कब थमेगी दलितों पर हिंसा

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आप के पत्र

Dastak August coverभारत एक शांति प्रिय देश है। भारत ने कभी भी हिंसा का समर्थन नही किया फिर ये भेदभाव क्यों? दलितों पर हो रही हिंसा कब रुकेगी। अभी गुजरात में कुछ असामाजिक लोगों ने दलितों को सिर्फ इसलिये बुरी तरह पीटा क्योंकि उन्होंने मृत पशुओं की खाल उतारी थी पर शायद ऐसे लोग ये भूल गए की ये काम भी आप ही लोगों ने उन्हें दिया। समझाने के तरीके और भी हो सकते हैं पर ऐसी घिनौनी हरकत शायद मानवता के लिये ठीक नही। यह कोई नई घटना नहीं है, इन गरीब मजबूरों पर सदियों से ऐसे अत्याचार होते रहे हैं। हरियाणा के रोहतक विश्वविद्यालय की दलित छात्रा का दूसरी बार बलात्कार किया गया। उन्हीं लोगों ने किया जिन्होंने 2013 में भिवानी में उसके साथ बलात्कार किया था। कानपुर देहात के मंगलपुर कस्बे में दलित महिलाओं के मंदिर में आने पर उस मंदिर के दरबाजे बंद कर दिए गए। ऐसे ही राजस्थान के बीकानेर जिले के गांव वरजंगसर में दलितों से जबरन मृत जानवरों को उठवाया जाता है और मरे हुए पशुओं को उन्हीं के गांव में इसलिये फेंका जाता है कि उनसे बदबू आती है। क्या ऐसे कार्य समाज को पीछे नही कर रहे हैं? सबसे दुखद बात यह है कि दलितों पर अत्याचारों के विरोध में केवल दलित ही आवाज उठाते हैं अन्य समाज कभी इसके विरोध में खड़ा नही होता। जब तक सारा भारतीय समाज ऐसी घटनाओं के खिलाफ खड़ा नही होगा तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।

-प्रीति भारद्वाज, दिल्ली

वैकल्पिक राजनीति का अंत
आजकल राजनीति में जिस प्रकार की गिरावट आ रही है, उसको देखते हुए देश की जनता ऐसी राजनीतिक विचारधारा की आशा कर रही है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला सके। भारतीय राजनीति में एक विकल्प के रूप में आम आदमी पार्टी बनी थी और पार्टी की ‘तंत्र परिवर्तन’ की इच्छा को महत्व देकर दिल्ली की जनता ने विधानसभा के चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ चुना लेकिन अफसोस की बात है कि दो साल की अवधि में ही ‘आप’ के 11 विधायक धोखाधड़ी, दुष्कर्म, मारपीट आदि आपराधिक मामलों में फंस चुके हैं। पार्टी के सांसद भगवंत मान को संसद भवन के भीतरी भाग का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में अपलोड करने के मामले में जांच पूरी होने तक संसदीय कार्यवाही से दूर रहने का आदेश हुआ है। उनकी इस हरकत से संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर आंच आने की संभावना है। लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता मान की इस हरकत का विरोध न कर उनकी कोई गलती ही नहीं मान रहे हैं। खुद भगवंत मान का भी कहना है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। कानून को स्वीकार न करना और अराजक व्यवहार करना आम आदमी पार्टी की संस्कृति हो गयी है। यह गंभीर विषय है कि विकल्प बनने की आस जगाने वाली ‘आप’ में इतने सारे आपराधिक छवि के लोग कैसे टिकट पाये और गैर जिम्मेदार लोक प्रतिनिधि के रूप में उभरे। इनके 21 विधायकों की सदस्यता भी रद्द हो सकती है जो दोहरे लाभ के पद के मामले में फंसे हैं और मामला विचाराधीन हैं। आप को जनता से माफी मांग कर सिर्फ आरोप की राजनीति से बचकर एक अच्छी राजनैतिक परंपरा की नींव डालनी चाहिए। देश को एक स्वच्छ राजनीति की आवश्यकता है। इसकी पूर्ति आप कर सकती है, लेकिन वह केवल आरोप लगाने वाली पार्टी बन कर रह गई है।
दिनेश पटेल, फाफामऊ, इलाहाबाद

