नौ घंटे चली बैठक में आरबीआई और सरकार के बीच तना तानी ख़त्म, कई मुद्दों पर बानी सहमति

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निदेशक मंडल ने 9.69 करोड़ रुपये की अधिशेष पूंजी से संबंधित मुद्दे की जांच परख के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का फैसला किया। साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में फंसी परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए भी एक योजना पर विचार करने की भी सलाह दी है।

नई दिल्ली: केंद्र के साथ टकराव की खबरों के बीच नौ घंटे तक चली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की बैठक में वित्तीय क्षेत्र के लिए नकदी बढ़ाने और छोटे उद्योगों को ज्यादा कर्ज देने पर सहमति बनी। बैठक के बाद आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल ने आरबीआई को 25 करोड़ रुपये की कुल कर्ज सुविधा के साथ छोटे व मझोले उद्योगों की संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्गठन करने की योजना पर विचार करने को कहा है। बैठक के दौरान बोर्ड ने नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरएआर को 9 फीसदी रखने का फैसला लिया। हालांकि, कैपिटल कंजर्वेशन बफर के तहत 0.625 फीसदी के आखिरी चरण को लागू करने के लिए ट्रांजिशन पीरियड को एक साल बढ़ाने पर सहमति बन गई। यह अवधि 31 मार्च, 2019 तक होगी। ऐसी अटकलें भी थीं कि बैठक के दौरान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। बोर्ड की अगली बैठक 14 दिसंबर को होगी। लोकसभा चुनाव, 2019 को देखते हुए सरकार छोटे व मझोले उद्योगों को राहत देने के लिए आरबीआई से कर्ज बढ़ाने और उन्हें राहत देने की मांग कर रही थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक अपने सख्त नियमों में ढील देने को तैयार नहीं था। इस मुद्दे पर भी सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे। बैठक में फैसला हुआ कि आरबीआई के पास मौजूद अतिरिक्त पूंजी सरकार को देने पर विचार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी। समिति तय करेगी कि आरबीआई अपने पास कितना अतिरिक्त फंड रखेगा। समिति बैंक की आर्थिक पूंजी रूपरेखा ढांचे (ईसीएफ) की समीक्षा करेगी। इसके सदस्यों और संदर्भ शर्तों को केंद्र-आरबीआई संयुक्त रूप से तय करेंगे। फिलहाल आरबीआई का बेस कैपिटल 9.69 लाख करोड़ रुपये है। कई आर्थिक विशेषज्ञ और वित्त मंत्रालय इसे 9 लाख करोड़ करने की मांग कर रहे हैं। खबरें थीं कि सरकार ने आरबीआई से इसी फंड से 3.6 करोड़ करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में इसका खंडन किया था। आरबीआई का वित्तीय निगरानी बोर्ड (बीएफएस) उन बैंकों से जुड़े मामलों की जांच करेगा, जिन्हें त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की रूपरेखा के तहत रखा गया है। वित्तीय रूप से कमजोर 11 बैंकों के हालात का जायजा लेने पर भी सहमति बनी है। गौरतलब है कि ज्यादा एनपीए वाले बैंकों को आरबीआई ने कर्ज बांटने से रोक दिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने भी कुछ वर्गों का दबाव होने के बावजूद इस्तीफा देने के बजाय केंद्रीय बैंक की नीतियों का पक्ष मजबूती से रखा। एनपीए को लेकर केंद्रीय बैंक ने अपनी कड़ी नीतियों का बचाव किया। बैठक में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और उनके चार डिप्टी ने चार नामित निदेशकों, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार और स्वतंत्र निदेशक एस. गुरुमूर्ति के साथ विवादास्पद मुद्दों पर आमने-सामने चर्चा की और आम राय पर पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि किसी भी मुद्दे पर वोटिंग की नौबत नहीं आई। आरबीआई ने सोमवार को कहा कि वह सरकारी प्रतिभूतियां की खरीद के जरिये 22 नवंबर को अर्थव्यवस्था में 8,000 करोड़ रुपये डालेगा। इससे देश में एनबीएफसी (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के नकदी संकट को दूर किया जा सकेगा और कारोबारी तेजी के लिए नया कर्ज देने का काम शुरू किया जा सकेगा। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकार और आरबीआई के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारियों को लेकर आरबीआई के निदेशक मंडल के सदस्यों के बीच चर्चा होने में कुछ भी गलत नहीं है। सरकार ने आरबीआई के 9.69 लाख करोड़ के अतिरिक्त कोष से एक पैसा भी नहीं मांगा है। पूर्व वित्तमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि यह जानकार कर खुशी हुई कि सरकार ने अपने कदम पीछे खींचे और आरबीआई की स्वायत्तता को स्वीकार कर लिया। विशेषज्ञ समिति द्वारा अतिरिक्त पूंजी की समीक्षा किए जाने में कोई हर्ज नहीं है। अब कम से कम मई 2019 तक यह पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी।

