दुनिया में कई ऐसी जग़ह है, जहां जानवरों-पेड़ों से सेक्स करने वाली कम्युनिटी है| देखे यहां

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने भारत में दो वयस्कों के बीच सहमति से बने “समलैंगिक संबंधों” को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है| पिछले कुछ दिनों से इंसानों के “सेक्सुअल ओरिएंटेशन” को लेकर काफी चर्चा हो रही है| कुछ लोग इन्हें प्राकृतिक व्यवस्था के विपरीत बताते हैं, तो कुछ लोग मन मुताबिक सेक्सुअलिटी को जीने देने की वकालत करते हैं| हालांकि दुनिया में, “गे, लेस्बियन, स्ट्रेट, ट्रांससेक्सुअल” के अलावा भी अलग-अलग तरह की “सेक्सुअल ओरिएंटेशन” हैं, जिनके बारे में ज्यादा लोगों को मालूम नहीं है| लेकिन शायद आपको अभी इनके बारे में पता ही ना हो| “LGBT” कम्युनिटी, की तरह एक “ह्यूमन पप्स कम्युनिटी” भी दुनिया में मौजूद है| “सीक्रेट लाइफ ऑफ ह्यूमन पप्स” शो में इस कम्युनिटी को दिखाया गया था| पिछले 15 सालों में इस कम्युनिटी की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है| “ह्यूमन पप्स” ऐसे पुरुष या गे लोग हैं, जिन्हें कुत्ते के रूप में रहना पसंद है| ये कुत्ते की तरह हूड्स पहनते हैं, खिलौने के साथ खेलते हैं, और खाना भी कटोरे से खाते हैं| ये अपने मालिक के साथ प्रेम में होते हैं| इनके अपने प्राइड क्लब्स भी हैं| जहां ये इकट्ठा होकर अपनी पहचान को खूब सेलिब्रेट करते हैं| “ह्यूमन पप्स” बने ऐशले उर्फ गस कहते हैं, “मैं पिछले 3 या 4 साल से ह्यूमन पप बनकर रह रहा हूं”, मुझे इससे सुकून मिलता है| मैं 10 सालों तक अपने पार्टनर से अलग रह रहा था और काफी डिप्रेशन में था| जब मैं कुत्ता बनकर जीने लगा तो मुझे ज्यादा सकारात्मक महसूस होने लगा| मेरे परिवार वालों को मेरी इस पहचान के बारे में पता नहीं है, हालांकि उन्हें मेरे गे होने की जानकारी है| मैं अधिकतर डॉग कॉलर पहनता हूं और तब मैं ह्यूमन पपी होता हूं| पैडलॉक इस्तेमाल करने का मतलब है, कि मेरा कोई मालिक मौजूद है, और अपने मालिक की अनुमति के बिना मेरे साथ कोई नहीं खेल सकता है| मेरे पास 3 पैडलॉक है, एक मेरे बॉयफ्रेंड के पास, एक मेरी अल्फा के पास और तीसरी मेरे पास ताकि जरूरत पड़ने पर मैं अपना कॉलर हटा सकूं| “ज़ूफाइल्स”, जैसा कि नाम से ही पता चलता है, कि इस समुदाय के लोगों को जानवरों के प्रति सेक्सुअल अट्रैक्शन होता है| इन्हें इंसानों से कोई आकर्षण नहीं होता है| ज़ूफाइल्स में भी कई आइडेन्टिटीज़ हैं| जैसे कि कुत्तों के साथ सेक्सुअल रिश्ते बनाने वाले साइनोफाइल्स, घोड़ों के साथ रिश्ते बनाने वाले इक्विनोफाइल्स, हालांकि कई देशों में यह गैर-कानूनी है, क्योंकि जानवर बच्चों की तरह सहमति नहीं दे सकते हैं| इन्हें केवल खुद के प्रति ही सेक्सुअल अट्रैक्शन होता है| ऐसे लोगों को अपने अलावा किसी और की तरफ सेक्सुअल फीलिंग्स ही नहीं होती है| कुछ एक्सपर्ट कहते हैं, कि वैसे हर इंसान थोड़ा या ज्यादा ऑटोसेक्सुअल होता है| इन्हें किसी बुजुर्ग व्यक्ति के प्रति सेक्सुअल फीलिंग्स होती हैं| इन्हें “गेरैंटोसेक्सुअल” कहा जाता है| ऐसे लोग चाहते हैं कि उन्हें विपरीत लिंगी से वापस प्यार ना मिले| इस समुदाय के लोगों को ग्रे एसेक्सुअल्स भी कहा जा सकता है| अगर इन्हें सामने वाले से भी अटेंशन मिलने लगती है, तो ये रिलेशनशिप में अपनी दिलचस्पी खो देते हैं| इसमें वे पुरुष आते हैं, जो खुद को लड़की समझकर सेक्सुअली एक्साइट होते हैं| “सेपियोसेक्सुअल”, लोग वे होते हैं, जिन्हें दूसरे लोगों में केवल इंटेलिजेंस आकर्षित करती है| ये शारीरिक गुणों से आकर्षित नहीं होते हैं| सुनने में अजीब लगता है, पर दुनिया में फॉर्मिकोफाइल्स नाम की कम्युनिटी भी मौजूद है, जो कीड़ों को अपने ऊपर डालकर सेक्सुअल प्लेज़र लेते हैं|

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