जाने नया कानून: अर्जेंटीना में अवैध रहेगा गर्भपात, अजन्मे बच्चे की जान लेने का हक़ नही

अर्जेंटीना: संसद में गर्भपात को वैध बनाने वाले विधेयक को ख़ारिज कर दिया है| वहीं इस विधेयक में गर्भधारण के 14 हफ़्तों के अंदर गर्भपात की इजाज़त की बात कही गई है| जबकि संसद में काफी समय से इसे लेकर लंबी बहस चल रही थी, और इसके बाद 38 सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ और 31 ने इसके पक्ष में वोट किया| वहीं इसके ख़ारिज़ होने के साथ इसके विरोधियों में खुशी की लहर दौड़ गई, और समर्थक निराश हो गए| जबकि कई समर्थकों ने गुस्से में पुलिस पर हमला भी किया और आग लगाने की कोशिश भी किया गया| इस बार विधेयक के ख़ारिज होने का मतलब है, की अब इसे दोबारा संसद में पेश करने के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा| वहीं इसके समर्थकों का कहना है, कि अब भी अर्जेंटीना में महिलाएं गर्भपात कराती हैं|

लेकिन ग़ैरकानूनी होने के चलते उन्हें ख़तरो का सामना करना पड़ता है| इसमें कई बार महिलाओं की जान भी चली जाती है| वहीं इसके विरोधियों का तर्क है कि अजन्मे बच्चे की जान लेने का हक़ किसी को नहीं है| और न होना चाहिए क्योकि यह महिलाओं की समस्या का समाधान नहीं है| जब मतदान हो रहा था, तो दोनों पक्षों के समर्थकों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया और रैलियां भी निकालीं| वहीं इस विधेयक का विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ये खुशी की बात है कि हमारा समाज इस महत्वपूर्ण सिद्धांत पर भरोसा करता है| वहीं अर्जेंटीना में सिर्फ बलात्कार या मां की जान को ख़तरा होने की स्थिति में ही गर्भपात की अनुमति दी जाती है| जबकि कुछ लोग गर्भपात को वैधता देने के समर्थन में काफी लंबे समय से इस संबंध में बिल को पास कराने की कोशिश कर रहे हैं| वहीं समर्थन कर रहे लोगो के प्रयासों में तब नई जान आई जब राष्ट्रपति मारिसियो मक्री ने इस पर मतदान कराने का फैसला किया| हालांकि, राष्ट्रपति ख़ुद गर्भपात के ​विरोध में राय रखते हैं| यह ​विधेयक निचले सदन में पास भी हो गया था| हालांकि, ऊपरी सदन में विधेयक लड़खड़ाता दिख रहा था, क्योंकि वहां अधिकतर सांसद कंजर्वेटिव थे| वहीं सदन की महिला सांसदों का मत भी बंटा हुआ था| जबकि मतदान के दौरान संसद भरी हुई थी, और इस मसले पर 16 घंटे से ज़्यादा समय तक बहस चली| वहीं इस विधेयक का समर्थन करने वालों का कहना है, कि यह एक तत्काल ध्यान देने वाला स्वास्थ्य संबंधी मसला है| बताया जा रहा है ,अर्जेंटीना में अवैध गर्भपात के बाद हज़ारों महिलाओं को हर साल अस्पताल लाना पड़ता है| जबकि साल 2016 में इसके चलते 43 महिलाओं की मौत हो गई थी| वहीं आर्थिक रूप से सक्षम महिलाएं दवाइयों के ज़रिए गर्भपात करती हैं, जबकि गरीब महिलाएं इससे ज़्यादा ख़तरनाक तरीके अपनाती हैं| उरुग्वे और क्यूबा जहां गर्भपात गैरकानूनी नहीं है|यह अमरीका के दो ऐसे देश हैं| बात अगर करे अन्य जगहों की तो वहां पर विशेष स्थितियों को छोड़कर गर्भपात कराना ग़ैरकानूनी है| वहीं अमरीका के सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाले देश ब्राज़ील में सुप्रीम कोर्ट में इसी मसले को लेकर सुनवाई चल रही है| कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है, कि 12 हफ़्तों के गर्भ को गिराना कानूनी होना चाहिए या नहीं| वहीं विपक्षी पेरोनिस्ट पार्टी की नोरमा डुरांगो कहती हैं, (यह कानून बाध्य नहीं करता है न ही यह किसी को गर्भपात करने की सलाह देता है) इस कानून की एकमात्र चीज़ चुनने का अधिकार है| जबकि इस विधेयक के विरोध में राय रखने वालीं मारिया कैस्टीयो का मानना है, (गर्भपात हमेशा एक बच्चे की जान लेता है और ये महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं)|