पुलिस गोली नहीं खाएगी, बराबर से देंगे जवाब

नब्बे के दशक में जिस तरह पंजाब में पुलिस ने आतंकियों के खात्मे के लिए उन्हीं की भाषा में उन्हें समझाने यानी गोली का जवाब गोली से देने का फैसला किया कुछ उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पुलिस ने काम शुरू किया है। नतीजे कैसे होंगे यह आने वाला वक्त बताएगा लेकिन शुरुआत तो सटीक ही लग रही है। पुलिस की इस कार्यशैली में बदलाव आया है तो सिर्फ और सिर्फ प्रदेश सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त फैसलों और कठोर आदेशों के चलते। शायद यह मुख्यमंत्री के दृढ़ संकल्प का ही नतीजा है कि प्रदेश में पिछले दो महीनों में हालात पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं। हालात कैसे बदल रहे हैं इस पर एक नज़र डालती ‘दस्तक’ की आवरण कथा…

–ऋतु वर्मा

सत्तारुढ़ होने के बाद से ही मुख्यमंत्री ने वैसे तो कई कार्यों का बीड़ा उठाया लेकिन मुख्य रूप से दो काम उनके एजेंडे में रहे। पहला प्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगाम और दूसरा कानून- व्यवस्था की बिगड़ चुकी या यूं कहें बदतर हो चुकी स्थिति को फिर से पटरी पर लाना। डीजीपी सुलखान सिंह कहते हैं-यह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदृष्टि का ही फल है कि हालात बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री चाहे छोटी सी छोटी घटना हो या फिर कोई कानून-व्यवस्था का मसला,   हर मामले में उतने ही संवेदनशील रहते हैं, जैसे किसी मुख्यमंत्री को बड़ी घटनाओं में होना चाहिए। वह खुद पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर हालात की सीधे जानकारी लेते हैं। इसका सीधा असर पड़ता है और जिलों के पुलिस अधीक्षक इस बात को भली-भांति समझते हैं कि उनकी क्या जिम्मेदारी है और उन्हें परफार्म करना होगा। नतीजतन, परिणाम अच्छे आ रहे हैं।

एंटी रोमियो से हुई शुरुआत

हालात यूं थे कि चाहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश रहा हो या फिर पूर्वी उत्तर प्रदेश छात्राएं गांव देहात से लेकर कस्बों और बड़े शहरों में शोहदों से परेशान थीं। जहां देखो वहीं छात्राएं स्कूल जाते वक्त परेशान..। बाजार में महिलाएं शोहदों की छींटाकसी से परेशान..। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे संजीदगी से महसूस किया। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से पहली बैठक में ही उन्होंने एंटी रोमियों स्क्वायड हर जिले में बनाने के निर्देश दे दिए। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद ही वीवीआईपी गेस्ट हाउस में तत्कालीन डीजीपी सैय्यद जावीद अहमद को तलब किया और बताया कि कैसे पुलिस पैदल गश्त करेगी। कैसे चेकिंग की जाएगी। पुलिस ऐसी सक्रिय हुई कि हर जिले के एसपी जो एसी कमरों में बैठते थे, यहां वहां गश्त करते नज़र आए। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह कहते हैं-यही फर्क है पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार में। मुख्यमंत्री ने साफ कह दिया है कि भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था खासतौर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध होने पर जीरो टालरेंस होगा। कहीं भी लापरवाही हुई तो अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे। इसका जमीनी असर हो रहा है। शायद यही वजह रही कि एंटी रोमियो स्क्वायड के जरिए प्रदेश पुलिस ने 2011 शरारती तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई की। यही नहीं पुलिस ने छेड़छाड़ के संबंध में 1054 मुकदमे दर्ज कराए। प्रदेश पुलिस ने एंटी रोमियों के तहत 63 हजार 786 लोगों को सचेत किया गया।

