कलकत्ता के हाथ रिक्शा चालकों के दर्द को बयां करेगी प्रज्ञेश सिंह की नयी डाक्युमेंटरी

-डी.एन. वर्मा

लखनऊ : हाल ही में कई पुरस्कार बटोरने वाली शॉर्ट फिल्म ‘छोटी सी गुजारिश’ के निर्देशक प्रज्ञेश सिंह, कोलकाता के हाथ रिक्शा पर अपनी वृत्तचित्र (डाक्युमेंटरी) को लेकर एक बार फिर दर्शकों को झकझोरने के लिए तैयार हैं। वृत्तचित्र (डाक्युमेंटरी) का नाम ‘दासता की विरासत’ रखा है और यह वृत्तचित्र अंग्रेजों के समय से जारी जानवरों की जगह इंसानों के उपयोग की कुप्रथा का वर्णन करेगा। यह फिल्म जॉय ऑफ़ सिटी के नाम से मशहूर कलकत्ता में होगी। इसका आंशिक फिल्मांकन बिहार झारखंड और उत्तराखंड में भी किया जाएगा।

यह वृत्तचित्र इंसानियत के कडवे पहलू का मंथन करता है जिसे कोलकाता की सड़क पर विरासत के रूप में संरक्षित किया गया है। प्रज्ञेश सिंह का कहना है कि एक ओर जहां देश से सिर पर मैला ढोने,बाल विवाह, बालश्रम, दहेज प्रथा एवं सती प्रथा जैसे तमाम अमानवीय प्रथाएं कानून बनाकर बंद कर दी गईं। वहीँ कलकत्ता शहर ने शदियों से हाथ रिक्शा को विरासत के रूप में संरक्षित रखा है। कुछ लोग और संगठन इस अमानवीय और गैरलोकतांत्रिक आचरण के लिएविरासत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुवे प्रज्ञेश सिंह कहते है की विरासत वह है हमें जिस पर गर्व हो, उत्तराधिकार में मिली प्रत्येक चीज़ विरासत नहीं होती, विरासत में इन्सानी मूल्यों पर खरा उतरने की सामर्थ्य होनी चाहिए। जो भी लोकतंत्र पर दाग के रूप में हो, उसे विरासत के रूप में कतई नहीं माना जाना चाहिए, वृत्तचित्र का नाम स्वयं में ही इस मुद्दे की संवेदनशीलता को स्पस्ट करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह वृत्तचित्र इन रिक्शा चालकों तक सीमित नहीं है, लेकिन यह समाज में सामंतवाद के अस्तित्व वाली मानसिकता का परिचायक है।

इस दस्तावेजी को प्रज्ञेश सिंह द्वारा निर्देशित किया जा रहा है और उनके साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली फिल्म फिल्मिस्टाइन के लिए प्रसिद्धि प्राप्त सुभ्रांशु दास द्वारा सिनेमैटोग्राफी की जा रही है। शिशिर शर्मा ने इस वृत्तचित्र के लिए आवाज देने की पुष्टि की है।फिल्मकारों का मानना है कि यह संदर्भ अछूता है, और वृत्तचित्र (डाक्युमेंटरी) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सकती है। पूछे जाने पर प्रज्ञेस सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी भी पुरस्कार के लिए फ़िल्में नहीं बनायी। पुरस्कार सराहना है और और इससे अच्छा कार्य करने का मनोबल बढ़ता है। जो विषय उनके दिल को छूता है, वह उसी विषय का चयन करते हैं। प्रज्ञेश सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म जुलाई 2018 तक पूरी हो जाएगी। प्रज्ञेश सिंह बताते हैं कि फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर भेजा जाएगा और उसके बाद डिजिटल प्रारूप में टीवीके माध्यम से जारी किया जाएगा।

लखनऊ के 42 वर्षीय प्रज्ञेश सिंह में सामजिक संदर्भों को पहचानने की जो क्षमता है वह अन्य फिल्म निर्माताओं से उन्हें अलग करती है। अपनी पिछली लघु लघु फिल्म से अपनी सामजिक मुद्दे को भावनात्मक चेन में विकसित करने की क्षमता का लोहा मनवा चुके प्रज्ञेश सिंह की लघु फिल्म छोटी सी गुजारिश 12 अवार्ड जीत चुकी है और वर्तमान में कांस में शोर्ट फिल्म कार्नर में है। प्रज्ञेश सिंह का मानना ​​है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार केवल फिल्म को ही अनुदान दे रही है, लेकिन लघु फिल्म और वृत्तचित्र (डाक्युमेंटरी) के लिए वित्तीय सहायता, समाजिक मुद्दों को उठाने में मददगार होगी, साथ ही इससे उत्तर प्रदेश के नए फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए सकारात्मक अवसर उपलब्ध होंगे।