क्या सच में हैक हो गया आधार सॉफ्टवेयर, जाने पूरी सच्चाई

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आधार डेटा की सिक्योरिटी एक ऐसा टॉपिक है जो इसकी शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है. अब आधार डेटा फिर से एक बार खबरों में है. क्योंकि तीन महीने तक चले  एक इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि एक सॉफ्टवेयर पैच है जो आधार आइडेंटिटीडेटाबेस में स्टोर डेटा की सिक्योरिटी को खतरे में डाल देता है.

हफपोस्ट इंडिया’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि एक पैच, जिसे यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) द्वारा डेवलप नहीं किया गया है, इसकी मदद से कथित तौर पर हैकर्स आधिकारिक आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर के सिक्योरिटी फीचर को बंद कर अनाधिकृत आधार नंबर जेनरेट कर रहे हैं.

कांग्रेस ने आधार के डेटाबेस में सेंध की खबरों के बीच मंगलवार को कहा कि UIDAI में दर्ज लोगों के विवरण खतरे में हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति 2,500 रुपये में आसानी से मिलने वाले इस पैच के जरिए दुनिया भर में कहीं भी आधार ID बना सकता है.

रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने एक ट्वीट में कहा, ‘आधार नामांकन सॉफ्टवेयर के हैक हो जाने से आधार डेटाबेस की सुरक्षा खतरे में आ सकती है. हमें उम्मीद है कि अधिकारी भावी नामांकनों को सुरक्षित करने और संदिग्ध नामांकन की पुष्टि के लिए उचित कदम उठाएंगे.’

पिछले महीने फ्रांसीसी सुरक्षा विशेषज्ञ इलियट एल्डर्सन ने UIDAI से सवाल किया था कि क्यों UIDAI का हेल्पलाइन नंबर कई लोगों के फोन पर उनकी जानकारी के बिना दर्ज हो गई थी. इस पर काफी विवाद हुआ था. अब उन्होंने एक बार फिर कहा है कि यूआईडीएआई डेटा में सेंध को रोकने के लिए हैकर्स के साथ काम करें.

उन्होंने कहा, ‘मैं दोहराता हूं कि कोई भी चीज ऐसी नहीं है, जिसे हैक न किया जा सके. ये आधार पर भी लागू होता है. कभी भी बहुत देर नहीं होती. सुनिए और हैकर्स को धमकी देने के बजाए उनसे बात कीजिए.’

UIDAI ने कहा रिपोर्ट बेबुनियाद

वहीं, UIDAI ने एक बयान जारी करते हुए आधार सॉफ्वेयर हैक हो जाने की खबर को बेबुनियाद कहा है. कुछ लोग जानबूझकर लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. UIDAI ने कहा है कि किसी भी डेटा को डिस्क में सेव करने से पहले जरूरी सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखा जाता है.

UIDAI ने आगे स्पष्ट किया कि कोई भी ऑपरेटर आधार बना या अपडेट नहीं कर सकता है. जब तक कोई निवासी स्वयं अपनी बॉयोमेट्रिक डिटेल उसे ना दे दे.

संस्था ने रिपोर्ट के दावे को पूरी तरह से गलत बताया है जिसमें कहा गया है कि कोई भी आधार डेटाबेस में प्रवेश कर सकता है और कई आधार कार्ड बना सकता है.

UIDAI ने ये भी कहा है कि उनके द्वारा सिस्टम में समयानुसार नए सिक्योरिटी फीचर्स को जोड़ा जाता है. ताकि किसी भी नए खतरे से बचा जा सके.