शुरू हुआ आपरेशन एनकाउंटर

प्रदेश पुलिस ने शुरुआत बहुत आहिस्ता से की। पहले एंटी रोमियो आपरेशन के बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। समस्या यह थी कि पिछली सरकारों में या तो पुलिस ने ही छोटे बड़े माफिया को संरक्षण दिया या फिर खुद बड़े नेता स्वार्थसिद्धी के लिए उन्हें प्रश्रय देते रहे। इसका खामियाजा समाज के हर वर्ग में माफियागिरी के दखल के रूप में सामने आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्य़नाथ ने खुद कई मौकों पर कहा कि समाज में माफिया के दखल के कारण कानून-व्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतर गई थी, इसे फिर से पटरी पर लाने का काम किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि सरकार केवल बयानबाजी कर रही थी, पिछले छह महीनों में ऐसी बारीकी से खामियों को दूर करने का काम हुआ है। बड़े पैमाने पर तबादले कर थाने स्तर तक कार्यशैली बदलने की कोशिश हुई। मशीनरी में बदलाव आया तो सबसे पहले एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने डीजीपी के निर्देश पर इनामी और फरार चल रहे अपराधियों के खिलाफ आपरेशन शुरू किया। इसे आपरेशन क्लीनअप नाम दिया गया। एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार कहते हैं-सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर कानून-व्यवस्था और विकास है। कानून-व्यवस्था दुरुस्त होगी तो विकास भी होगा। लिहाजा हमने एक सिरे से ऐसे अपराधियों की धरपकड़ शुरू की। नतीजे आपके सामने हैं। तकरीबन दो-ढाई महीने में छह सौ से अधिक इनामी अपराधी गिरफ्तार हुए हैं। मैं साफ कर दूं पुलिस किसी के आगे झुकेगी नहीं यह संदेश थानेदार तक साफ है, लिहाजा अगर बदमाश गोली चलाएगा तो पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलाने का तो अधिकार है ही…। हम बदमाशों से बदमाशों की भाषा में बात करेंगे..।
कहना गलत न होगा कि पुलिस की आक्रामकता का फायदा भी हुआ। बीते तीन महीने में करीब 19 शातिर इनामी बदमाशों को पुलिस ने मार गिराया है। इसी के साथ पुलिस और अपराधियों के बीच 480 मुठभेड़ हुईं। इनमें सबसे शातिर बदमाश मुकीम काला का भाई वसीम काला मेरठ में 28 सितंबर को मारा गया। उसके खिलाफ शामली और मेरठ में दस मुकदमे थे और उस पर पचास हजार रुपये का इनाम था। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश और एसएसपी अभिषेक सिंह के नेतृत्व व निर्देशन में उसे गिरफ्तार करने की कोशिश के दौरान मुठभेड़ हुई। उसे गिरफ्तार किया गया तो वह घायल था और बाद में उसकी मौत हो गई। कहना गलत न होगा कि मुकीम काला और उसका भाई वसीम काला मेरठ और आसपास के इलाके में आतंक का सबब बन गए थे। उनके कारण ही पिछली सपा की सरकार में शामली से सैकड़ों लोगों ने पलायन कर दिया था। व्यापारी और ऐसे परिवार जिनकी बच्चियां स्कूल जाते वक्त या बाजार में सरेआम छेड़ी जातीं, उन्होंने घर पर ताला बंदकर दूसरे शहरों का रुख कर लिया था। ऐसे में वहां नई सरकार बनने के बाद से ही पुलिस ज्यादा सक्रिय थी। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश कहते हैं-वसीम काला और उसका गैंग व्यापारियों से जबरन वसूली, अपहरण में लिप्त था। उसके आतंक के आगे कोई भी व्यापारी सहजता से पुलिस में शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता था। अब व्यापारी और आमलोग ही अपराधियों के आतंक के बारे में एसटीएफ और पुलिस को सूचनाएं दे रहे हैं।

तबादलों में पारदर्शिता से सख्त संदेश

पहले चरण में जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों को बदला गया। इसी के साथ सीओ से लेकर एसपी तक के तबादले हुए। सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि डीजीपी मुख्यालय पर हुए तबादलों में सियासी हस्तक्षेप नहीं रहा। नौबत यहां तक रही कि जिसका तबादला एक बार हुआ उसे दूसरे जिले में तुरंत ज्वाइन करना ही पड़ा। इसी तरह पुलिस अधिकारियों को अपने हिसाब से छूट दी गई कि वे क्षमता के मुताबिक अधिकारियों को तैनात कर सकें। यही नहीं जिलों में पुलिस अधीक्षकों को थानेदारों के तबादले में पारदर्शिता और कार्यक्षमता को ध्यान में रखने के निर्देश दिया गया। जिलों में यह सुनिश्चित भी कराया गया। इसका असर जिलों में हर थाना क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता और सख्ती के रूप में सामने आया। नतीजा, छेड़छाड़ की घटनाएं कम हुई हैं और आम लोगों को शांति-व्यवस्था स्थापित होने का अहसास हो रहा है।

