जनता को बड़ी उम्मीदें हैं आपसे

- in आप के पत्र

संसद का आगामी शीत सत्र प्रारम्भ होने वाला है। बीते मानसून सत्र में जनप्रतिनिधियों की हठशीलता व उनका दुव्र्यवहार जिस प्रकार रहा वह भारतीय राजनीति का लक्षण नहीं है और न ही भारतीय जनता अपने जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा रखती है कि वे मूल्यवान संसद के समय को हंगामे की भेंट चढ़ा दें। भारतीय राजनीति का इतिहास तो सदा से गंभीर व चिंतनशील रहा है, ये कार्य हमारी राजनीति परम्परा और संसद की गरिमा को आहत करते हैं। वास्तव में जनता आपको जिस आशा और जिन अपेक्षाओं से चुनकर लोकतंत्र के मंदिर में भेजती है आप वहां जाकर वह कार्य नहीं करते। इन दुष्कार्यों से जनता की उम्मीद राजनीति से दूर होती जा रही है और राजनेताओं की पहचान समाज में धूमिल होती जा रही है। मैं आगामी सत्र के सफल होने की कामना करता हूं। जनता को बड़ी उम्मीदें है आपसे।
-आदित्य राजपूत, आजमगढ़

दिलचस्प एवं रोचक हैं लेख
मैं शाम के समय रोज की तरह बाजार गया था। तभी बच्चों के स्कूल का सामान लेने के लिए बिहार की एक बुक स्टाल पर पत्रिका का अक्टूबर माह का अंक देखने को मिला। चूंकि लखनऊ से पत्रिका प्रकाशित होने के कारण पढ़ने की इच्छा हुई। मौके पर दुकान पर ख्रड़े-खड़े ही पूरी पत्रिका देख डाली। सरसरी तौर पर लेख व अन्य का शीर्षक पढ़ने के बाद एक पत्रिका खरीद ली। लेख पढ़ने के बाद पत्रिका की भूमिका समझ में आयी। इसमें प्रकाशित हर एक लेख काफी दिलचस्प और रोचक लगा। इस अंक में प्रकाशित कुछ आंखों के तारे तो कुछ की किरकिरी की रिपोर्ट ने पाठकों पर अपना अलग ही छाप छोड़ी है। पाठक इसके रसपान से सरकार के कुछ अफसर तो आंख के तारे व कुछ आंखों की किरकिरी वाले की पहचान हो सकी। इससे पत्रिका में जुडे़ लोगों की मेहनत साफ-साफ झलक रही है। इसमें देश विदेश सहित अन्य ज्वलन्त मुद्दों से भी बहुत जानकारी मिल रही है। हमारी तरफ से दस्तक टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।
-पंडित सुनील मिश्र, बिहार

लेखों ने किया मंत्रमुग्ध
मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र का छात्र हूं। मेरा घर जौनपुर है। अभी कुछ दिन पहले घर जा रहा था। रास्ते में एक बुक स्टाल पर कई पत्रिका लगी थी जिसमें दस्तक टाइम्स पत्रिका भी दिखाईदी। मैंने पत्रिका को हाथ में लेकर उसे देखने लगा। देखने के दौरान पत्रिका अच्छी लगी तो उसे खरीद लिया और टे्रन में पहुंच गया। यात्रा के समय जब पत्रिका पढ़नी शुरू की तो उसकी सरलता एवं स्पष्टता ने मंत्रमुग्ध किया। यह पहली बार हुआ कि हम कोई पत्रिका लेकर पूरी पढ़े हों। पत्रिका के इस माह में प्रकाशित लेख पंचायत चुनावों के परचम तले मिशन-2017 सबसे ज्यादा सराहनीय रहा है। इस लेख से वर्तमान में परदे के पीछे से चुनाव में खेली जा रही राजनीति के बारे में विभिन्न जानकारियां प्राप्त हुईं। अब यह पत्रिका मेरी पसन्दीदा लिस्ट में है और इसका स्थान सबसे ऊपर है। मैं पत्रिका के नये अंक के लिए महीना के खत्म होते ही अध्ययन के लिए बेसब्री से इन्तजार करता हूं। जब तक पत्रिका प्राप्त नहीं हो जाती तब तक ये लगता है कि कुछ जरूरत भरी चीज छूट रही है।
-साजिद अहमद, जौनपुर

