स्पोर्ट्स हब बना लखनऊ

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राघवेन्द्र प्रताप सिंह
मुगल, भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला, अपनी नजाकत और नफासत, अपने अदब और तहजीब, अपने कल्चरल, कला और भाषा के लिए लखनऊ दुनिया में जाना व माना जाता है। पर पिछले चार-पांच वर्षों में लखनऊ की पहचान दुनिया में स्पोर्ट्स हब के रूप में हो रही है। तीन-तीन विश्व स्तरीय एस्ट्रोटर्फ, तीन-तीन सिंथेटिक ट्रैक, केडी सिंह बाबू के अलावा सुल्तानपुर रोड पर क्रिकेट का भव्य अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, दर्जन भर से ज्यादा ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल…। यही नहीं इतिहास में पहली दफा हॉकी के जूनियर वल्र्ड कप की मेजबानी कर लखनऊ ने पूरी दुनिया का वाहवाही लूटी। क्रिकेट के टेस्ट मैच, वन डे, रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, जोनल टूर्नामेंट जैसे आयोजनों को लेकर तो राजधानी चर्चा में आती रही है। यही नहीं, एशिया की पहली बैडमिंटन की एशिया चैंपियनशिप की मेजबानी कर 1965 में लखनऊ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित की थी। बदलते दौर में राजधानी ने इस कड़ी में नए आयाम जोड़े हैं। राजधानी में हुए विकास ने अब यहां पर्यटन के लिए नई राहें तय करना शुरू कर दी हैं, जिसका असर दिखने भी लगा है।
हॉकी
नवम्बर में हॉकी जूनियर वल्र्ड कप की मेजबानी इस कड़ी का सुनहरा हिस्सा है, जब विदेशी मेहमान हमारे बीच थे। भारत समेत दुनिया की चोटी की 16 टीमें यहां खेलने पहुंची थीं। ध्यानचंद एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम को विश्व स्तरीय स्वरूप दिया गया। दूधिया रोशनी व नीली टर्फ वाले इस स्टेडियम की दुनिया में गुणगान हुआ। जब टेलीविजन पर इस टूर्नामेंट का दुनिया के 128 देशों में प्रसारण हुआ तो हर खेलप्रेमी का दिल खुश हो गया। यहां पहुंचे हॉकी के जानकारों ने बताया कि ऐसा माहौल पूरी दुनिया में कभी नहीं देखा। हर मुकाबले में उमड़ी भीड़ ने खिलाड़ियों में जोश भर दिया। भारत व बेल्जियम के बीच हुए खिताबी मुकाबले में तो जैसे पूरा शहर उमड़ आया हो। यकीन करना मुश्किल होगा कि 50 रुपए का टिकट ब्लैक में 500 रुपए तक बिका। जितने दर्शक स्टेडियम के भीतर उतने ही बाहर खड़े मैच की एक झलक पाने के लिए छटपटा रहे थे। इण्टरनेशनल हॉकी फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष नेग्रे तो यहां का माहौल देखकर दंग रह गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी अन्य शहर में हॉकी का इतना अच्छा माहौल नहीं देखा। इतने दर्शक उमड़ते नहीं देखे। यही नहीं, उन्होंने रिकार्ड समय में तैयार गोमतीनगर के मो. शाहिद एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम को भी देखा। इतना खूबसूरत स्टेडियम देखकर वह बोले, यहां भी बड़े टूर्नामेंट हो सकते हैं। वहीं फेडरेशन के मौजूदा अध्यक्ष नरेंद्रत बत्रा तो गदगद थे। उन्होंने कहा कि लखनऊ में हॉकी की विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं। आने वाले वक्त में यहां और बड़े टूर्नामेंट होंगे। वर्ष 2018 में सीनियर वल्र्ड कप होना है। उसके आयोजन के लिए भी वह लखनऊ पर विचार कर सकते हैं। यही नहीं, इसी साल होने वाले एशिया कप की भी मेजबानी लखनऊ को मिल सकती है। इसके अलावा सरोजनीनगर स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के सेंटर में भी नीली एस्ट्रोटर्फ बिछने जा रही है। यह भी फरवरी तक तैयार हो जाएगी।
