दिल्ली एनसीआर में प्याज ने फिर से रुलाया, 80 रुपये के पार पहुंची कीमत

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दिल्ली एनसीआर में एक बार फिर से प्याज की कीमतों ने रुलाना शुरू कर दिया है। कमजोर आवक और शादियों के चलते डिमांड ज्यादा होने की वजह से प्याज के दाम 80 रुपये प्रति किलो के पार चले गए हैं।
दिल्ली एनसीआर में प्याज ने फिर से रुलाया, 80 रुपये के पार पहुंची कीमतसरकार द्वारा प्याज की सप्लाई बढ़ाने का आदेश देने के बाद भी कीमतों में कमी नहीं हो रही है। प्याज के साथ-साथ एक और प्रमुख सब्जी टमाटर के दाम में भी तेजी बरकरार है। टमाटर की रिटेल कीमत भी 50-60 रुपये प्रतिकिलो के आसपास चल रहा है। 

थोक में यह है दाम
एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडियों में शुमार आजादपुर सब्जी मंडी में मंगलवार को प्याज 50-60 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचा जा रहा है। यह सबसे बढ़िया क्वालिटी के प्याज की थोक कीमत है। वहीं बेकार क्वालिटी का प्याज भी 40 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचा गया। देश में प्याज का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश से आवक कम होने की वजह से कीमतों में वृद्धि हो गई है। 

सबसे बड़ी प्याज मंडी में घटी आवक

एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में आवक में 47 फीसदी की कमी हो गई है। जहां मंगलवार को 12 हजार क्विंटल प्याज बिकने के लिए आया, वहीं पिछले साल आज ही के दिन यह 22933 क्विंटल था। अकेले लासलगांव में मंगलवार को प्याज की कीमत 33 रुपये प्रति किलो रही। 

जुलाई-अगस्त में भी बढ़े थे दाम
जुलाई में जहां एक तरफ टमाटर ने महंगाई के मामलें में शतक जड़ दिया था, वहीं अगस्त के महीने में प्याज भी इसका साथ दिया था। पूरे देश में प्याज के दाम 100 फीसदी तक उछल गए थे। देश भर की प्रमुख मंडियों में प्याज के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। मंडियों में प्याज की आवक बहुत कम हो गई है। इसके अलावा अन्य सब्जियों के दामों में भी इजाफा हो गया है। 

इस कारण से बढ़े दाम
होलसेल व्यापारियों के मुताबिक एमपी, गुजरात और राजस्थान में बारिश, बाढ़ के चलते प्याज सड़ गया है। वहीं कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में किसानों ने प्याज की पैदावार कम की। 

कम बारिश के चलते वहां भी उतनी पैदावार नहीं हुई थी, जिसकी आशा की जा रही थी। देश मे इस साल 215.6 लाख टन प्याज की पैदावार का अनुमान है जबकि बीते साल ये 209.3 लाख टन प्याज की पैदावार हुई थी। यानी बीते साल से ज़्यादा प्याज पैदा होने के बावजूद दाम बढ़ रहे हैं।