ट्रेन-18 की 25 बातें जानकर आप भी कहेंगे, ‘वंदे भारत’

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नई दिल्ली : देश में बनी पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे। नई दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू होने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए खाना लेना अनिवार्य होगा। यानी यात्री इसे विकल्प के तौर पर ‘चुन या हटा’ नहीं सकते हैं, जैसा कि शताब्दी, राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस में होता है। खासियतें जानकर हैरान हो जाएंगे।
– वंदे भारत नई दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी। 755 किलोमीटर की यह दूरी 8 घंटों में तय की जाएगी।
– इस ट्रेन में एसी चेयर कार और एग्जिक्युटिव क्लास, दो तरह की बोगियां हैं।
– नई दिल्ली से वाराणसी के लिए एसी चेयर कार का किराया 1,850 रु. और एग्जिक्युटिव क्लास का किराया 3,520 रु. होगा।
– दोनों किराए में कैटरिंग चार्ज (चाय, नाश्ता और भोजन का खर्च) जुड़ा है।
– वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा के लिए चेयर कार का टिकट 1,795 रु. और एग्जिक्युटिव क्लास का टिकट 3,470 रु. होगा।
– वंदे भारत एक्सप्रेस में चेयर कार का किराया समान दूरी के लिए दौड़ रही शताब्दी के चेयर कार के मुकाबले 1.5 गुना अधिक है।
– वंदे भारत में एग्जिक्युटिव क्लास का शताब्दी के एसी फर्स्ट क्लास सिटिंग के मुकाबले 1.4 गुना ज्यादा है।
– वंदे भारत बीच में दो जगहों पर रुका करेगी- कानपुर और प्रयागराज में।
– ट्रेन में मौजूद एग्जिक्युटिव क्लास और चेयर कार के लिए खाने का चार्ज भी अलग-अलग होगा।
– नई दिल्ली से वाराणसी के बीच एग्जिक्युटिव क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को सुबह की चाय, नाश्ते और लंच के लिए 399 रुपये खर्च करने होंगे।
– वहीं, चेयर कार में नई दिल्ली से वाराणसी की यात्रा करने वालों को सुबह की चाय, नाश्ते और लंच के लिए 344 रुपये देने होंगे।
– नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज के बीच सफर करने वाले यात्रियों को एग्जिक्युटिव क्लास में 155 और चेयरकार में 122 रुपये खर्च करने होंगे।
– वाराणसी से कानपुर और प्रयागराज तक सफर करने वाले यात्रियों को एग्जिक्युटिव क्लास में 349 रुपये और चेयर कार में 288 रुपये खर्च करने होंगे।
– वाराणसी से दिल्ली सफर कर रहे यात्रियों को शाम में चाय, स्नैक्स और रात का खाना दिया जाएगा।
– वंदे भारत को ट्रेन 18 के नाम से भी जाना जाता है। इसे चेन्नै की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में 100 करोड़ रु. की लागत से 18 महीने में तैयार कर लिया गया।
– इसे विदेश से इंपोर्ट किया जाता तो इसकी लागत करीब 170 करोड़ रुपये तक होती, लेकिन मेक इन इंडिया के तहत तैयार करने में 70 करोड़ रु. बच गए।
– ट्रेन 18 की सबसे खास बात यह है कि इसमें आपको दूसरी अन्य ट्रेनों की तरह इंजन नहीं दिखेगा। ड्राइविंग सिस्टम लगे पहले कोच में 44 सीटें भी हैं।
– ट्रेन के कोच में स्पेन से मंगाई विशेष सीट भी लगाई गई है, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर 360 डिग्री तक मूव किया जा सकता है।
– इन कोच में दिव्यांग जनों के लिए विशेष रूप से दो बाथरूम और बेबी केयर के लिए विशेष स्थान दिया गया है।
– हर कोच में छह सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। ड्राइवर के कोच में एक सीसीटीवी इंस्टॉल किया गया है, जहां से यात्रियों पर नजर रखी जा सकती है।
– ट्रेन में टॉक बैक सुविधा भी है, यानी आपात स्थिति में यात्री ड्राइवर से बात भी कर सकते हैं।
– हर कोच में दो इमर्जेंसी स्विच लगाए गए हैं। आपात स्थिति में इसे दबाकर मदद ली जा सकती है।
– इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के एमडी सुधांशु मणि के मुताबिक, इस ट्रेन में 16 एसी कार कोच और दो एक्जिक्यूटिव क्लास कोच लगाए गए हैं।
– वंदे भारत के एसी चेयर कार में 78 सीटे हैं, जबकि एग्जिक्युटिव चेयर कार में 52 सीटें हैं।
– वंदे भारत के दरवाजे मेट्रो ट्रेनों की तरह स्वचालित होंगे। यानी, प्लैटफॉर्म पर ही खुलेंगे और बंद हो जाएंगे।