फिर सजेगा हॉकी का मंच
हर वर्ष की तरह इस बार हाकी इंडिया लीग (एचआईएल) का आयोजन राजधानी में होगा। पहला मैच राजधानी में दस फरवरी को खेला जाएगा। अंतिम मुकाबला 22 फरवरी को खेला होगा। यूपी विजाड्र्स की टीम प्रैक्टिस के लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह में आएगी। एचआईएल के सभी मुकाबले इस बार गोमती नगर स्थित स्टेडियम में आयोजित किए जाने की तैयारी है। शहर में होने के साथ ही यहां तक दर्शक आसानी से पहुंच सकते हैं। स्पोट्र्स कॉलेज खासी दूर हैं, साथ ही वहां तक पहुंचने के लिए संसाधनों का टोटा भी है। गोमती नगर स्टेडियम में होने वाले सभी मुकाबले शाम सात बजे से खेले जाएंगे।
एथलेटिक्स :
एथलेटिक्स की भी यहां विश्व स्तरीय सुविधाएं हैं। स्पोट्र्स कॉलेज में सिंथेटिक ट्रैक का जीर्णोद्धार हो चुका है। शहर के मध्य में पीएसी की महानगर स्थित बटालियन में भी एक खूबसूरत सिंथेटिक ट्रैक स्टेडियम है। इसके अलावा साई सेंटर में हाल ही में नया सिंथेटिक ट्रैक स्टेडियम बनकर तैयार हो चुका है। यहां ओपेन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी हुई। पीएसी महागर के सिंथेटिक ट्रैक पर कई राष्ट्रीय व अखिल भारतीय पुलिस चैंपियनशिप हो चुकी हैं। यही नहीं साई सेंटर में दक्षिण एशियाई यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी आयोजित होनी थी पर किन्ही कारणवश यह नहीं हो पायी। देर-सवेर यह भी होनी है।
साइकिलिंग को भी मिलेगी रफ्तार
राजधानी में कई उम्दा साइकिलिस्ट हैं, पर वह तड़के सड़कों पर ही अभ्यास करते हैं। राज्य सरकार ने साइकिलिंग का माहौल तैयार करने के लिए 150 करोड़ रुपए की लागत से स्पोट्र्स कॉलेज में वेलोड्रोम का निर्माण करवा रही है। यह अपने किस्म का अनूठा वेलोड्रोम होगा। दुनिया के शीर्ष दस वेलोड्रोम में यह शुमार होगा। इसमें विदेशी लकड़ी से ट्रैक बनाए जाएंगे। वार्मअप एरिया, विश्वस्तरीय जिमनेजियम, हॉस्टल भी होंगे।
और भी जगहें हैं खेलने की
गोमती नदी के किनारे ला मार्टिनियर कॉलेज के पीछे सरकार ने एक ओपेन स्टेडियम बनवाया है। फ्लड लाइट वाला यह स्टेडियम एक बारगी तो विदेश की याद दिलाता है। याद कीजिए न्यूजीलैण्ड व आस्ट्रेलिया के उन स्टेडियमों को जहां दर्शक मिट्टी के टीलों पर आराम से बैठकर मैच देखते हैं। ठीक उसी तर्ज पर इस स्टेडियम को बनाया गया है। इसमें फुटबाल, क्रिकेट व हॉकी आदि के मुकाबले हो सकते हैं। इसके अलावा सरकार ने लोहिया पार्क और जनेश्वर मिश्र पार्क में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की जगह बनाई है। दोनों ही पार्कों में ओपेन जिम के अलावा सिंथेटिक रनिंग ट्रैक बनाया गया है। इस पर एथलीट व अन्य खिलाड़ी आफ सीजन वर्क या इण्ड्योरेंस वर्क कर सकते हैं। यही नहीं, शारीरिक दमखम बनाने के लिए घास के टीले भी बनाए गए हैं। ये जगह एथलीटों की ट्रेनिंग के लिए स्वर्ग सरीखी हैं। इसके अलावा गोमतीनदी के दोनों किनारों को खूससूरत बना दिया गया है। निशातगंज पुल से लेकर हनुमान सेतु तक नौकायन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का कोर्स है। इस दरम्मान गोमतीनदी एक सीध में बहती है। नौकायन में राफ्टिंग, याचिंग, कैनोइंग जैसे इवेंट हो सकते हैं।