यूं खत्म हुआ आतंक

डीजीपी सुलखान सिंह ने हर जिलों के पुलिस अधीक्षकों को ईनामी अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भी पुलिस अधिकारियों और डीएम व आयुक्त के साथ वीडियोकांफ्रेंसिंग शुरू की है। इसी तरह की एक वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल कुछ ही जिलों में अपराधियों के खिलाफ हुई मुठभेड़ पर पुलिस अधिकारियों की क्लास ली। मुख्यमंत्री खुद कह चुके हैं कि अपराधी अगर नहीं मानेंगे तो उन्हें ठोक दिया जाएगा। मुख्यमत्री के निर्देशों का असर यह हुआ कि मेरठ जोन में सबसे ज्यादा 194 मुठभेड़ हुईं और 85 मुठभेड़ आगरा में, 44 मुठभेड़ कानपुर जोन में और 20 इलाहाबाद जोन में हुईं। अपराधियों की गिरफ्तारी में बरेली जोन सबसे अव्वल रहा। बरेली में सबसे ज्यादा 209 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी की गई। मुठभेड़ में सबसे ज्यादा 10 कुख्यात अपराधी मारे गए। मुठभेड़ में मारे गए अपराधियों में लखनऊ में मारा गया सुनील शर्मा, आजमगढ़ में मारा गया जयहिन्द यादव, रामजी व सुजीत सिंह उर्फ बुढ़वा, मथुरा में कासिम, चित्रकूट में शारदा कोल, हापुड़ में अतीक उर्फ इकबाल, सहारनपुर में गुरमीत व शमशाद, मुजफ्फरनगर में नितिन व नदीम, गाजियाबाद मेंराजू और शामली में नौशाद उर्फ डैनी, सरवर और इकराम उर्फ टोला मारे गए। इसके चलते कई लूट की घटनाएं रुकीं और चेन स्नैचिंग की घटनाओं पर लगाम लगी। इसका उम्दा उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला। लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार कहते हैं- लखनऊ में पुलिस ने मुठभेड़ में तीन अपराधियों को मार गिराया। इसका असर यह हुआ कि शाम को महिलाओं से होने वाली छेड़छाड़ की घटनाएं कम हो गई हैं। साथ ही सर्राफ से लूट और चेन स्नैचिंग की घटनाएं भी कम हुई हैं। शांति-व्यवस्था कायम करने में हम सफल रहे हैं और अपराधियों में भय व्याप्त हो रहा है।

भूमाफिया की आई शामत

प्रदेश में भू-माफिया और उन्हें संरक्षण देने वालों पर शिकंजा कसा गया। दरअसल पिछली सरकारों में जिलों में जमीनों पर कब्जे और उनमें सपा, बसपा नेताओं के संरक्षण की शिकायतें रहीं लेकिन पुलिस ने जिलों में कुछ भी नहीं किया। मथुरा में हुआ जवाहर बाग हत्याकांड इसका जीता जागता उदाहरण है। जवाहर बाग हत्याकांड में एक एएसपी और इंस्पेक्टर समेत कई पुलिस कर्मी मारे गए। भाजपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने आगाह कर दिया कि भू-माफिया से आपरेशन चलाकर जमीनें खाली कराई जाएंगी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के मुताबिक हर जिलों में संजीदगी से अभियान चलाया गया। हर जिले के डीएम और एसपी को सामंजस्य बैठकर कार्रवाई करने का नतीजा यह हुआ कि प्रदेश भर में तमाम भूमाफिया के खिलाफ गैंगस्टर और रासुका के तहत कार्रवाई की गई। भूमाफिया अभियान का असर यह हुआ कि ग्राम समाज की जमीनों पर हुए कब्जे को खाली कराया गया। इसके तहत करीब 9550 हेक्टेयर जमीन सरकारी अधिकारियों ने खाली कराई। यही नहीं सरकार ने 199443.57 हेक्टेयर जमीन की पहचानी की जिस पर भूमाफिया का कब्जा है। यह जमीन ग्राम समाज की थी। 

-श्रीधर पाठक , पूर्व आईजी

शुरुआत तो दुरुस्त है। पुलिस जिलों में पहले की अपेक्षा कम सियासी हस्तक्षेप और बिना किसी दबाव के काम करती दिख रही है। जरूरत है कि वरिष्ठ अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिए जाएं। साथ ही पुलिस की अन्य इकाइयों मसलन, सीबीसीआईडी, ईओडब्ल्यू व सतर्कता अधिष्ठान को सक्रिय कर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाकर कार्रवाई की जाए। उम्मीद की जा सकती है कि पुलिस इस दिशा में काम करेगी और उसे सियासी नेतृत्व का वांछित और जरूरी सहयोग मिलता रहेगा, ताकि पंद्रह सालों से चली आ रही अराजकता का अंत किया जा सके।  

 

-सुलखान सिंह, डीजीपी, उ.प्र.

अभियान शुरू हुआ तो हमने पाया कि प्रदेश में 9385 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर अवैध कब्जा है। इसे सिलसिलेवार ढंग से खाली कराने की कार्रवाई तेजी और सख्ती के साथ की जा रही है। आखिर पिछली सरकारों में पुलिस व प्रशासनिक अमले ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। यह हैरत में डालता है। प्रदेश के हर जिले में भूमाफिया की पहचान करने और सूची बनाने का सिलसिला शुरू हुआ। यह कार्रवाई इतनी तेजी से शुरू हुई और लगातार बिना किसी सियासी दबाव के काम हुआ। इसी का नतीजा रहा कि प्रदेश में पुलिस व प्रशासन ने मिलकर 2816 भूमाफिया की पहचान कर उन्हें सूचीबद्ध किया गया है।