होली बाद काम पर लौटना होगा मुश्किल, फ्लाइट सात गुना महंगी, ट्रेनों में वेटिंग 400 पार

- in लखनऊ

लखनऊ : दिल्ली व मुम्बई में नौकरी करते हैं और लखनऊ में होली मनाने के बाद वापसी की योजना बना रहे हैं तो जान लीजिए कि विमान से लखनऊ से दिल्ली वापसी के टिकट सात गुना तक महंगे हो गए हैं। वहीं, मुम्बई की फ्लाइटों के लिए दोगुना किराये तक देना पड़ेगा। ऐसे हजारों लोग हैं, जो जॉब के सिलसिले में लखनऊ से बाहर रहते हैं। चूंकि, होली 21 मार्च को है और उसके आगे व पीछे आपको छुट्टियां नहीं मिल रही हैं। ऐसे में फ्लाइट से लखनऊ आना जहां दोगुने से अधिक महंगा हो गया है। ऐसे में वापसी आसान न होना तय है। लखनऊ से दिल्ली का किराया सात गुना यानी चौदह हजार रुपये तक पहुंच गया है। सामान्य किराया दो हजार रुपये तक ही है। वहीं, लखनऊ से मुम्बई का टिकट औसतन दस हजार रुपये तक पहुंच गया है, जोकि पांच हजार रुपये के आसपास रहता है। यह स्थिति होली के बाद 23, 24 व 25 मार्च को देखने को मिल रही है। होली मनाने के बाद दिल्ली व मुम्बई लौटना आसान नहीं होगा। ट्रेनों में सीटों की मारामारी शुरू हो गई है। दिल्ली जाने वाली एसी एक्सप्रेस की वेटिंग जहां 400 पार पहुंच गई है, वहीं मुंबई की वीआईपी ट्रेन पुष्पक एक्सप्रेस में इसका आंकड़ा 347 तक पहुंच गया है। ऐसे में यात्रियों के पास तत्काल सीटों का ही सहारा है, लेकिन वहां भी मारामारी देखने को मिल रही है। 21 मार्च को होली है। राजधानी के हजारों लोग दिल्ली व मुंबई में रोजगार करते हैं, जो परिवारीजनों के साथ त्यौहार मनाने के लिए 20 मार्च से पहले ही शहर आ जाएंगे। इनकी वापसी का सिलसिला 23 मार्च से शुरू होगा। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग है। ऐसे में 23 से 25 मार्च तक वापसी वालों का रेला चारबाग, लखनऊ जंक्शन सहित अन्य स्टेशनों पर उमड़ेगा। इन यात्रियों के लिए सीटों की किल्लत के पीछे एक वजह यह भी है कि कोहरे के नाम पर निरस्त की गईं करीब 40 ट्रेनों को फरवरी में बहाल किया जाना था, पर रेलवे ने इनका निरस्तीकरण 31 मार्च तक बढ़ा दिया है। ऐसे में यात्रियों के पास त्यौहार बाद वापसी को तत्काल व स्पेशल ट्रेनों का ही सहारा है। रेगुलर ट्रेनों में बंपर वेटिंग शुरू हो गई है और स्पेशल ट्रेनों में भी सीटें तेजी से भर रही हैं। ऐसे में यात्रियों को सिर्फ तत्काल सीटों का ही भरोसा है। विभिन्न ट्रेनों में तत्काल की करीब पांच हजार सीटें हैं, जिनके लिए आरक्षण केंद्रों पर भीड़ उमडऩे लगी है। वहीं, दलाल भी सक्रिय हैं।