मानसी जोशी ने एक पैर पर किया बैडमिंटन की दुनिया में भारत का झंडा बुलंद,जानें क्या हैं इसके पीछे की पूरी कहानी..

थाईलैंड:  कहते हैं कि जिंदगी किसी का इम्तिहान लेती है तो कभी-कभी बहुत कुछ छीन लेती है। कुछ लोग इससे भागते हैं और हार मान लेते हैं लेकिन कई लोग इसके उलट होते और उससे लड़ते हुए हर जंग जीतने का हौंसला रखते हैं। 29 साल की मानसी जोशी इसका ताजा उदाहरण है। दरअसल सड़क दुर्घटना में एक पांव गंवा चुकी मानसी विश्व खेल पटल पर अपनी अलग पहचान बनाती दिख रही है। मानसी जोशी ने थाईलैंड पैरा बैडमिंटन इंटरनेश्नल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश का झंडा बुलंद कर दिया है। मानसी की कहानी बड़ी संघर्ष भरी रही है। उन्होंने बेहद कठीन दौर में अपने सपनों को जिंदा रखा है वह भी एक पांव गंवाने के बावजूद दुनिया जीतने का हौंसला दिखाया।

मानसी ने दिसंबर 2011 में सड़क दुर्घटना में एक पांव गंवा दिया था लेकिन इसके बावजूद बैडमिंटन में वह अपना जलवा दिखाती रही है।वह कहती हैं “ मैं बचपन से बैडमिंटन खेल रही हूं और विकलांग होने के बाद भी मैंने फिर से यह खेल खेलना शुरू कर दिया।” मानसी बैडमिंटन की दुनिया में नया नाम नहीं है। वह शुरू से बैडमिंटन में अपना करियर बनना चाहती थी और बचपन में इस खेल में अपना हुनर दिखाने लगी थी लेकिन दिसंबर 2011 में सड़क दुर्घटना ने उनके एक पैर चला गया और उनके करियर को बहुत बड़ा झटका लगा। पांव गंवाने के बावजूद भी उन्होंने बैडमिंटन खेलना नही छोड़ा,इसके बाद कृत्रिम पांव के सहारे उसने बैडमिंटन में अपने हुनर को मांजना शुरू कर दिया। मानसी 2015 से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है और पदक भी जीत चुकी हैं।

 

उनकी कामयाबी पर पुलेला गोपीचंद ने कहा कि मानसी सक्षम लोगों के लिये भी प्रेरणास्रोत है। गोपीचंद ने कहा, ‘पैरा बैडमिंटन में पदक जीतने के काफी मौके होते हैं। मानसी काफी कड़ी मेहनत करती है। उसका जुझारूपन देखकर अच्छा लगता है। वह कई सक्षम लोगों के लिये भी प्रेरणास्रोत बनेगी। उम्मीद है कि वह अच्छा प्रदर्शन जारी रखेगी।पैरा  कोच गौरव खन्ना ने भी उनकी कामयाबी पर कहा कि मानसी जैसी खिलाड़ी उन लोगो को लिए प्रेरणास्रोत है जो थोड़ी सी परेशानी से जिंदगी से हार मान लेते हैं। कुल मिलाकर उनके प्रदर्शन से यह साबित हो गया है कि अगर हौंसले बुलंद हो तो दुनिया जीतने से कोई नहीं रोक सकता है।