खत्म हुई मोदी केयर की सबसे बड़ी बाधा, 20 राज्य स्कीम से जुड़ने को हुए राजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्टशन स्कीम’ को लागू करने की सबसे बड़ी बाधा खत्म हो गई है. 20 राज्य इस स्कीम को लागू करने पर राजी हो गए हैं. मोदी केयर के नाम से जानी जाने वाली इस योजना को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पहले ही लागू कर चुकी है.

खत्म हुई मोदी केयर की सबसे बड़ी बाधा, 20 राज्य स्कीम से जुड़ने को हुए राजीइस मामले को लेकर आयुष्मान भारत मिशन के अधिकारियों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक आयोजित की, जिसमें इन राज्यों ने स्कीम को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए.

केंद्र सरकार की हेल्थ कवरेज में आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के दायरे 10 करोड़ गरीब परिवार आएंगे. इसके तहत प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये तक की कवरेज मिलेगी.

इसके साथ ही देशभर के अस्पतालों में इलाज, यूनिफाइड आईटी फ्रेमवर्क और सामाजिक-आर्थिक व जातिगत आंकड़ों के आधार पर सभी योग्य लाभार्थियों को आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के तहत मिलने वाली सुविधाएं मिलेंगी.

हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा था कि आयुष्मान भारत के माध्यम से हमारी सरकार गुणवत्ता स्वास्थ्य देखभाल को सस्ती और समावेशी बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. सरकार का ध्यान गुणवत्ता वाली सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता तक पहुंचाने पर है. हम इस योजना को साल 2022 तक आम जनता तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध हैं.

कैसी होगी योजना

यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी स्कीम को 10 साल में तीन चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में सभी कामगारों को मामूली कवरेज दिया जाएगा, जिसमें हेल्थ सिक्योरिटी और रिटायरमेंट बेनेफिट्स होंगे. दूसरे चरण में बेरोजगारी के लिए बेनिफिट जोड़े जाएंगे. तीसरे चरण में दूसरी कल्याणकारी योजनाओं को शुरू किया जा सकता है.

50 करोड़ लाभार्थियों को चार स्तरों में बांटा जाएगा. पहले स्तर में गरीबी रेखा से नीचे के ऐसे लोग होंगे, जो कुछ भुगतान नहीं कर सकते. ऐसे लोगों से जुड़ी लागत केंद्र सरकार इन लोगों की भलाई के लिए वसूले जाने वाले टैक्स से करेगी.

कुछ योगदान कर सकने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगारों को दूसरे स्तर में सब्सिडाइज्ड स्कीमों के तहत कवर किया जाएगा. तीसरे स्तर में वे लोग होंगे, जो खुद या अपने एंप्लॉयर्स के साथ मिलकर पर्याप्त योगदान कर सकते हैं. चौथे स्तर में अपेक्षाकृत संपन्न कामगार को रखा जाएगा, जो खुद अंशदान कर सकते हों.