पाकिस्तान को रास्ते पर लाने के लिए रूस और पाक के सम्बन्ध, चिंता न करे भारत

भारत में रूसी राजदूत निकोलई कुदाशेव ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पाकिस्तान के साथ रूस के संबंध भारत के लिए चिंता की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रूस के संबंध ‘रणनीतिक और दीर्घकालिक’ हैं। कुदाशेव ने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके देश के संबंध का मकसद पाकिस्तान में स्थिरता लाना, क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग करना और आतंकवाद से मुकाबला करना है।
नई दिल्ली: भारत में रूसी राजदूत निकोलई कुदाशेव ने गुरुवार को कहा कि भारत-रूस रक्षा सौदों में अमेरिकी प्रतिबंध बाधक नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और रूस तेज गति वाले छोटे युद्धपोत और कलाश्निकोव राइफल पर जल्द ही समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। कुदाशेव ने हाल में हुए एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली समझौते को भारत-रूस के बीच इतिहास में सबसे बड़ा समझौता बताया। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच हुए सबसे तेज समझौतों में से एक था और वहां कोई लंबी बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि चार से पांच अक्टूबर तक हुई राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और इस समझौते का कार्यान्वयन 2020 में शुरू होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह कहना ठीक होगा कि प्रतिबंध कानून के जरिए अमेरिकी विरोधियों से निपटने संबंधित कानून (काट्सा) से भविष्य में होने वाले रक्षा समझौतों के लिए भारत और रूस पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा, कुदाशेव ने दृढ़ता के साथ कहा, हां। यह पूछे जाने पर कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पिछले सप्ताह बैठक के दौरान बढ़ते रूसी-पाकिस्तान संबंधों को लेकर क्या भारत की तरफ से चिंता जताई गई तो कुदाशेव ने ना में जवाब दिया। उन्होंने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से कहा, ‘इस संबंध में चिंता की क्या बात है। संबंध बहुत ही साफ है। हमें एक स्थिर पाकिस्तान चाहिए…जहां तक मैं समझता हूं कि भारतीय पक्ष का भी यही विचार है।’ कुदाशेव ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रूस के संबंध भारत के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रूस के संबंध रणनीतिक और दीर्घकालिक है। कुदाशेव ने कहा कि पाकिस्तान के साथ उनके देश के संबंध का उद्देश्य पाकिस्तान में स्थिरता को सुनिश्चित करना, क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग करना और आतंकवाद से मुकाबला करना है। पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास पर उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद-निरोधक अभ्यास था और इसके बहुत अधिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत की तुलना में पाकिस्तान के साथ हमारा सैन्य और रणनीतिक सहयोग लगभग शून्य है।’ रूस-पाकिस्तान संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में नए घटनाक्रम पर उन्होंने कहा, ‘क्षेत्रीय मुख्यधारा में पाकिस्तान को लाए जाने के लिए कुछ नया होना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान का शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल होना, इस बात का सबूत है कि ये प्रयास सफल हो रहा है। रूसी राजदूत ने कहा, ‘रूस में कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं कहेगा कि हम पाकिस्तान के साथ संबंध भारत की कीमत पर बनाएं। यह असंभव है।’ अफगानिस्तान पर एक शांति सम्मेलन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की ओर से आए अनुरोध पर इस बैठक को स्थगित किया गया था। यह बैठक हाल में मास्को में होनी थी। तालिबान ने संकेत दिए थे कि वह सम्मेलन में भाग लेने का इच्छुक है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सम्मेलन में भाग लेने को लेकर भारत की ओर से कुछ कहा गया था तो कुदाशेव ने कहा, ‘(भारत की ओर से भाग लेने के संबंध में) कोई इनकार नहीं किया गया था।