एससी, एसटी कानून पर सियासत तेज, एससी एसटी एक्ट पर सवर्णों का भारत बंद आज


नई दिल्ली : एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून पर देश में सियासत तेज हो गई है। अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है। इसमें देश से अलग-अलग करीब 35 से ज्यादा संगठनों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। राजनीतिक दलों में इस मुद्दों को लेकर ऊहापोह साफ नजर आ रही है। आक्रोश से बचने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। भाजपा और कांग्रेस की ओर से सतर्क प्रतिक्रिया दी जा रही है। लेकिन पार्टी के अंदर भी सवर्ण नेताओं की बेचैनी आलाकमान तक पहुंच रही है। भाजपा ने अपने सांसदों को सतर्क रूप से बयान देने को कहा है। एक सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससी, एसटी विधेयक पारित होने के बाद ही भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा था कि इस मामले में राजनीतिक गुणाभाग से इतर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का प्रयास किया जाना चाहिए। भाजपा ने अगड़ी जातियों को समझाने का जिम्मा सवर्ण वर्ग से ताल्लुक रखने वाले बड़े नेताओं को दिया है।

कांग्रेस भी इस मामले में सतर्क रुख अपना रही है। पार्टी की ओर से संतुलन साधने की कोशिश हो रही है। नफा नुकसान का आकलन करते हुए कई दलों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। मध्य प्रदेश में इस कानून का सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में सवर्ण वर्ग से जुड़े लोगों ने घरों पर नोटिस चस्पा करके राजनीतिक दलों से वोट नहीं मांगने को कहा है। आने वाले चुनाव को देखते हुए भाजपा डैमेज कंट्रोल का प्रयास कर रही है। वहीं कांग्रेस भी लोगों को समझा रही है कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि अगर विरोध जारी रहा, तो चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। सोशल मीडिया पर इस कानून के गुणदोष को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कानून के दुरुपयोग की आशंका वाले मैसेज वायरल हो रहे हैं। गुरुवार को बंद के आह्वान को देखते हुए कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद करने पर विचार हुआ है।