औली में दो सौ करोड़ की शाही शादी आज, जानिए क्या खास है इसमें

औली में होने वाली शाही शादी के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के उद्योगपति अजय गुप्ता के पुत्र सूर्यकांत का विवाह आज है। इसकी रस्में भी शुरू कर दी गई हैं। विवाह स्थल से मंडप तक करीब सौ मीटर की दूरी सूर्यकांत घोड़ी पर चढ़कर तय करेंगे। इससे पहले बुधवार को रिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया। इसमें बांबे रॉकर्स की धूम रही। शाम को गायिका कनिका कपूर ने अपने गीतों से समां बांधा।

औली में उद्योगपति अजय गुप्ता के बेटे सूर्यकांत की शादी आज हो रही है। इसके बाद 22 जून को उनके छोटे भाई अतुल गुप्ता के बेटे शशांक का विवाह होना है। विवाह समारोह के लिए सेलेब्रिटी का पहुंचना शुरू हो गया है।

बुधवार सुबह रिंग सेरेमनी का आयोजन हुआ। इसमें वर व वधू पक्ष और परिवार के नजदीकी लोगों ने ही हिस्सा लिया। इस दौरान बांबे रॉकर्स ने अपने बैंड और पंजाबी गीतों की धुनों पर लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया।

गुप्ता बंधुओं के पारिवारिक मित्र सुमित अदलखा ने बताया कि गीत ‘बॉबी डॉल’ के लिए फिल्म फेयर अवार्ड हासिल कर चुकीं कनिका कपूर ने डिनर के दौरान अपने गीतों से समां बांध दिया।

त्रियुगीनारायण पर संशय

नव दंपती के फेरे के बाद त्रियुगीनारायण जाने पर अभी संशय है। दरअसल, हाई कोर्ट के औली में हेलीकॉप्टर उतारने पर लगी रोक के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई है। पहले योजना थी कि शादी के बाद नव दंपती और मेहमानों को त्रियुगीनारायण के दर्शन कराए जाएंगे।

ग्रामीणों को पारंपरिक वेशभूषा में आने का न्योता

घोड़े चलाकर परिवार की गुजर करने वाले जोशीमठ के रविग्राम निवासी संधु लाल के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती है। वजह, संधु के दो घोड़े गुप्ता बंधुओं ने शाही शादी के लिए किराये पर लिए हैं और किराया भी उसे आम दिनों से पांच गुना अधिक मिल रहा है।

संधु की ही तरह आसपास के गांवों के दो सौ से अधिक लोग भी शादी समारोह में विभिन्न कार्य निष्पादित कर रहे हैं। इसकी एवज में उन्हें अच्छा-खासा मेहनताना मिल रहा है।

गुप्ता बंधुओं के पुत्रों की इस शाही शादी से आसपास के आधा दर्जन गांवों के घोड़ा संचालक, ढाबा संचालक, लोक वादक और पहाड़ी उत्पादों के स्टाल लगाने लोग बड़ी तादाद में जुड़े हैं। शादी में उत्तर भारतीय व दक्षिण भारतीय समेत विदेशी व पहाड़ी व्यंजनों का मेन्यू भी शामिल किया गया है।

ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए यह शादी समारोह किसी किसी उत्सव से कम नहीं है। महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग सज-धजकर सुबह से ही शादी की तैयारियां देखने औली पहुंच रहे हैं। हालांकि, मुख्य पांडाल व होटल में मेहमानों को छोड़ किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक है। बावजूद इसके ग्रामीण समारोह स्थल को बाहर से निहारकर ही प्रफुल्लित हो रहे हैं।

गुप्ता परिवार भी स्थानीय लोगों को विशेष तवज्जो दे रहा है। इसका प्रमाण हैं शादी से पूर्व आसपास के सभी गांवों में दिए गए भोज। आयोजकों की ओर से स्थानीय लोगों से पारंपरिक वेशभूषा में शादी समारोह में पहुंचने का आग्रह किया गया है। साथ ही लोक वादकों को भी बुलावा भेजा गया है।

इसके अलावा मेहमान इस दौरान पहाड़ी व्यंजनों का जायका भी ले सकेंगे। इसके लिए उद्योग विभाग से जुड़े विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से स्थानीय उत्पाद खरीदे गए हैं।

शाही शादी के इवेंट मैनेजर पटवाल बताते हैं मेन्यू में भटवाणी, चैंसू, झंगोरे की खीर, दाल के पकौड़े, लाल भात जैसे उत्तराखंडी व्यंजन शामिल किए हैं। महिला बुनकर समिति गुप्तकाशी के डॉ. हरिकृष्ण बगवाड़ी बताते हैं कि शादी में पहाड़ी व्यंजनों के साथ ही स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाए जा रहे हैं। ताकि देश-विदेश से आने वाले मेहमान इनकी खरीदारी कर सकें।

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने औली में डेरा डाला

औली में बुधवार को भी गुप्ता परिवार की शाही शादी की तैयारियां जोर-शोर से चलती रहीं। वहीं, नैनीताल हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बाद प्रशासन भी खासा सक्रिय नजर आया। तहसीलदार चंद्रशेखर वशिष्ठ के नेतृत्व में नायब तहसीलदार बल्लू लाल समेत अन्य राजस्व अधिकारियों की टीम औली में ही डेरा डाल दिया है। साथ ही जिला प्रशासन की ओर से लगातार शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।

