जन्म से चल नहीं सकते थे दोनों, फिर पत्नी बनी नेशनल चैम्पियन

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शारीरिक अक्षमता के कारण हार मानकर पीछे हटने वालों के लिए हरियाणा के सोनीपत जिले के पुरखास गांववासी रमेश और गीता ने एक मिसाल पेश की है। दोनों ही जन्म से पोलियोग्रस्त हैं और व्हीलचेयर के सहारे हैं। लेकिन कुछ कर दिखाने के जुनून ने गीता गुलिया को नेशनल चैम्पियन बना दिया। वहीं पति रमेश दर्जी का काम कर रहे हैं। गीता पावर लिफ्टिंग के खेल में नित नई उपलब्धियां हासिल कर रहीं हैं।

जन्म से चल नहीं सकते थे दोनों, फिर पत्नी बनी नेशनल चैम्पियनजी हां- आपको जानकर हैरानी हो रही होगी लेकिन ये बिल्कुल सच है।  ये कपल जन्म से दिव्यांग हैं, दोनों जन्म से ही चल नहीं सकते हैं।  दोनों में ऐसा जज्बा है कि जो पत्नी चल नहीं सकती है वो नेशनल चैम्पियन बन गई और वहीं पति दर्जी बनकर घर चला रहा है।  दोनों की कहानी बेहद दिलचस्प है। 70 किलो वजन उठाकर गीता ने 6 जनवरी 2019 को सोनीपत में ही पावर लिफ्टिंग बेंच प्रेस नेशनल चैंपियनशिप जीती, अब वह वर्ल्ड चैंपियनशिप खेलने की तैयारी में है।

पैरालंपिक 2020 में होना है, जिसमें पावर लिफ्टिंग बैंच प्रेस में गीता गुलिया को जगह बनाकर देश के लिए मेडल जीतना है। रमेश गुलिया की शादी 2003 में गीता गुलिया से हुई थी। दोनों को जन्म से पोलियो था।  जन्म से पोलियो हो जाने की वजह से दोनों ही व्हीलचेयर पर चलते हैं।  इनके दो बच्चे हैं। एक बच्चे की उम्र 9 है तो दूसरे की उम्र  11 है। पति रमेश परिवार का गुजारा करने के लिए गांव में ही दर्जी का काम करता है।  जब दोनों बच्चे स्कूल जाने लगे तो गीता घर में अकेली हो गई थी।  उनका समय काटना मुश्किल हो रहा था।

इसके बाद गीता ने साल 2016 में पावर लिफ्टिंग शुरू की और सोनीपत में द्रोणाचार्य जिम में पावर लिफ्टिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए। गीता ने कुछ ही दिन में अच्छी प्रैक्टिस कर ली और 2016 में ही दिल्ली में हुई नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में 42.5 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीत लिया। ये कहानी हर किसी को प्रेरित करेगी