गंगा स्वच्छता अभियान की झोली में 5 बिलियन डॉलर

-अजित वर्मा

लन्दन में भारतीय कंपनियों, अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओज) ने नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा नदी के किनारे घाटों, नदियों के अहातों, श्मशान घाटों और पार्कों जैसी सुविधाएं जुटाने के लिए 5 बिलियन डॉलर (लगभग तीन सौ अरब रु.)से भी अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जतायी है। लंदन में 29 नवम्बर 2017 को रोड शो में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों से गंगा सफाई अभियान में भाग लेने की अपील की थी। रोड शो का आयोजन गंगा सफाई राष्ट्रीय अभियान तथा यू.के. में भारतीय उच्च आयोग द्वारा किया गया था। नमामि गंगे अभियान के इस सिलसिले में जिन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए, उनमें पटना में गंगा नदी पर घाटों और सुविधाओं हेतु वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल, कानपुर के लिए फोरसाइट समूह के रवि मल्होत्रा, हरिद्वार के लिए हिंदुजा समूह, कोलकाता के लिए इंडो रामा समूह के प्रकाश लोहिया के साथ हुए एमओयू शामिल हैं। परियोजनाओं का विकास, निर्माण तथा परिचालन इन कंपनियों द्वारा अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरा दायित्व (सीएसआर) संबंधी कार्यकलापों के अंतर्गत किया जाएगा।

इसी दौरान लंदन वाटर केल्टिक रेनुएबल्स, मेडिफार्म, एनएचवी प्रौद्योगिकियां और अरकाताप सहित कई कंपनियों के साथ नदी सफाई हेतु नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गए। इनके अलावा, बहुत सी कंपनियों और व्यक्तियों ने 200 से अधिक परियोजनाओं की सूची में से, जिनके लिए निजी धन जुटाने की अपेक्षा की गई थी, कुछ परियोजनाएं अपने हाथ में लेने की सहमति जताई। घाटों, श्मशान घाटों, जलाशयों, पार्कों, स्वच्छता सुविधाओं, जन सुविधाओं और नदी अहातों के विकास की, जिनके लिए अधिक धन राशि की आवश्यकता है, 10 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं बनाई गई हैं। 2500 करोड रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं जिनके लिए निजी स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता है, एक पुस्तिका के रूप में भी प्रकाशित की गई हैं और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय अभियान (एनएमसीजी) की वेबसाइट पर ई-बुकलेट के रूप में भी उपलब्ध हैं। सरकार व्यापारिक समुदाय से निरन्तर निवेदन कर रही है कि वे अपनी पसंद की परियोजनाओं में धन लगाकर नदी सफाई से जुड़े नामामि गंगे अभियान में योगदान दें।

निस्संदेह गंगा नदी की स्वच्छता पर सर्वोच्च प्राथमिकता से कार्य होना चाहिए। इसके लिए धन की व्यवस्था भी की जाना चाहिए। विश्व बैंक, आईएमएफ, एडीबी, ब्रिक्स बैंक के अलावा अन्य इच्छुक देशों और व्यापारिक घरानों से तो धन जुटाया ही जाना चाहिए। केन्द्र सरकार और गंगा के प्रवाह पथ में पड़ने वाले राज्यों को अपने स्तर पर धन की व्यवस्था में योगदान देना चाहिए। हमारा मानना है कि चूंकि हमने स्वयं गंगा को मलिन किया है इसलिए उसे उसकी स्वच्छता लौटाना हमारा ही दायित्व है। अब जो बांध निर्मित किये जा चुके हैं, उन्हें ध्वस्त करना तो सम्भव नहीं होगा, लेकिन जिन उद्योगों और स्थानीय निकायों ने वर्षों तक गंगा में अपशिष्ट उड़ेला है और गंगा किनारे के गांवों में खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खाद छिड़क कर भूजल को जहरीला बनाकर गंगा को प्रभावित किया है अब उन्हें प्रतिदान देना चाहिए। गंगा किनारे बने उद्योगों, शहरों और गाँवों पर गंगा शुद्धि कर आरोपित किया जाना चाहिए और उससे मिलने वाली राशि से नियमित रूप से गंगा को स्वच्छ रखने के कार्यक्रम चलाये जाना चाहिए।