झारखंड में नवजात बने शिकार, 30 दिनों में 52 बच्चों की मौत

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देश को आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं, लेकिन कई ऐसे राज्य हैं जो आज भी भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं से जुझ रहे हैं। ऐसे ही मामला झारखंड से भी सामने आया है। यहां पिछले एक महीने में कुपोषण के चलते 52 बच्चों की मौत हो चुकी है। झारखंड के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में इन बच्चों की मौत हुई है। अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये सभी बच्चे कुपोषण का शिकार थे।गौरतलब  है कि इससे पहले भी एक आकंड़ा सामने आया जिसमें पिछले 117 दिनों में करीब 164 बच्चों की मौत का कारण भी कुपोषण ही था। 

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झारखंड में नवजात बने शिकार, 30 दिनों में 52 बच्चों की मौतवहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4(एनएफएचएस-4) 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में पांच वर्ष तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। सर्वे से यह भी पता चला है कि इनमें से करीब चार लाख बच्चे अति कुपोषित हैं। राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की रिपोर्ट में भी झारखंड में बच्चों व महिलाअों की दयनीय स्थिति की पुष्टि की गई है। 

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राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने झारखंड के पांच जिलों चतरा, धनबाद, दुमका, गिरिडीह व कोडरमा में  अध्ययन किया था। एक साल के अध्ययन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई, उसमें यह खुलासा हुआ कि इन जिलों के 57.2 फीसदी बच्चे नाटे(छोटे कद के) ,  44.2 फीसदी कम वजन वाले तथा 16.2 फीसदी काफी कमजोर हैं।
 
गौरतलब है कि झारखंड में हर वर्ष लगभग करीब आठ लाख बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से 29 हजार बच्चे ऐसे होते हैं जो अपना पहला जन्म दिन भी नहीं मना पाते हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में जन्म लेने वाले करीब आधे बच्चे कुपोषण से ग्रसित होते हैं।