विदित हो कि इस शादी के लिए नैनीताल हाई कोर्ट ने बाकायदा गाइड लाइन जारी की हुई है। साथ ही शादी समारोह के दौरान औली में हेलीकॉप्टरों की उड़ान पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। अदालत ने जिलाधिकारी चमोली के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाबदेह बनाते हुए उन्हें शादी समारोह पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसी कड़ी में प्रशासन की टीम ने औली में डेरा डाला हुआ है। इस संबंध में जिलाधिकारी सात जुलाई को अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेंगे।

श्रद्धा, कनिका, बादशाह पहुंचे

औली में शाही शादी का हिस्सा बनने फिल्म स्टारों की आवाजाही लगातार जारी है। बुधवार को अभिनेत्री श्रद्धा कपूर, सिंगर कनिका कपूर व गायक बादशाह के अलावा बांबे रॉकर्स बैंड भी औली पहुंच गया। गुप्ता बंधुओं के पारिवारिक मित्र सुमित अदलखा ने बताया कि आज दोपहर को उद्योगपति अजय गुप्ता के पुत्र सूर्यकांत का विवाह संपन्न होगा।

वहीं, बीती रात औली के क्लिप टॉप क्लब होटल के सामने बने मंच पर प्रसिद्ध सूफी गायक कैलाश खेर ने गायिकी का जादू बिखेरा। जबकि मुंबई से आए कलाकारों ने गीत-नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं।

नाग-नागिन मंदिर में टेका मत्था

गुप्ता बंधुओं के परिवारों ने औली के नाग-नागिन मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान गुप्ता परिवार की ओर से भोज का आयोजन भी किया गया।

जाम से परेशान रहे मेहमान

औली में हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग पर रोक के बाद गुप्ता परिवार के मेहमान जोशीमठ में सड़क मार्ग के जरिये औली पहुंच रहे हैं। इसके चलते बुधवार को जोशीमठ से सुनील बैंड तक कई जगह जाम की स्थिति बनी रही। मेहमान व पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी जाम से जूझना पड़ा।

जनजातीय पौंणा नृत्य ने किया सम्मोहित

गुप्ता बंधुओं के बेटों की शाही शादी में पौंणा नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। जनजातीय परिधानों में सजी भोटिया महिलाओं के इस नृत्य पर मेहमानों के साथ ही पर्यटक भी जमकर झूमे। नीती घाटी की ये महिलाएं औली में शाही शादी की तैयारियां देखने पहुंची हुई थीं। इनमें ग्राम तेफना निवासी 72-वर्षीय देवकी राणा, 60-वर्षीय परसारी निवासी कार्तीकी देवी आदि शामिल थीं।

लोक के रंगों में सराबोर शाही शादी के मेहमान

औली के क्लिप टॉप क्लब होटल में गुप्ता परिवार के मेहमानों को हुड़के की थाप और मशकबीन व बांसुरी की लहरियों पर कुमाऊंनी लोकगीत-बेडू पाको बारामासा, नारैणा काफल पाको चैता, की धुन सुनाई गई। दरअसल, नाश्ते के दौरान पहाड़ी वाद्ययंत्रों के सुरों से मेहमानों को रूबरू कराए जाने का कार्यक्रम रखा गया था। इसके लिए वाण-देवाल से बांसुरी वादक कुंदन सिंह बिष्ट, कर्णप्रयाग से हुड़का वादक भागचंद सावंत व थराली से मशकबीन वादक शिव सिंह बिष्ट औली बुलाए गए थे।

शाही शादी में मेहमानों के नाश्ते सहित आवाजाही के दौरान हुड़का, मशकबीन व बांसुरी की धुनों पर ‘बेडू पाको बारामासा’ और ‘मेरा डांड्यों-कांठ्यों का मुलुक ऐलो, बसंत ऋतु मां ऐई’ जैसे गीत सुनाए गए। इससे मेहमान खासे प्रभावित हुए और उन्होंने कलाकारों से इसका मतलब भी पूछा। कलाकारों ने पहाड़ी गीतों की धुन बजाने के साथ ही मेहमानों को उत्तराखंड की पौराणिक संस्कृति की जानकारी भी दी।

बांसुरी वादक कुंदन सिंह बिष्ट के अनुसार सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि उन्हें देशी-विदेशी मेहमानों के बीच उत्तराखंड की लोक संस्कृति को रखने का मौका मिला। हुड़का वादक भागचंद का कहना था कि हुड़का वादन गांवों में देवी-देवताओं के नृत्य में ही दिखता है। वे वर्षों से हुड़का वादन करते आ रहे हैं। अब तक वह हुड़का वादन को समय की बर्बादी समझते थे, लेकिन इस शादी से पता लगा है कि यह रोजगार का एक बेहतर जरिया बन सकता है। बशर्ते लोग उत्तराखंड की संस्कृति की कद्र पहाड़ी शादियों के दौरान भी करें।