तृप्ति देसाई का एलान- 17 नवंबर को 500 अन्य महिलाओं के साथ करेंगी मंदिर में प्रवेश

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर चल रहे विवाद पर महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर को मंदिर में प्रवेश के लिए जाएंगी। इसके लिए उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की मांग भी की है। तृप्ति ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर से शुरू हो रहे वार्षिक मंडल मकरविल्लक्कु में मंदिर में प्रवेश करेंगी।

नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर को लेकर केरल में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक तृप्ति देसाई ने गुरुवार रात मंदिर में एंट्री करने का ऐलान किया है जबकि अयप्पा धर्म सेना के राहुल ईश्वर ने तृप्ती देसाई को देख लेने की धमकी देते हुए कहा है कि हम जमीन पर लेट जाएंगे। हम विरोध करेंगे और किसी भी कीमत पर उन्हें मंदिर में पूजा करने से रोकेंगे। इससे टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर मिली धमकियों के बाद तृप्ति देसाई ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को पत्र लिखकर सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में जाने के लिए सुरक्षा की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री विजयन ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं। इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुनर्विचार के लिए दाखिल 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मौजूदगी वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर चेंबर में सुनवाई की। इसके बाद पीठ ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत की उपयुक्त पीठ इन याचिकाओं और सबरीमाला से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर 22 जनवरी को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी। इससे पहले 9 अक्टूबर को पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। तृप्ति ने इससे पहले बताया था कि सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद वह 16 से 20 नवंबर के बीच सबरीमाला के मंदिर में जाने की कोशिश करेंगी। अब, भूमाता ब्रिगेड ने विजयन को खत लिखकर 17 नवंबर को दर्शन के दौरान सुरक्षा की मांग की है, उन्होंने बताया था कि राज्य में एंटर करने से लेकर वापस आने तक उन्हें सुरक्षा चाहिए होगी। उन्हें केरल आने पर ‘बुरे परिणाम भुगतने’ की धमकियां मिल चुकी हैं। कई लोगों ने खुदकुशी की धमकी भी दी है, उन्होंने कहा था कि कई महिलाओं ने उनसे पहले जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस प्रटेक्शन और सपॉर्ट न मिलने की वजह से वह फेल हो गईं। इसलिए, मंदिर की सीढ़िया बिना परेशानी के चढ़ने के लिए उन्होंने सरकार से सुरक्षा मांगी है। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को जाने की इजाजत दी थी, पीठ ने कहा था की दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी। पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसले को खारिज करना नहीं और पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी। मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं के विरोध प्रदर्शन के चलते कोई महिला मंदिर में एंट्री नहीं ले सकी थीं। तृप्ति देसाई ने कहा कि हमें पहले ही धमकियां मिल चुकी हैं। कुछ लोगों ने धमकियां दी हैं कि मैंने अगर केरल में प्रवेश किया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। कई लोगों ने धमकी दी है कि यह हम मंदिर की सीढ़ियां चढ़े तो वे आत्महत्या कर लेंगे। तृप्ति देसाई के ऐलान पर राहुल ईश्वर ने कहा कि भले ही वह अपने एक्टीविज्म के लिए जानी जाती हैं, लेकिन हम भी भगवान अयप्पा के पक्के भक्त हैं। हम सड़क पर लेट जाएंगे। उन्हें (तृप्ति देसाई) हमारे सीने पर चढ़कर गुजरना होगा। यह संवैधानिक रूप से विरोध का पवित्र तरीका है। देखते वह मंदिर में कैसे एंट्री करती हैं। तृप्ति देसाई शनिधाम शिंगणापुर मंदिर, हाजी अली दरगाह, महालक्ष्मी मंदिर और त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर सहित कई धार्मिक जगहों पर महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दिलाने के अभियान की अगुवाई करती रही हैं।