अन्तर्राष्ट्रीय

इसरो के झूठे जासूसी मामले में तीन साल जेल में बिताने पर मालदीव की नागरिक ने मांगा मुआवजा

मालदीव की रहने वाली फौजिया हसन (76) को इसरो के झूठे जासूसी मामले में तीन साल केरल की जेल में बिताने पड़े थे। अब उन्होंने भारत से मांग की है कि उनके आवेदन करने का इंतजार न किया जाए और उन्हें मुआवजा दिया जाए।इसरो के झूठे जासूसी मामले में तीन साल जेल में बिताने पर मालदीव की नागरिक ने मांगा मुआवजा

एक मीडिया वेबसाइट से बात करते हुए हसन ने कहा कि वह दरिद्रता में रह रही थीं और अब उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह मुआवजे के लिए वकील करें। उन्होंने कहा, ‘मेरे आवेदन का इंतजार किए बिना भारत सरकार और केरल की सरकार को अवैध हिरासत और यातना के लिए मुझे मुआवजा देना चाहिए।’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हसन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत सरकार ने उनकी बेटी जिला हमदी की शिक्षा और भविष्य को बर्बाद कर दिया था, जो भारत में ही छात्रा थी। उसकी शिक्षा भी बंद हो गई क्योंकि पुलिस उसका पीछा करती थी। उसे भी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय जेल में बिना किसी गलती के शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके बदले में वह मुआवजा चाहती हैं। वह इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण के लिए बहुत खुश हैं जिन्होंने इंसाफ के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और नारायण को 50 लाख रुपये का मुआवजा मिला।

भारत आने में लगता है डर
हसन ने आगे कहा कि अब उन्हें भारत आने में डर लगता है कि कहीं केरल पुलिस और खुफिया एजेंसी उन्हें दोबारा परेशान न करें। उन्होंने कहा, ‘मैंने वही बयान दिया जो मुझे अधिकारियों ने देने को कहा। अधिकारियों ने अपनी पहचान बताने से मना किया था। उन्होंने मेरी बेटी को भी गिरफ्तार करने और मेरे सामने उसका रेप करने की धमकी दी थी। एक मां होते हुए, मैं अपनी बेटी को बचाना चाहती थी। मैंने उनसे कहा कि उसे हाथ न लगाएं और मैं बयान देने के लिए मान गई। किसी ने हिरासत के दौरान मेरा यौन शोषण तो नहीं किया लेकिन मारपीट बहुत की।’ हसन इस वक्त श्रीलंका में अपने पोते पोतियों के साथ समय बिता रही हैं। वह हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव के मतदान के लिए मालदीव आई थीं।

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