मासूमों की मौत के कलंक को भूल योगी का गोरखपुर महोत्सव से गुलजार

उत्तर प्रदेश का शहर गोरखपुर जो अबतक दिमाग बुखार से मासूमों की मौत के कलंक से दागदार रहा है. वो गोरखपुर इन दिनों भव्य महोत्सव से गुलज़ार है. यूपी सत्ता के सिंहासन पर विराजमान सीएम योगी आदित्यनाथ इसी गोरखपुर शहर से आते हैं. 3 दिन के ‘गोरखपुर महोत्सव’ के जश्न में डूबी हुई योगी सरकार पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है. विपक्ष ने कहा कि योगी सरकार संवेदनशील नहीं रह गई है.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर सज गया है. गोरखपुर विश्वविद्यालय के परिसर में ‘गोरखपुर महोत्सव’ का पांडाल सीएम योगी की पसंद के मुताबिक ही ढाला गया है. चारों ओर भगवा रंग ही रंग नजर आ रहे हैं. गोरखपुर महोत्सव का विशाल स्टेज से लेकर फूलों तक में भगवा रंग से सजाया गया है.

बता दें कि गोरखपुर महोत्सव का ये दूसरा साल है. पिछले साल बीजेपी के विपक्ष में रहते इसे आयोजित किया गया था, लेकिन गोरखपुर महोत्सव की भव्यता ऐसी नहीं थी. मौजूदा समय में बीजेपी सत्ता में है और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. ऐसे में इस बार महोत्सव को बेहद भव्य तरीके से अयोजित किया जा रहा है. सत्ता के साये में आलीशान तरीके से अयोजित किए जा रहे कार्यक्रम के बहाने विपक्ष योगी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं.

गोरखपुर महोत्सव पर सीधे सवाल खड़े करने के बजाए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐसी घटना का जिक्र किया, दिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. बता दें कि 5 महीने पहले सीएम योगी के शहर गोरखपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बाबा राघव दास अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 64 बच्चों ने दम तोड़ दिया था. मरने वाले महज 64 मासूम नहीं थे बल्कि 64 परिवारों की खुशियों ने हमेशा के लिए दम तोड़ा था.

ये मासूम मौत के आगोश में इसलिए समा गए क्योंकि क्योंकि उनको समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी. इसकी वजह ये थी कि ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी के महज 40 लाख रुपए के भुगतान को रोक दिया गया था, जिसके चलते कंपनी ने गैस सप्लाई करना बंद कर दिया था. बीएसपी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा कि योगी सरकार की संवेदनशीलता खत्म हो गई है.

उत्सवो पर विपक्ष के आरोप कोरी सियासत माने जा सकते हैं, लेकिन अफसोस तो ये है कि गोरखपुर की हकीकत प्रदेश ही नहीं सारे देश के सामने है. इसीलिए इस भव्य महोत्सव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.  क्या माना जाए कि अब 5 महीने बाद मॉनसून का मौसम फिर आने पर गोरखपुर में बेबस मासूम दम नहीं तोड़ेंगे? इस बात की गारंटी कोई सरकार लेगी. .

गोरखपुर के माथे पर दिमागी बुखार से बच्चों की मौत गोरखपुर का ऐसा कलंक है, जिसका दाग़ बरसों से इस शहर पर लगा है. अब इसी शहर का मुख्यमंत्री बनने से उम्मीद जगी थी कि योगी सरकार सबसे पहले अपने शहर के इस कलंक को पूरी तरह मिटाएगी. पर ऐसा नहीं हो सक है. योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद भी मासूम बच्चों के दम तोड़ने का सिलसिला जारी है.

मॉनसून पीछे छूट चुका है और शायद सरकार के लिए पीछे छूट चुकी है मासूमों की मौत भी हैं. इसीलिए विरोधियों की आवाज़ें सिर्फ सियासी कहकर योगी सरकरा खारिज कर रही है. योगी सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि विफक्षी दलों सिर्फ सियासत के लिए गोरखपुर महोत्सव पर सवाल खड़े कर रहे हैं. जबकि हमारा मकसद पूर्वांचल में भोजपुरी को आगे बढ़ाने का है.

इस महोत्सव का ये रंग और ये शोर गोरखपुर का दर्द मिटाने के बाद परवान चढ़ा है. काश कि ऐसा ही हो, लेकिन ऐसा ना हुआ तो क्या ये उस प्रचंड बहुमत का अपमान नहीं, जो बीजेपी को मिला है.क्या ये सत्ता का वैसी ही रंग नहीं जिसका अबतक बीजेपी विरोध करती रही है.