मालदीव का वीजा ना मिलने के कारण गई भारतीय युवक की नौकरी

भारत और मालदीव के बीच बिगड़ते रिश्तों का असर अब सीधे तौर पर आम जनता पर दिखने लगा है. राजनयिक संबंधों में गड़बड़ी के कारण ही मुंबई के एक युवक को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी. मुंबई के योगेश का कहना है कि उन्हें मालदीव से नौकरी का ऑफर मिला था, लेकिन वीज़ा मिलने में काफी देरी के कारण ये नौकरी उनके हाथ से चली गई. उन्होंने बताया कि सिर्फ वो नहीं बल्कि ऐसे कई लोग हैं जिनपर इसका असर पड़ा है.

मुंबई के योगेश ने लिखा कि उन्होंने मुंबई से ही ग्रेजुएशन की, जिसके बाद जॉब ढूंढ रहे थे. मुझे इसके लिए मालदीव से ऑफर आया, मैंने हां कर दी थी. और कागजी कार्रवाई शुरू दी. उन्होंने लिखा कि मैंने फरवरी में वर्किंग वीज़ा के लिए अप्लाई किया, अममून दो हफ्ते में सब हो जाता है लेकिन इस बार नहीं हुआ.

उन्होंने आरोप लगाया कि मेरी कंपनी के कहने पर मैं मालदीव पहुंचा, ताकि काम के माहौल का जायजा ले सकूं. लेकिन जब मैं मालदीव पहुंचा तो मुझे इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने देश में घुसने नहीं दिया, मैं वर्किंग वीज़ा पर गया था. लेकिन मुझे बतौर टूरिस्ट भी एंट्री नहीं मिली. उन्होंने लिखा कि मुझे दो दिन तक डिटेंशन सेंटर में रखा गया था.

गौरतलब है कि बीते सालों में मालदीव में चीन का दखल बढ़ा है. 2011 में माले में चीन ने अपना दूतावास खोला. दिसंबर 2017 में मालदीव ने बिना विपक्षी सांसदों की मौजूदगी के आधी रात में चीन के साथ विवादित ‘फ्री ट्रेड अग्रीमेंट’ (FTA) पारित किया.

चीन का दक्षिण एशिया में मालदीव के अलावा केवल पाकिस्तान के साथ ही FTA है. यहां से मालदीव्स भारत के बजाए चीन के करीब गया. इसी के बाद से ही भारत और मालदीव में दूरी बढ़ती गई.

भारत ने इस घटनाक्रम पर चिंता जाहिर की. इसके बाद तो दोनों देशों के संबंध और खराब हो गए. मालदीव्स ने बिना पूर्व अनुमति के भारतीय राजदूत से मिलने वाले अपने तीन स्थानीय काउंसिलर्स को सस्पेंड भी कर दिया. दोनों देशों के रिश्तों में ऐसा पहली बार देखने को मिला.