वादे तो पूरे हुए, अब नए इरादों का दौर

साक्षात्कार : अखिलेश यादव

akhileshजब समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ाया था तो विपक्षी दलों ने इसकी जमकर आलोचना की थी। विपक्ष का आरोप था कि नेताजी परिवारवादी हैं। अखिलेश यादव ने न सिर्फ लोकसभा चुनाव जीता बल्कि अपनी राजनैतिक समझ और परिपक्वता का भी परिचय संसद से लेकर सड़क तक दिया। पहली बार में ही अखिलेश यादव ने फिरोजाबाद और कन्नौज दोनों लोकसभा सीटों पर फतह हासिल की लेकिन उन्होंने फिरोजाबाद के स्थान पर कन्नौज का ही प्रतिनिधित्व करने का मन बनाया। एक जुलाई 1973 को जन्मे अखिलेश यादव की योग्यता और उनके प्रदर्शन को दृष्टिगत रखते हुए ही उनके पिता और पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने साल 2012 में हुए उप्र विधानसभा चुनाव की पूरी कमान उनके कंधों पर रख दी। युवा सोच और विचार ने जिम्मेदारी मिलने के बाद, करिश्मा दिखाने में देर भी नहीं लगायी और उसका परिणाम यह हुआ कि समाजवादी पार्टी ने पहली बार उप्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। अखिलेश यादव को चुनाव प्रचार के दौरान मिले स्नेह और भरपूर वोट, उन्हें ही मुख्यमंत्री के पद पर देखने का ऐलान कर रहे थे। हुआ भी वही और सपा मुखिया ने देश के सबसे बड़े सूबे की कमान अखिलेश यादव को सौंप दी।
उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही सूबे में एक नयी ऊर्जा का संचार हुआ और लोगों के दिलों में सपने पलने लगे। स्वयं अखिलेश यादव भी इस बात को जानते थे कि विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने जो वादे जनता से किए हैं, उन्हें तो धरातल पर उतारना ही होगा। उन्हें पता था कि सूबे के करोड़ों लोगों की निगाहें और आशायें उन पर ही टिकी हैं। सो, सरकार बनते ही उन्होंने एक-एक करके चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने का काम शुरू किया। सरकार बने अभी दो साल से अधिक का ही समय बीता था लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव ने सभी वादों को अमलीजामा पहना दिया। चुनावी वादों को पूरा करने के साथ-साथ, उन्होंने सूबे के वास्तविक विकास का जो खाका खींचा था, उसे धरातल पर उतारने के लिए दिन-रात एक कर दिया। दूसरी ओर विपक्ष को यह कतई रास नहीं आ रहा था कि अखिलेश यादव बतौर मुख्यमंत्री सफलता की सीढ़ियों पर बेरोकटोक चढ़ते चले जायँ। सो, शुरू हुआ साजिशों का दौर। साम्प्रदायिकता की रोटियां सेंकने से लेकर दंगों व कानून-व्यवस्था को तार-तार कर सरकार को बदनाम करने की चालें चली जाने लगीं लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निश्छलता से दृढ़ता का परिचय देते हुए नैतिक बल की ताकत से हर झंझावातों से प्रदेश को निकाला ही नहीं, विकास की गति भी प्रभावित नहीं होने दिया। यही कारण है कि साल 2012 के बाद, यदि लोकसभा चुनाव को अपवाद मानकर छोड़ दिया जाये तो समाजवादी पार्टी ने, उपचुनाव से लेकर पंचायतों तक के चुनाव में, अपनी सरकार की लोकप्रियता का मजबूती से अहसास कराया। अब जबकि उप्र विधानसभा के लिए साल 2017 में फिर चुनाव होने हैं, ऐसे में एक बार फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व और उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों को कसौटी पर कसा जायेगा। कुछ ऐसे ही विषयों पर ‘दस्तक टाइम्स’ के संपादक राम कुमार सिंह से बातचीत के प्रमुख अंश-

