संकल्प शक्ति का प्रतीक है “हरतालिका तीज”, यहां जानिए पूजा का मुहूर्त और विधि

नई दिल्‍ली : देशभर में आज हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जा रहा है| हरतालिका तीज के दिन देवों के देव महादेव और माता गौरी की पूजा का विधान है| धार्मिक मान्यता के मुताबिक, हरतालिका तीज का व्रत करने से सुगाहिनों को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है| वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है| हिन्‍दू पंचाग के मुताबिक, हर साल हरतालिका तीज भाद्रपद यानि की भादो माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है| इस बार यह व्रत 12 सितंबर को मनाया जाएगा| 12 सितंबर की सुबह हरतालिका तीज का शुभ मूहूर्त सुबह 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा| वहीं, जो महिलाएं शाम को हरतालिका तीज का पूजन करती हैं, वह शाम 7 से 8 बजे के बीच पूजन कर सकती हैं| भारत के उत्तरी हिस्से राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तीज को हरतालिका तीज के नाम से पुकारा जाता है| वहीं दक्षिण राज्य जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इस त्योहार को गौरी हब्बा के नाम से पुकारा जाता है| हरतालिका तीज की पूजा को करना जितना कठिन है, उतना ही कठिन है, इसका व्रत रखना| पौराणिक मान्यका के मुताबिक, इस व्रत के दौरान महिलाएं बिना पानी के 24 घंटे तक व्रत रखती हैं| कुछ एक स्थिति में अगर तृतीया का समय 24 घंटे से ज्यादा का रहता है, तो इस व्रत की अवधि बढ़ती है| हरितालिका तीज का व्रत निराहार और निर्जल रहकर किया जाता है| व्रत को रखने वाली महिलाएं और युवतियां सुबह उठकर स्नान आदि करके भगवान शिव की पूजा करती है| महिलाएं और युवतियां भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, और शहद से स्नान कराकर उन्हें फल चढ़ाती हैं, और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं| हरतालिका तीज पर पूजन के लिए, गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल, फुलहरा “प्राकृतिक फूलों से सजा”, मां पार्वती के लिए सुहाग सामग्री, मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा आदि, श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी, तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद पंचामृत के लिए आदि|

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