धर्म के साथ देशभक्ति भी
सावन का पवित्र महीना आते ही पूरा देश शंकरमय हो जाता है। जिधर देखो बम भोले के जयकारे सुनाई देते हैं लेकिन इस बार कुछ अलग ही नजारा दिखाई दे रहा है। भोले के जयकारों के साथ-साथ भारत माता के जयकारे भी सुनाई दे रहे हैं। भगवा रंग में रंगी काँवड़ के साथ भारतीय तिरंगा भी दिखाई दे रहा है। ये अद्भुत नजारा देखने लायक है। धर्म के साथ-साथ देशभक्ति भी। भारत में हर वर्ष लगभग दो करोड़ भोले काँवड़ लेकर आते हैं और इतने लोग एक साथ भारत माता की जय करेंगे तो ये देश के लिये जरूर अद्भुत होगा। जगह-जगह लिखा दिखाई दे रहा है- एक काँवड़ देश के नाम। पहले ज्यादातर भोले अपने लिये कावड़ लेकर आते थे पर इस बार कुछ भोले देश के लिए भी काँवड़ लेकर आ रहे हैं। ये देश के लिये एक अच्छी बात है। लोग धर्म में भी देशभक्ति करने लगे। अगर भारत में रहने वाले सभी धर्मों के लोग अपने धार्मिक त्योहारों में देश को भी महत्व देने लगेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुन:विश्व गुरु के आसन पर विराजमान होगा।
यश वर्मा, वाराणसी

पेड़ बचाना जरूरी
वैदिक साहित्य में कहा गया है कि एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान होता है। इसलिए वृक्षों में देवत्व के दर्शन किए गए हैं। यही कारण है कि भारत में वृक्षों को पूजने की परम्परा भी है। लोगों के मन पर वृक्षों के प्रति सद्भाव पैदा करने के लिए ऐसा किया गया है ताकि उनको सुरक्षित रखा जा सके। प्रत्येक सार्वजनिक स्थलों तथा मंदिरों में ऐसे वृक्ष लगाने की परम्परा है। उनके औषधीय प्रयोग को भारतीय भली प्रकार से जानते भी हैं। इसके बाद भी देश से वृक्ष कम होते जा रहे हैं। विकास के नाम पर वृक्षों को काटने का काम चल रहा है। अच्छा यह हो कि हम सामाजिक वानिकी पर जोर दें। इससे देश का संकट कुछ हद तक कम हो सकता है। विकास के नाम पर जंगलों को नष्ट किया जा रहा है। आखिर ये कौन लोग हैं और इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? ऐसे में पेड़ लगाओ अभियान बेमानी तथा दिखावा लगता है। अभी राज्य में पेड़ लगाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है, जिसकी बानगी खबरों में दिखती है। पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है पेड़ बचाना।
प्रशांत गोयल, मेरठ

दुर्गम लद्दाख में भारतीय टैंक
इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत ने 100 टैंक तैनात कर दिए हैं। चौदह हजार फीट की ऊंचाई पर टैंक ले जाना असंभव सा कार्य है। 1948 में जोजीला दर्रे पर मेजर जनरल थिमैय्या जब टैंक लेकर पहुंचे थे तो हमलावर पाकिस्तानियों के छक्के छूट गए थे लेकन जोजीला की ऊंचाई 11,578 फीट ही है। अब 14000 फीट पर भारतीय टैंक देखकर चीनियों के होश उड़ रहे हैं। वहां हड़कंप मचा है। खुद चीनी नेतृत्व को यह कहने को विवश होना पड़ा कि भारत इस तरह उससे निवेश हासिल नहीं कर सकता। याद रहे कि चीन द्वारा बार-बार सीमा लांघने और हमारी भूमि पर अवैध दावे ठोंकते रहने के बावजूद भारत ने उसे कभी आर्थिक धमकी नहीं दी। भारत ने कभी नहीं कहा कि हम चीनी माल के आयात पर प्रतिबंध लगायेंगे। मोदी के मात्र एक साहसी कदम- लद्दाख के दुर्गम इलाके में टैंकों की तैनाती ने चीन की चिड़चिड़ाहट सामने ला दी है।
-अभ्युदय सिंह, लखनऊ