रही है।