समाजवादी सरकार के करीब चार साल पूरे होने को हैं, इस उपलब्धि को आप कैसे आंकते हैं?
हमारी सरकार ने जो योजनायें शुरू कीं, उनका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हुआ। सरकार की नीतियों से आम जनता को लाभ पहुंचा है। प्रदेश विकास के पथ पर आगे बढ़ा है। हमने हर क्षेत्र में काम किया है। कोशिश थी कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े दलित, शोषित और वंचित तबके विकास की मुख्य धारा से जुड़ें। विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने जनता से जो भी वादे किये थे, उन सभी को पूरा किया है। सरकार की सोच थी कि अगर रफ्तार दोगुनी कर दी जाये तो विकास तीन गुना हो सकता है, इसीलिए जिला मुख्यालयों को चार लेन की सड़कों से जोड़ने का काम किया और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में आधुनिक सड़कों का निर्माण कराया। अगर वादे पूरा करने का आत्मविश्वास न होता तो कोई सरकार ‘पूरे हुए वादे, अब हैं नए इरादे’ जैसी बात नहीं कर सकती थी। पूरे वादों की लिस्ट सड़कों पर लगा दी गई हैं, कोई भी देख सकता है।
ढांचागत विकास के मामले में आपकी सरकार की कोई प्रमुख उपलब्धि?
समाजवादी सरकार आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े प्रदेश में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित कर, रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम गंभीरता से कर रही है। ढांचागत सुविधाओं के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ-साथ गरीबों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराकर उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने की दिशा में बहुत काम किया। सरकार ने अपने पहले बजट से ही किसानों, गरीबों और पिछड़ों की खुशहाली के लिए काम करना शुरू कर दिया था। सूबे में ‘प्रवासी दिवस’ का आयोजन कराया, जिससे प्रदेश में भारी निवेश की उम्मीद जगी।

आपका एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे, वह कब तक पूरा होगा?
इस परियोजना को राज्य सरकार 22 महीने में पूरा करने के लिए कृत संकल्प है। इतनी बड़ी परियोजना के लिए किसानों की सहमति से भूमि ली गयी और उन्हें सर्किल दर से चार गुना अधिक मुआवजा दिया गया। यह पहली परियोजना होगी जबकि अधिग्रहण को लेकर कहीं भी कोई हो-हल्ला नहीं हुआ। यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। इससे यूपी के बारे में, दुनियाभर में नजरिया बदलता दिखाई देगा।
लखनऊ मेट्रो की प्रगति की क्या स्थिति है, अन्य शहरों में मेट्रो की क्या प्रगति है?
राज्य सरकार लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना पर तेजी से काम कर रही है। यह परियोजना अपने तय समय से पूरी हो जायेगी। इसके अलावा कानपुर, वाराणसी सहित कई बड़े शहरों में मेट्रो रेल संचालन के लिए डीपीआर तैयार कराया जा रहा है। मेट्रो की सुविधा मिल जाने से नगरों में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा, जिसमें समाज के सभी वर्गों को समान रूप से अवसर मिलेंगे और यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी। सड़कों पर वाहनों का दबाव घटने से प्रदूषण भी कम होगा। उत्तर प्रदेश सरकार मेट्रो का कार्य अपने कोष से ही करा रही है।

आपने पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, कब तक पूरा हो पायेगा?
इसी साल से ग्रामीण क्षेत्रों को 16 घंटे तथा नगरीय क्षेत्रों को 22 से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन, पारेषण तथा वितरण क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। परम्परागत विद्युत के अतिरिक्त सौर ऊर्जा पर भी सरकार ने गंभीरता से काम किया है। हाल में, महोबा में सौर ऊर्जा उत्पादन इकाई का लोकार्पण किया गया है। शीघ्र ही ललितपुर में भी, तीन इकाइयों का लोकार्पण किया जायेगा। हमने अपने घोषणापत्र में ही अपनी प्राथमिकताओं को उजागर कर दिया था और वादे के मुताबिक उस पर अमल किया- हम समाजवादी लोग वादे और इरादे के पक्के होते हैं।

समाजवादी पेंशन योजना के बारे में कुछ बतायें?
वित्तीय वर्ष 2015-16 में, इस योजना के तहत समाज के सभी वर्गों, (जिनमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं), के 50 लाख परिवारों को आच्छादित किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में, पांच लाख अतिरिक्त लाभार्थियों को इस योजना के तहत लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत नगरों में भी रहने वाले गरीब वर्गों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। ‘लोहिया ग्रामीण आवास’ में सोलर पैनल के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी लाभार्थी को दी जा रही हैं।

सरकार ने इतने काम किए, लेकिन फिर भी विपक्ष हर मुद्दे पर सरकार को विफल बता रहा है, ऐसा क्यों?
विपक्ष का तो काम ही होता है सरकार की आलोचना करना, लेकिन स्थिति तब खराब हो जाती है, जब सरकार के खिलाफ साजिशें रची जाने लगती हैं। विपक्ष अनर्गल आरोप लगाकर सरकार को बदनाम करता है और कई मौकों पर मीडिया भी उसके बहकावे में आ जाता है जबकि जरूरत इस बात की होती है कि मीडिया सच्चाई को उजागर करे। लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना का हमेशा स्वागत किया जाना चाहिए।

कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश का माहौल औद्योगीकरण के अनुकूल नहीं है। इस दिशा में अपनी सरकार के प्रयासों को आप किस तरह देखते हैं?
देखिए, कोई उपलब्धि हासिल करने या किसी मुकाम तक पहुंचने पर यदि कोई भी व्यक्ति संतुष्ट हो जाता है, तो उसके और बेहतर करने की गुंजाइश कम हो जाती है। ऐसा सरकारों के मामले में भी लागू होता है। प्रदेश सरकार ने निवेश को बढ़ाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के मकसद से अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति सहित सेक्टरवार तमाम नीतियों को लागू किया है। हमारे इन प्रयासों के नतीजे दिखने लगे हैं। मुंबई में ‘निवेशक सम्मेलन’ के दौरान 51 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया। इससे पहले जून 2014 में नई दिल्ली में आयोजित ‘निवेशक सम्मेलन’ में, 54 हजार करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस वर्ष जनवरी में ‘ई-उत्तर प्रदेश सम्मेलन’ में पांच हजार करोड़ रुपए के एमओयू किए गए। पिछले दिनों, आठ मेगा औद्योगिक इकाइयों को राज्य सरकार द्वारा ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट’ प्रदान किया गया, जिनमें लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस दिशा में, सरकार के प्रयास भविष्य में भी पूरी गति से जारी रहेंगे।

कानून-व्यवस्था पर सरकार और जनता दोनों ओर से परस्पर दावे किये जाते हैं, वास्तविक स्थिति क्या है?
समाजवादी सरकार के कार्यकाल में, प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर हमेशा एकपक्षीय तस्वीर ही पेश की जाती है। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य की कानून-व्यवस्था, अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी मजबूत है। उदाहरण के तौर पर, बदायूं की घटना को ही लें, जिसके बारे में मीडिया में काफी खबरें आई थीं, लेकिन सीबीआई जांच में सच सामने आ गया। बड़े औद्योगिक घरानों और प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा राज्य में लगातार किया जा रहा निवेश यह साबित करता है कि कानून व्यवस्था को लेकर जो भी सवाल खड़े किए जाते हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं, राजनीति से प्रेरित हैं। ये उन्हीं लोगों द्वारा उठाए जाते हैं, जो प्रदेश के विकास के दुश्मन हैं।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड काफी पिछड़े हैं। इन क्षेत्रों के लिए विशेष क्या किया जा रहा है?
बुंदेलखंड क्षेत्र में सौर ऊर्जा के विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार इस इलाके में, सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना पर ध्यान दे रही है। महोबा और ललितपुर में, ऐसे प्लांट बन भी रहे हैं। हर क्षेत्र में बिजली के महत्व को देखते हुए निश्चित रूप से, ऐसे प्लांट्स बुंदेलखंड के छोटे और मंझोले उद्योगों के लिए भी उपयोगी साबित होंगे। आने वाले समय में, बुंदेलखंड में ऐसे अनेक सोलर प्लांट्स की स्थापना होने जा रही है। इसके अलावा, राज्य सरकार सोलर पार्क की स्थापना पर भी काम कर रही है। पूर्वांचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वर्तमान सरकार ने, ‘लखनऊ से बलिया वाया आजमगढ़ एक्सप्रेस वे’ के निर्माण का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

यह सरकार किसानों की सरकार कही जाती है। सरकार ने किसानों के लिए क्या कदम उठाये?
सरकार किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त पानी दे रही है। सरकार के सिर्फ इस एक निर्णय से प्रदेश के 55 लाख किसानों का प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपए का शुल्क बच रहा है।
यही कारण है कि करीब 12 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई का लक्ष्य प्राप्त किया गया है। ‘डॉ. राम मनोहर लोहिया नवीन राजकीय नलकूप निर्माण परियोजना’ के तहत 3000 नए नलकूपों का निर्माण कराया जा रहा है। किसानों के लिए प्रदेश में चलायी जा रही ‘कृषक दुर्घटना बीमा योजना’ में प्रति व्यक्ति अधिकतम आवरण राशि एक लाख रुपए से बढ़ाकर पांच लाख रुपए की गयी है। पिछले तीन सालों में, 21 हजार किसान परिवारों को लगभग 1000 करोड़ रुपए की सहायता दी जा चुकी है।
सरकार ने किसानों की ऋण माफी योजना 2012 में लागू की थी। कृषि भूमि को बंधक रखकर कर्ज लेने वाले किसानों को कर्ज अदा न कर पाने की स्थिति में, जमीन को नीलामी से बचाने के लिए सरकार ने, 1779 करोड़ रुपए की धनराशि से 7,75000 किसानों का ऋण माफ किया है। सरकार वित्तीय वर्ष 2015-16 को ‘किसान वर्ष’ के रूप में मना रही है। गन्ना किसानों को सरकार ने पिछले पेराई सत्र में, करीब 700 करोड़ का अनुदान दिया है। बुन्देलखंड जैसे पिछड़े इलाकों में, अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए गरीब दुग्ध उत्पादकों को अतिरिक्त बोनस देने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
(साथ में जितेन्द्र शुक्ला, राघवेन्द्र) 

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