ऐसे होगी जीत की तस्वीर साफ?
पत्रिका के अक्टूबर माह में प्रकाशित लेख विजय के लिए बेचैन मोदी अत्यन्त रोचकता से भरपूर रहा। इस लेख को सरल एवं स्पष्ट शब्दों में पिरोया गया है। जो एक नजर में लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। इसमें बिहार चुनाव की राजनीति एवं मैदान में उतरे नेताओं के तब और अब के नेतृत्व पर विविध रूप से प्रकाश डाला गया है। साथ ही लेख में ज्योतिष की नजर में चुनाव के विजय को दर्शाया गया है। फिर भी एक बात समझ से परे है कि कौन कुर्सी का हकदार होगा। हलांकि बड़े से लेकर छोटे नेता अपनी पार्टी की जीत की बातें करने में पीछे नहीं हैं। राजद एवं जदयू का गठबंधन तो 180 सीटें लाने का दावा कर रहा है। तो वहीं भाजपा एवं अन्य सहयोगी पूर्ण बहुमत की बात कर रहे हैं। वही छिट-पुट दल भी अपनी-अपनी विजय की बात कर रहे हैं। अगर माना जाये तो इन पार्टियों के नेताओं का अपना-अपना विचार है। तो क्या विचार से जीत की तस्वीर साफ हो सकती है। अगर नहीं है तो नेताओं के इन दावे को क्या समझा जा सकता है? क्या यही राजनीति है। जो जनता को भ्रमित कर अपनी पार्टी के पाले में करना चाहते है। अगर नहीं तो चुनाव में इस तरह के सियासी खेल का प्रयोग क्यों किया जा रहा है?
-देवकी नन्दन पाण्डेय, फरीदाबाद

प्रेरणा स्रोत साबित हो रही पत्रिका
मैं हर माह दस्तक टाइम्स पत्रिका खरीदकर लाता हूं। मुझे पत्रिका में राजनीतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक सहित अन्य विषय पर प्रकाशित लेख बहुत अच्छे लगे। इसमें वरिष्ठ लेखकों के खुद के विचार अत्यन्त सराहनीय हैं। पत्रिका में हर माह मासिक राशिफल व नारी कॉलम में महिलाओं से सम्बन्धित लेख को पत्रिका में स्थान देकर महिलाओं के लिए आप एक प्रेरणा स्रोत बनकर साबित हो रहे हैं। वहीं पत्रिका में निरन्तर प्रकाशित हो रहे मासिक राशिफल की अपनी अलग भूमिका है। जो पत्रिका में लोगों के राशिफल के अनुसार ज्योतिष विद्या से लोगों के भविष्य को स्पष्ट करते है, जो कि पत्रिका मे अनवरत प्रकाशित होता रहता है। इसके रसपान के लिए पत्रिका के नये अंक प्राप्त करने के लिए पाठक को बेसब्री से इन्तजार रहता है। मैं बताना चाहता हूं कि सभी क्षेत्रों में पत्रिका की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ रही है।
-लाली कपूर, देहरादून

पत्रिका ने किया प्रभावित
मैं कुछ दिन पहले अपने चाचा के घर गया। उनके घर पर मुझे पत्रिका दिखाई दी। वहां पहले से कई मेहमान आये थे जिससे चाची सहित सभी नाश्ता पानी के इन्तजाम में पहले से व्यस्त थे। इसलिए चाची हमारे पास बैठने का समय नहीं निकाल पा रही थी। यह सोचकर चाची परेशान हो रही थी तो हमने समझाया कि आप मेहमानों को निपटा लो, हम तो घर के ही हैं। फिर चाची मेहमानों के पास चली गईं, तो हमने वहां दस्तक पत्रिका रखी देखी तो हम खोलकर उसे पढ़ने लगे। फिर हमने पत्रिका के सभी लेख को देख डाला, जो सराहनीय लगे। वहीं पत्रिका में प्रकाशित युवा मुख्यमंत्री की मुश्किलें व केन्द्र सरकार की भावी योजना स्मार्ट सिटी की चकाचौंध के सभी पहलू की स्पष्टता ने सब कुछ आसानी से कह दी। पत्रिका के लेख ने पहली बार में हमारे दिल को छू लिया। जबकि मैं सफर के दौरान दुकान से पत्रिका खरीदकर पढ़ता था, लेकिन इस पत्रिका में प्रकाशित हो रहे ज्वलन्त विषय की प्रमुख जानकारी ने अत्यन्त प्रभावित किया। इसके बाद से मैं पत्रिका का नियमित पाठक हो गया हूं। इसमें देश-विदेश सहित अन्य विषयों पर जानकारी मिल रही है। इसकी तरफ से मैं पूरी दस्तक टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।
प्रशांत वाजपेयी , लखनऊ

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