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काबू में नहीं पेट्रोल-डीजल के दाम, शिवसेना ने पूछा- क्या यही हैं अच्छे दिन ?

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रविवार को तेल की कीमतें एक बार फिर गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 12 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डीजल की कीमतें 10 पैसे बढ़ी हैं। दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि शनिवार को यह 80.38 रुपये प्रति लीटर था।

काबू में नहीं पेट्रोल-डीजल के दाम, शिवसेना ने पूछा- क्या यही हैं अच्छे दिन ?

वहीं, दिल्ली में डीजल की कीमत अब 72.61 रुपये प्रति हो गई है, जबकि शनिवार को यह 72.51 रुपये प्रति लीटर था। दिल्ली में पहली बार पेट्रोल की कीमत 80 के पार पहुंच गई है। मुंबई में भी पेट्रोल की कीमतों में 12 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डीजल की कीमत 11 पैसे बढ़ी है। मुंबई में अब पेट्रोल की कीमत 87.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 77.09 रुपये प्रति लीटर है।

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ मुंबई में शिवसेना प्रदर्शन कर रही है। शहर में जगह-जगह पोस्टर भी लगाए गए हैं, जिसपर लिखा हुआ है, ‘यही हैं अच्छे दिन’। साथ ही पोस्टर में 2015 से लेकर 2018 के बीच पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में कितनी बढ़ोतरी हुई है, यह भी दिखाया गया है।

बता दें कि दिल्ली में जनवरी महीने से पेट्रोल की कीमतों में 10.53 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। 1 जनवरी को पेट्रोल की कीमत 69.97 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब 80.50 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी और बढ़ने वाली हैं। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण डॉलर की मुकाबले रुपये का गिरना है। चूंकि रुपये में लगातार गिरावट आ रही है, इसकी वजह से तेल कंपनियां भी लगातार कीमतों में बदलाव कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि तेल कंपनियों को कीमतों का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें अपना मार्जिन पूरा करने के लिए तेल की कीमतों में इजाफा करना पड़ रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी शनिवार को कहा था कि देश में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट है।

तेल के दामों में बढ़ोतरी के ये भी कारण

देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अभी भी 39.21 रुपये प्रति लीटर की दर से डीलर को पेट्रोल देती है, लेकिन बाजार में आकर इसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स, जो इसकी कीमत को लगभग दोगुना कर देते हैं। भारतीय रुपयों के हिसाब से देखा जाए तो पड़ोसी देशों में तेल की कीमतें भारत से कहीं कम हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल 57.83 रुपये, श्रीलंका में 64.12 रुपये, नेपाल में 68.30 रुपये और बांग्लादेश में पेट्रोल 73.06 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

कितना देना पड़ता है टैक्स

सामान्य पेट्रोल की अगर बात करें तो इसपर 19.48 रुपये का उत्पाद शुल्क चुकाना पड़ता है, जबकि ब्रांडेड पेट्रोल पर यह शुल्क 20.66 रुपये है। वहीं, सामान्य हाई स्पीड डीजल पर 15.33 रुपये और ब्रांडेड डीजल पर 17.69 रुपये का उत्पाद शुल्क चुकाना पड़ता है।

इसके अलावा राज्यों में अलग-अलग वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) भी लगते हैं, जो तेल की कीमतों को बढ़ा देते हैं। महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में सरकार पेट्रोल और डीजल पर सबसे ज्यादा क्रमश: 39.12 फीसदी और 24.78 फीसदी वैट लगाती है। वहीं, पंजाब में 35.12 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 35.77 फीसदी और मध्य प्रदेश में 35.78 फीसदी वैट देना पड़ता है।

वहीं, डीलरों को तेल कंपनियों को कमीशन भी देना पड़ता है। ये कमीशन पेट्रोल पंप के लोकेशन के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। पेट्रोल पर 3 से 3.65 रुपये तक का कमीशन लगता है और डीजल पर 2 से 2.62 रुपये तक का कमीशन देना पड़ता है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के खिलाफ 10 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। इसमें कांग्रेस को कई राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त है, जिसमें लालू यादव की राजद और डीएमके प्रमुख पार्टियां हैं।

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