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गोमती नगर रिवर फ्रंट घोटाला : शिवपाल यादव की भी हो सकती है जांच



लखनऊ : उत्तर प्रदेश के चर्चित गोमती रिवर फ्रंट घाेटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की टीमें यूपी समेत चार राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। मामले में लखनऊ में दो जगह गोमतीनगर और राजाजीपुरम में छापेमारी चल रही है। ईडी को उन अकूत संपत्तियों की तलाश है, जो मामले में आरोपी इंजीनियरों ने जुटाई है। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी सरकार में शुरू हुए रिवर फ्रंट प्रॉजेक्ट की जांच की आंच तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव और सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव सहित कई बड़ों तक पहुंच सकती है।यह भी कहा जा रहा है कि जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनसे आरोपी सिंचाई विभाग के आठों इंजीनियरों, निर्माण से जुड़ी सभी कंपनियों और अधिकारियों के घोटाले से जुड़े होने की कड़ियां मिल रही हैं, इसके अलावा गलत तरीके से टेंडर देने और कमीशन के चक्कर में प्रोजेक्ट की लागत बढ़ाने की जानकारी भी मिली है। घोटाले के तार कई बड़ों तक पहुंचने की भी संभावना है। गौरतलब है कि जिस समय रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट का कार्य शुरू हुआ उस समय शिवपाल सिंह यादव के पास सिंचाई मंत्री का भी प्रभार था, उनके करीबी अधिकारी और कई एजेंसियां भी सीबीआई और ईडी के रडार पर हैं। दरअसल, योगी सरकार के सत्ता में आने के फौरन बाद पूर्व की सपा सरकार के महात्वाकांक्षी प्रोजैक्ट गोमती रिवर फ्रंट में घोटाले का आरोप लगा और जांच के आदेश दिए गए। आरोप लगा कि दरअसल, 1513 करोड़ की परियोजना में 1437 करोड़ रूपया खर्च होने के बावजूद भी काम 65 फीसदी ही पूरा किया गया। यही नहीं परियोजना की 95 फीसदी रकम निकाल ली गई। मामले में योगी सरकार ने मई 2017 में रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से जांच कराई। जांच रिपोर्ट में कई खामियां उजागर हुईं, इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार ने सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र भेज दिया। इस मामले में 19 जून 2017 को गौतमपल्ली थाना में 8 के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया। इसके बाद नवंबर 2017 में भी ईओडब्ल्यू ने भी जांच शुरू कर दी। दिसंबर 2017 मामले की जांच सीबीआई चली गई और सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। यही नहीं मामले में दिसंबर 2017 में ही आईआईटी की टेक्निकल जांच भी की गई। इसके बाद सीबीआई जांच का आधार बनाते हुए मामले में ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया।

गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य से जुड़ें इंजीनियरों पर दागी कम्पनियों को काम देने, विदेशों से मंहगा सामान खरीदने, चैनलाइजेशन के काम में घोटाला करने, नेताओं और अधिकारियों के विदेश दौरे में फिजूलखर्ची करने सहित वित्तीय लेन देन में घोटाला करने और नक्शे के अनुसार कार्य नहीं कराने का आरोप है। इस मामले में 8 इजीनियरों के खिलाफ पुलिस, सीबीआई और ईडी मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है। इनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर गोलेश चन्द्र गर्ग, एसएन शर्मा, काजिम अली, शिवमंगल सिंह, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव, सुरेन्द्र यादव शामिल हैं. यह सभी सिंचाई विभाग के इंजीनियर हैं, जिन पर जांच चल रही है। उधर, मामले में ईडी इंजीनियरों द्वारा काली कमाई से जुटाई गई संपत्तियों की जांच कर रहा है। ईडी अधीक्षण अभियन्ता शिवमंगल सिंह यादव, इंजीनियर अखिल रमन और गोलेश चन्द्र गर्ग से पूछताछ कर चुकी है। इन इंजीनियरों द्वारा अपनी संपत्तियों का ब्योरा देने में आनाकानी करने पर ई़डी के असिस्टेन्ट डायरेक्टर सुनील कुमार ने आईजी स्टाप से शिवमंगल सिंह और गोलेश चन्द्र के अचल संपत्तियों को सभी 75 जिलों का ब्यौरा मांगा था। इसके अलावा ईडी ने गोलेश की पत्नी मधुबाला गर्ग, पुत्र तनुज गर्ग के साथ पुत्र वधु स्वाति तनुज गर्ग के घर, फ्लैट, कामर्शियल लैंड और अन्य जमीनों का ब्यौरा आईजी स्टाम्प से मांगा था. जिसके बाद आईजी स्टाम्प सीताराम यादव ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के एआईजी स्टाम्प से आरोपी इंजीनियर और उनके परिजनों की संपत्तियों का ब्योरा तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर किया था।

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