Friday, July 20, 2018 - 2:25 PM
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यूको बैंक के पूर्व चेयरमैन 621 करोड़ रुपए के कर्ज घोटाला मामले में गिरफ्तार, 18 % गिरे यूको बैंक के शेयर

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सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ( सीएमडी ) अरुण कौल को 621 करोड़ रुपए के कर्ज घोटाला मामले में गिरफ्तार किये जाने के बाद इसके शेयर आज शुरुआती कारोबार में करीब 18 प्रतिशत गिर गए. कौल को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया है. बंबई शेयर बाजार में बैंक के शेयर 20 रुपए पर खुले और कुछ ही देर में 14.31 प्रतिशत गिरकर 52 सप्ताह के निचले स्तर 19.15 रुपये पर आ गए. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में इसके शेयर 20.60 रुपये पर खुले और कुछ ही देर में 17.97 प्रतिशत गिरकर 18.25 रुपये पर आ गए.यूको बैंक के पूर्व चेयरमैन 621 करोड़ रुपए के कर्ज घोटाला मामले में गिरफ्तार, 18 % गिरे यूको बैंक के शेयर

सीबीआई ने 621 करोड़ रुपये के ऋण घोटाला मामले में कौल एवं अन्य लोगों को 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. इस घोटाले से बैंक को 737 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सीबीआई ने कौल के अलावा एरा इंजीनियरिंग इंफ्रा इंडिया लिमिटेड के सीएमडी हेम सिंह भड़ाना , एल्टियस फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के पवन बंसल , दो चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज जैन और वंदना शारदा समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था.

इस मामले में कौल के अलावा सीबीआई ने एरा इंजीनियरिंग इंफ्रा इंडिया लिमिटेड ( मेसर्स ईईआईएल ), उसके सीएमडी हेम सिंह भराना, दो चार्टर्ड अकाउंटेंट … पंकज जैन और वंदना शारदा, मेसर्स अलटियस फिन्सर्व प्राइवेट लिमिटेड के पवन बंसल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोप है कि इन लोगों ने आपराधिक साजिश करके कर्ज की आड़ में यूको बैंक को 621 करोड़ रुपये का चुना लगाया.

अधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2010 से 2015 तक यूको बैंक के सीएमडी रहे कौल ने आरोपियों को कर्ज लेने में कथित तौर पर मदद की. सीबीआई का कहना है कि चार्टर्ड अकाउंट द्वारा जारी फर्जी एंड यूज प्रमाणपत्र और मनगढ़ंत कारोबारी डाटा पेश करके कर्ज हासिल किया.

पंजाब नेशनल बैंक और यूको बैंक में बड़े घोटालों के मामलों के बीच केंद्रीय सतर्कता आयोग ( सीवीसी ) ने एहतियाती व्यवस्था बनाने के लिए बैंकों से तीन करोड़ रुपये से अधिक की किसी भी धोखाधड़ी का ब्योरा मांगा है. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के वी चौधरी ने कहा था कि चूंकि यह आंकड़ा मूल रुप से संबंधित बैंकों और आरबीआई के पास है, ऐसे में हम महसूस करते हैं कि यदि हमें पता चल जाए कि किस प्रकार की धोखाधड़ी हो रही है, उसके कारणों का विश्लेषण किया जा सकता है और ( उनकी पुनरावृति रोकने के ) कुछ एहतियाती कदम उठाये जा सकते हैं.