क्रिकेट
यूं तो राजधानी का क्रिकेट इतिहास पुराना है। गोमती किनारे नदवा मैदान पर 1956 में भारत व पाकिस्तान के बीच दूसरा टेस्ट मैच यहां खेला गया था। यह पाकिस्तान टीम का पहला भारतीय दौरा था। इसके बाद केडी सिंह बाबू स्टेडियम में यहां भारत व श्रीलंका के बीच टेस्ट मैच। इंग्लैण्ड के साथ तीन दिवसीय मुकाबला हुआ। 1989 में पाकिस्तान व श्रीलंका के बीच वन डे मैच खेला गया। महिला क्रिकेट वल्र्ड कप के कई मैच आयोजित किए गए। मूक-बधिर खिलाड़ियों का वल्र्ड कप आयोजित किया गया। रणजी, दिलीप ट्रॉफी, इरानी ट्रॉफी, विल्स ट्रॉफी समेत कई मुकाबले हुए। अण्डर-19 क्रिकेट के कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हुए। अब लखनऊ क्रिकेट की नई गाथा लिखने को तैयार है। बाबू बनारसी दास इंस्टीट्यूट में डा.अखिलेश दास स्टेडियम भी कई रणजी ट्रॉफी की मेजबानी कर चुका है। शहीद पथ पर सुल्तानपुर रोड के बगल में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय स्पोट्र्स काम्पलेक्स बन रहा है। इसमें 70 हजार दर्शक क्षमता वाला क्रिकेट का स्टेडियम बनकर तैयार है। फिनिशिंग का काम जारी है। यहां पर रणजी ट्रॉफी के मुकाबले के साथ इसकी पिच का उद्घाटन हो चुका है। यहां 10 उम्दा किस्म की पिचें तैयार की गई हैं। विश्व स्तरीय मीडिया सेंटर, प्लेयर ड्रेसिंग रूप भी बन रहे हैं। फ्लड लाइट का काम पूरा हो चुका है। दर्शकों के लिए कुर्सियां लग चुकी हैं। इसके अलावा यहां फुटबाल, टेनिस, हॉकी आदि के भी भव्य स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। इस स्टेडियम के बन जाने से इस नवाबी नगरी की अंतरराष्ट्रीय मैचों को देखने की लालसा पूरी होगी। आईपीएल के अलावा टेस्ट, वन डे व ट्वेंटी-20 मुकाबलों का आयोजन हो पाएगा।
स्विमिंग:
स्विमिंग के लिए भी राजधानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं हैं। केडी सिंह बाबू स्टेडियम के अलावा पीएसी महानगर में और जेपी सेंटर में ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल हैं। इसके अलावा साई सेंटर सरोजनीनगर व स्पोर्ट कॉलेज में भी ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल तैराकों के लिए हैं। केडी सिंह बाबू स्टेडियम का स्विमिंग पूल तो अब आल वेदर हो गया है। यानी कड़ाके की ठण्ड में भी ट्रेनिंग कर सकते हैं।
राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की उम्मीद बढ़ी
राजधानी में खेलों की जितनी सुविधाएं बढ़ी हैं उसे देखते हुए राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए वह यहां हो गया है। पहले साइकिलिंग के लिए वेलोड्रोम व नौकायन के लिए जगह नहीं थी। अब वह भी पूरी हो जाएगी। खिलाड़ियों व ऑफीशियल के ठहरने के लिए राजधानी में अच्छे होटल व गेस्ट हाउस हैं।