मप्र भाजपा सरकार – कन्याओं को उपहार

(14 ‎दिसंबर – मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा क़ानून हेतु सम्मान पर विशेष)

-प्रवीण गुगनानी

भारतीय संस्कृति के मूलाधार वेदों में से अथर्व वेद में कहा गया है – यत्र नार्यन्ति पूज्यन्ते – रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया।। अर्थात जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, केवल वहीँ देवी-देवता निवास करते हैं। जिन घरों में स्त्रियों का अपमान होता है, वहां सभी प्रकार की पूजा, अनुष्ठान आदि करने के बाद भी भगवान निवास नहीं करते हैं, और वहां दरिद्रता, विपन्नता व समस्याओं का चिर निवास हो जाता है। स्त्री विमर्श भारत की संस्कृति का एक मूल अंग रहा है। पश्चिम की तरह नारी विमर्श हमारे देश में एक अलग विचारधारा नहीं रही अपितु समग्र मानवीय विकास में हमने नारी को उच्चतम स्थान देकर अपनी विकास यात्रा की है। 1968 में फ्रांस के नारी मुक्ति आन्दोलन की प्रमुख व पश्चिमी नारी विमर्श की जनक सिमान द ब्वाँ ने नारी स्थिति पर कहा और सम्पूर्ण पश्चिम ने माना की “ नारी जन्म नहीं लेती बल्कि उसे नारी बना दिया जाता है”। इसके विपरीत भारत में माना जाता है कि “स्त्री न जन्म लेती है न उसे बनाया जाता है वह तो दैवीय रूप में प्रकट होती है”। हम नारी हेतु एक अलग-विलग प्रकार के पश्चिमी ढर्रे के नारी विमर्श की कल्पना नहीं करते हैं जो कि नारी विमर्श को शेष मानवीय विमर्श से अलग करके समाज में एक पृथक टापू का निर्माण करता है। हम समूची व समग्र मानवीयता में संवेदनशीलता, सर्वसमावेशी व सर्वकालिकता के गुण समावेशित करते रहते हैं, जिसमें स्त्री केन्द्रीय भाव में स्थापित रहती है।

इसी यत्र नार्यन्ति पूज्यन्ते की दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रदेश के मुखिया और प्रदेश भर की भांजियों के मूंहबोले मामा कहलाने वाले शिवराज सिंह ने अपने राज्य में महिला व कन्या केन्द्रित कई ऐसी योजनायें लागू की है जो कि देश-विदेश हेतु प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, गर्भवती माताओं- शिशुओं के टीकाकरण हेतु अनमोल एप्प, महिलाओं और बालिकाओं में कौशल विकास हेतु कौशल्या योजना, मेधावी लड़कियों को फ्री लैपटॉप और स्मार्टफोन वितरण, मप्र विधवा पुनर्विवाह योजना, विधवा महिलाओं के घर पुनः बसाने हेतु प्रतिभा किरण योजना, मेधावी छात्राओं के लिए मिशन इन्द्रधनुष जैसी कई अभिनव योजनायें मध्यप्रदेश ने लागू की है। नारी सुरक्षा, सरंक्षण, संवर्धन व उनके समुचित विकास हेतु मप्र में लाई गई योजनायें भारत के अन्य राज्यों में प्रेरणा, नवाचार व अनुकरण का विषय बन कर लागू हो रही है। निस्संदेह मप्र की यह महिला विषयक योजनायें संघ परिवार के नारी विमर्श का व वैचारिक मंथन का क्रियान्वयन ही है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इन्हीं योजनाओं के दम पर ही प्रदेश भर की कन्याओं के प्रिय मामा बने हुए हैं। मध्यप्रदेश में कन्या सरंक्षण के वातावरण को और अधिक सुदृढ़ व सुनिश्चित करने हेतु मप्र ने एक कदम और बढ़ाया है जो निश्चित ही पुनः पुरे देश हेतु अनुकरणीय होगा।

हाल ही में मप्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 12 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार या किसी भी उम्र की महिला से गैंग रैप के दोषी को फांसी की सजा देने को मंजूरी दे दी है। मप्र इस दिशा में इस क़ानून को अपनी विस सर्वसम्मति से पारित कराकर देश का अग्रणी व प्रथम राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री शिवराज ने इस संदर्भ में सामाजिक स्तर पर एक नैतिक आन्दोलन चलाने की पहल भी की है। स्वाभाविक ही है कि मप्र सरकार की मंशा के अनुरूप समाज भी महिला सुरक्षा हेतु समाज जागरण कार्य करेगा तब ही ये योजनायें सफल हो पाएंगी। मप्र सरकार द्वारा चलाई गई महिला व कन्या केन्द्रित योजनाओं के सतत चक्र का ही परिणाम है कि मप्र में कन्या शिक्षा का स्तर आश्चर्यजनक रूप से ऊपर आ गया है। स्कूली शिक्षा में जहां भांजियां मामा की साइकिल योजना का लाभ उठाकर स्कूल जाने को रिकार्ड स्तर पर उद्धृत हो रही हैं वहीँ तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी प्रदेश में रिकार्ड स्तर पर आ गई है। महिलाओं को विशेष अवसर प्रदान करते हुए प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 38 पॉलीटेक्निक महाविद्यालयों में 50 सीटर महिला छात्रावास स्थापित किये हैं। इन योजनाओं से महिला शिक्षा के क्षेत्र में म.प्र. आनुपातिक रूप से अव्वल राज्य बन गया है।

केवल देश में ही नहीं विदेशों में भी और पाकिस्तान जैसे परम्परागत आलोचक राष्ट्र पाकिस्तान में भी शिवराज की योजनाओं को उदाहरण के रूप में लिया जा रहा है। पाकिस्तान के जाने-माने मीडिया समूह डान से जुड़ी पत्रकार सोफिया जमाल ने चौहान के नेतृत्व में बेटी बचाओ व लाड़ली लक्ष्मी योजना के अभियान को एक बेहद महत्वाकांक्षी अभियान कहते हुए इसे महिला अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर की संज्ञा दी थी। इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्था यूनिसेफ ने भी इस “बेटी बचाओ” योजना के विषय में प्रशंसा व्यक्त की है। इस अभियान के विषय में यूनिसेफ के स्टेट हेड श्री एडवर्ड बिडर ने इसे सम्पूर्ण विश्व के लिए सीख लेनें और महिला अधिकारों की स्थापना के अभियान का अनिवार्य भाग बताया था।