राजस्थान में ग्रे मार्केट में मेहनत करने के बजाय सैलरी बेस्ड क्राइम कर रहे अपराधी

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जयपुर : मोबाइल चोरी और चेन स्नैचिंग करने वाले नौसिखिए अपराधियों को चोरी का सामान बेचने के लिए ग्रे मार्केट में बिचौलिए ढूंढने में मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में अब नए अपराधियों ने मजबूरन सैलरी या कमिशन पर काम करना शुरू कर दिया है। इस उम्मीद से कि उन्हें उनके काम का उचित मूल्य मिल सके। गिरोह के सरगना आशीष उर्फ अमित (21) इन आरोपियों को 15 हजार रुपये प्रति महीने देता था। ये सभी आरोपी 20 से 22 साल की उम्र के हैं। जयपुर पुलिस के पूर्वी जोन की स्पेशल ब्रांच ने 6 सैलरी बेस्ड चोरों से पूछताछ की जिन्हें मंगलार को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में अपराधियों ने बताया कि वे गिरोह के सरगना आशीष के लिए काम करने को तैयार हुए थे क्योंकि उन्हें सैलरी बेस पर काम करना ज्यादा आसान लग रहा था बजाय मार्केट में एक सही दलाल को ढूंढना जो सही दाम लगा सके। गिरोह के सरगना आशीष उर्फ अमित (21) इन आरोपियों को 15 हजार रुपये प्रति महीने देता था। ये सभी आरोपी 20 से 22 साल की उम्र के हैं। एक अधिकारी ने बताया, किसी गिरोह के सरगना को ग्रे मार्केट में आसानी से एंट्री मिल जाती है इसलिए गैंग के सदस्यों को मार्केट में अपने खरीदार ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती। पुलिस ने बताया कि सवाई माधोपुर, दौसा, भरत और उत्तर प्रदेश के ग्रे मार्केट में बिचौलियों का बड़ा असर है जहां वो चोरों से बाइक खरीदते हैं और इसे मॉडिफाइ करके खरीदारों को बेचते हैं।