हर चुनाव में बदलती रहीं सीटें हर बार नयी पार्टी को मिला मौका

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लखनऊ : केवल नेता ही नहीं, बल्कि लोकसभा सीट की जनता भी रंग बदलती है। कभी दल से नाराज तो कभी प्रत्याशी से। फिर बेवफाई ऐसी कि हर चुनाव में पिछली बार की जीती पार्टी को हरा दिया और नया नुमाइंदा चुन लिया। रंग बदलने की वजह भी है। पहले के चुनावी संग्राम में जनता पर कांग्रेस का ही रंग चढ़ा रहा। कभी-कभी भारतीय जनसंघ, कम्यूनिस्ट दल या सोशलिस्ट दल। इसके बाद भाजपा व अन्य दलों के उभार व शख्सियतों के चलते जनता उनकी ओर आकर्षित हुई तो मोहभंग भी जल्द हुआ। वैसे तो इस तरह का दौर देखने वाले दो दर्जन से ज्यादा संसदीय क्षेत्र हैं पर कुछ सीटों के जरिए जानते हैं कि कैसे जनता दलों व नेताओं की वेवफाई के चलते अनुभव और सबक के आधार पर अपना सांसद चुनती है।
अमरोहा : रुहेलखंड की अमरोहा सीट का मिजाज शुरू से बदलता रहा है। पहले दो चुनाव कांग्रेस, फिर दो बार सीपीआई, इसके बाद जेपीएस, कांग्रेस जीती। इसके बाद 1989 में जद के हरगोविंद जीते। इसके बाद सीट ने हर बार नया प्रत्याशी जिताने का सिलसिला शुरू किया। वर्ष 1991 में प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी चेतन चौहान को भाजपा ने यहां से उतारा और वह जीत गये। अगला चुनाव वह हार गये तो इसके बाद चुनाव फिर जीते। 1999 चुनाव में चेतन चौहान हारे। 2004 में जनता ने निर्दलीय हरीश नागपाल को जिता दिया। 2009 में रालोद के देवेंद्र नागपाल का सांसद बना दिया। पिछले चुनाव में अमरोहा ने फिर सांसद बदलते हुए भाजपा को जिता दिया।
मुजफ्फरनगर : कभी सीपीआई का गढ़ रहे इस सीट पर 1989 के बाद हुए तीन चुनाव तो भाजपा जीती। इसके बाद हर बार नया दल जीता। 1999 में कांग्रेस के सईदुजमा, फिर 2004 में सपा के चौधरी मुनव्वर हसन चुनाव जीते। इसके बाद फिर यहां जनता ने पुराने सांसद बदलते हुए बसपा के कादिर राणा को जिताया लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा के कादिर राणा को हराते हुए भाजपा के संजीव बलियान को जीत का सेहरा पहनाया। खास बात यह कि 1967 और 1971 के चुनाव में दो बार सीपीआई को जनता ने जिताया।
सहारनपुर : यहां की जनता 1998 के बाद से लगातार अपना सांसद बदल रही है। 1999 में बसपा के मंसूर अली,फिर सपा के रशीद मसूद, बसपा के जगदीश राणा के बाद फिर यहां से भाजपा के राघवलखन पाल सांसद बने।
मुरादाबाद : यहां 98 का चुनाव सपा ने जीता। अगले चुनाव में अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस को, 2004 में सपा को , 2009 में कांग्रेस को तो पिछले चुनाव में जनता ने भाजपा के कुंवर सर्वेश को संसद पहुंचाया।
मथुरा : ब्रजभूमि मथुरा की जनता ने 1991 से 99 तक चार चुनावों में लगातार भाजपा को जिताया। इसके बाद जनता ने कांग्रेस और रालोद को मौका दिया। पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी जीत गईं।
उन्नाव : यहां तीन बार भाजपा के देवीबख्श सिंह के जीतने के बाद अगले तीन चुनाव में सपा, बसपा व कांग्रेस को विजय मिली। पिछले चुनाव में भाजपा ने वापसी की। अब देखना है कि जनता को कौन सा सिलसिला बरकरार रखेगी। वहीं मछलीशहर से शिवसरन वर्मा के तीन बार जीतने के बाद यहां 96 में भाजपा के रामविलास वेदांती जीते तो अगले चुनाव में भाजपा से चिन्मयानंद जीत गये।
बाराबंकी : यहां के संसदीय इतिहास में पहले के दो चुनाव तो निर्दलीयों ने जीते। इसके बाद कोई भी पार्टी लगातार दो बार नहीं जीती। यहां से रामसागर रावत लगातार तीन बार अलग अलग पार्टी से जीते। 1991 में यहां से जनता पार्टी, सपा, भाजपा,सपा, बसपा, कांग्रेस होते हुए पिछले चुनाव में भाजपा ने बाजी मारी।
हमीरपुर : यहां पिछले पांच चुनावों को देखें तो 98 में भाजपा,इसके बाद बसपा, फिर सपा फिर बसपा को मौका मिलने के बाद पिछली बार भाजपा जीती और बहराइच में 1998 में बसपा जीती तो अगली बार भाजपा विजयी रही। फिर कांग्रेस जीती तो अगले चुनाव में सपा को मौका मिला। पिछले चुनाव में भाजपा की वापसी हुई।