किन बातों को लेकर हुई तनातनी

1. वित्त मंत्रालय चाहता है कि आरबीआई क्रेडिट और नकदी की सप्लाई को ना रोके। मंत्रालय की मानें तो तेज ग्रोथ के लिए सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी जरूरी है। केंद्र सरकार कमजोर अर्थव्यवस्था का हवाला देकर अपनी मांगें मनवाना चाहती है, लेकिन आरबीआई का कहना है कि अगर वह सरकार की मांगों को मान लेता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी।
2. नोटबंदी तक सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच सबकुछ ठीक ठाक था लेकिन आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के नेतृत्व वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने दरों पर फैसला लेने से पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन से मुलाकात करने से मना कर दिया, उसके बाद दोनों के बीच तनातनी शुरू हो गई।
3. पिछले दिनों आरबीआई ने लाभांश के भुगतान के तौर पर 30 हजार करोड़ रुपये का पेमेंट किया था, जिसको लेकर सरकार में नाराजगी थी क्योंकि बजट 66 हजार करोड़ रुपये का था। इसके कारण केंद्रीय वित्त मंत्री को आरबीआई से और भुगतान की मांग करनी पड़ी, लेकिन उसने देने से मना कर दिया था।
4. आरबीआई ने तमाम लोन रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम्स को बंद कर दिया और बैंकों से सभी संभावित नुकसान के लिए फंड (प्रोविजनिंग) अलग करने को कहा था। आरबीआई का कहना है कि डिफॉल्ट चाहे एक दिन का ही क्यों न हो, उसे भी उसी कैटेगरी में डाला जाएगा। आरबीआई के इस कदम का सरकार और तमाम बैंकों ने विरोध करते हुए कहा कि यह नियम नहीं चल सकता है।
5. सरकार की नजर आरबीआई के पास मौजूद अतिरिक्त रिजर्व पर है। सरकार तर्क दे रही है कि अधिकांश दूसरे केंद्रीय बैंक इतनी नकदी पर नहीं बैठे हैं लेकिन आरबीआई इस अतिरिक्त नकदी को देने के लिए इच्छुक नहीं है, क्योंकि वह इसे विनिमय दर को नियंत्रित करने का जरिया मानती है और उसका मानना है कि इसका इस्तेमाल केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए नहीं होना चाहिए।

आरबीआई बैठक के 10 की मुख्य बातें:

1. आरबीआई का वित्तीय निगरानी बोर्ड (बीएफएस) उन बैंकों से जुड़े मामलों की जांच करेगा, जिन्हें आरबीआई ने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की रूपरेखा के अंतर्गत रखा है।
2. आरबीआई के निदेशक मंडल ने बैंक की आर्थिक पूंजी रूपरेखा ढांचे की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है। जिसके सदस्यों और संदर्भ शर्तों को भारत सरकार और आरबीआई द्वारा संयुक्त रूप से तय किया जायेगा।
3. केन्द्रीय बैंक के निदेशक मंडल ने रिजर्व बैंक को 25 करोड़ रुपये की कुल ऋण सुविधा के साथ छोटे एवं मझोले उद्योगों की दबाव वाली परिसंपत्तियों का पुनर्गठन करने की योजना पर विचार करने का भी सुझाव दिया है।
4. आरबीआई बोर्ड ने आरबीआई को एमएसएमई के जोखिम में फंसे नींद के पुनर्गठन स्कीम पर भी विचार करने के लिए कहा है।
5. प्रॉन्प्ट करेक्टिव एक्शन के तहत आए बैंकों के मामले का केन्द्रीय बैंक का फाइनेंशियल सुपर विजन बोर्ड परीक्षण करेगा।
6. इस बैठक के परिणाम से केन्द्रीय बैंक और सरकार के बीच तनाव में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
7. रिजर्व बैंक का पूंजी आधार इस समय 9.69 लाख करोड़ रुपए है। रिजर्व बैंक के स्वतंत्र निदेशक और स्वदेशी विचार एस गुरुमूर्ति तथा वित्त मंत्रालय चाहते हैं कि इस कोष को वैश्विक मानकों के अनुरूप कम किया जाना चाहिए।
8. बैठक में जिस विशेषज्ञ समिति के गठन का फैसला किया गया है वह इस कोष के उचित स्तर के बारे में अपनी सिफारिश देगी।
9. सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान किसी भी प्रस्ताव पर मतदान की नौबत नहीं आई।
10. आरबीआई बोर्ड में कुल 18 सदस्य हैं जिनमें पटेल के अतिरिक्त उनके चार डिप्टी भी शामिल हैं। पटेल के अलावा किसी भी डिप्टी गवर्नर को मतदान करने का अधिकार नहीं है। बोर्ड में दो सरकारी अधिकारी और सरकार द्वारा मनोनीत सात स्वतंत्र निदेशक हैं।