हिंदू लड़की से धर्म बदलकर की थी मुस्लिम लड़के ने शादी, परिवार ने कहा- ये लव जिहाद

छत्तीसगढ़ में हिन्दू मुस्लिम प्रेमी जोड़े की शादी को लेकर जारी विवाद का पटाक्षेप होने के बाद लड़की के परिजनों ने इस घटना को लव जिहाद करार दिया है. उनके मुताबिक मुस्लिम युवक इब्राहिम ने बहला-फुसलाकर उनकी लड़की से शादी की थी. दरअसल धमतरी जिले के रहने वाली 22 वर्षीय हिन्दू लड़की अंजलि और 26 वर्षीय  इब्राहिम ने इसी साल फ़रवरी में रायपुर के एक आर्य समाज मंदिर में शादी की थी.हिंदू लड़की से धर्म बदलकर की थी मुस्लिम लड़के से शादी, परिवार ने कहा- ये लव जिहाद

बता दें कि शादी से पहले मुस्लिम धर्म से हिन्दू धर्म अपनाकर इब्राहिम से आर्यन आर्य बना, लेकिन मामले की हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इब्राहिम की याचिका को खारिज कर दिया.

अपनी याचिका में इब्राहिम ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी पत्नी की वापसी की मांग की थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अंजलि के पक्ष में फैसला सुनाया है, लेकिन मामला अभी भी विवादित है.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अंजलि पेश हुई और कहा कि इब्राहिम ने उससे बहला-फुसलाकर शादी की थी. अंजलि ने अदालत को यह भी बताया कि उसके माता-पिता और परिजनों ने उसकी आजादी पर कोई रोक नहीं लगाई है और न ही उसे जोर जबरदस्ती कर अपने कब्जे में लिया है. अंजलि के बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इब्राहिम की याचिका खारिज कर दी. इस फैसले के बाद अंजलि के परिजनों ने ने लव जिहाद की बात कही है.

वहीं, इब्राहिम के वकील साजिद खान के मुताबिक यह पूरा मामला आपसी प्रेम का है. दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे और बालिग भी थे. लिहाजा उन्होंने सोच-समझकर शादी की.

साजिद खान के मुताबिक अंजलि ने ऐसा विरोधाभासी बयान अदालत में क्यों दिया, इसकी असलियत वो जानें, लेकिन वैधानिक रूप से दोनों अभी भी पति-पत्नी है. उन्होंने बताया कि अदालत में किसी भी पक्ष ने आर्य समाज में हुई शादी पर कोई आपत्ति नहीं की है. अब वे अपने मुवक्किल की राय लेने के बाद इसे परिवार न्यायालय में ले जाएंगे.

दरअसल मामले में तलाक की मंजूरी इसलिए होना अभी बाकी हैं क्योंकि दोनों ही पक्ष ने इस शादी की वैधानिकता पर कोई सवाल अदालत में खड़ा नहीं किया. जाहिर है अब क़ानूनी दांवपेचों के आधार पर तलाक पर मामले की अगली सुनवाई फैमिली कोर्ट में होगी.

इब्राहिम के मुताबिक अंजलि के परिजन गैर हिन्दू लड़के से उसकी शादी के लिए तैयार नहीं थे. इसलिए उसने अपने मुस्लिम धर्म का त्याग कर हिन्दू धर्म अपनाया था. धर्म बदलने और नए नामकरण की क़ानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इब्राहिम का नया नाम आर्यन आर्य हो चुका था.

इस नए नाम के साथ आर्यन आर्य और अंजलि ने रायपुर के आर्य समाज मंदिर में शादी की. इसके बाद दोनों सामान्य जीवन जी रहे थे.

इब्राहिम के मुताबिक कुछ दिनों बाद विवाह की भनक उसके ससुराल पक्ष को लगी. बाद एक दिन उसकी पत्नी अंजलि अपने माता पिता से मिलने अपने घर गई और फिर वापस नहीं लौटी.

इब्राहिम ने अपनी पत्नी के इंतजार में कई दिन काटे, लेकिन जब वो वापस नहीं लौटी तो उसने बिलासपुर हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. इस पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया था. जिसके मुताबिक, अंजलि को एक सरकारी हॉस्टल में 15 दिनों तक रुककर रहने और इस अवधि में यह फैसला लेने का निर्देश दिया था कि वो आखिर पति या अपने परिजनों में से किसके साथ रहना चाहती है.

आर्यन आर्य ने सुप्रीम कोर्ट में बिलासपुर हाईकोर्ट के 30 जुलाई के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया था कि अदालत ने पत्नी अंजलि को अपने पति के साथ रहने से रोका है.

इस याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में हादिया केस में हुए फैसले का पालन नहीं किया है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंजलि के बयानों के बाद उसके पक्ष में फैसला सुनाया है. जिसमें इब्राहिम की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ही खारिज कर दी.