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भाजपा को वोट नहीं देते मुसलमान : रविशंकर प्रसाद


नई दिल्ली : एक सवाल का जवाब देते हुए केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को दिल में रखकर काम करती है। तो फिर जनता की चुनी हुई बीजेपी सरकार के 282 लोकसभा सांसदों में से एक भी सांसद मुस्लिम क्यों नहीं है? इस पर रविशंकर प्रसाद ने माना कि भाजपा को मुसलमानों के ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। देश में मुसलमानों की आबादी अगर तक़रीबन 20 करोड़ है तो फिर उनकी अनदेखी की वजह क्या है? इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, भले ही मुसलमानों ने उन्हें वोट ना किया हो, लेकिन उनकी सरकार हमेशा मुसलमानों के विकास के लिए काम करती रही है।

क़ानून मंत्री का दावा है कि उनकी पार्टी के खिलाफ चलाए गए तीख़े अभियानों की वजह से ही मुसलमान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देते।रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनता के ज़ोरदार समर्थन से केंद्र की सत्ता में आई बीजेपी ने चार राज्यों को छोड़ अब तक सारे चुनाव जीते हैं। उन्होंने कहा कि हमें ये सब दान में नहीं मिला, बल्कि हमने जनता के प्यार और साथ से ही सब कुछ हासिल किया है। रविशंकर प्रसाद का दावा है कि उनकी सरकार के विकास की वजह से ही जनता ने उन्हें हर बार जिताया है, उन्होंने अपनी सरकार की चलाई कई योजनाएं भी गिनाईं। लेकिन हाल में हुए कर्नाटक चुनावों में भाजपा के एक नेता का बयान उनके इन दावों पर सवाल खड़े करता है, एक चुनावी सभा में बीजेपी नेता संजय पाटिल ने कहा था कि इस चुनाव के मुद्दे सड़क, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है बल्कि ये चुनाव हिंदू बनाम मुस्लिम है। इस सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति के बयान को पूरी पार्टी की विचारधारा बताना सही नहीं है। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि हमारी सरकार विकास करने आई है और लोगों का वोट भी विकास के नाम पर ही मिला है।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार गौहत्या और बीफ रखने के शक में अप्रैल 2017 से अब तक कम से कम 10 मुसलमानों को भीड़ ने पीटकर मार डाला है। मनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार इनमें से कई मामलों में बीजेपी के गौरक्षा के अभियान से प्रोत्साहित गौ रक्षकों का हाथ था। इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के मानवाधिकार सम्बन्धी मामलों में एमनेस्टी इंटरनेशनल का रुख हमेशा भेदभाव पूर्ण रहा है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कश्मीर की आज़ाद आवाज़ और राइज़िंग कश्मीर अख़बार के संपादक शुजात बुख़ारी की हत्या के मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल चुप रहा, वो इसलिए चुप रहा क्योंकि बुख़ारी की हत्या चरमपंथियों ने की थी। भारतीय सेना के एक बहादुर जवान औरंगज़ेब की ईद के ठीक पहले चरमपंथियों ने हत्या कर दी, तब भी एमनेस्टी इंटरनेशनल चुप रहा। एमनेस्टी इंटरनेशनल चरमपंथ से पीड़ित भारतीयों के मानवाधिकारों को लेकर चुप्पी साध लेता है, ये भेदभाव-पूर्ण रवैया जगज़ाहिर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कथित हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा अंजाम दिए गए सांप्रदायिक हमलों पर बोलने से बचते हैं। इस संबंध में किए गए स्टीफ़न के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री चुप नहीं है और वह एक जनसभा में ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए बोल चुके हैं कि उन्हें मत मारो, हिम्मत है तो मुझ पर हमला करो। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामलों में हमलावरों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है, लेकिन उम्रक़ैद की सज़ा तो सिर्फ एक मामले में सुनाई गई है, लेकिन ज़्यादातर मामलों में पीड़ितों के परिवार को इंसाफ कब मिलेगा? इसके जवाब में क़ानून मंत्री ने कहा कि सारे मामले कोर्ट में हैं और मामले की निष्पक्ष जांच करने के बाद ही फैसला सुनाया जाएगा। लेकिन भारत की न्याय व्यवस्था इतनी धीमी है कि पीड़ितों को इंसाफ मिलने में ज़माना लग जाता है, सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट में ही 55 हजार मामले लंबित हैं। निचली अदालतों में तो लंबित मुकदमों की संख्या करोड़ों में है। लचर न्याय व्यवस्था की वजह ये है कि भारत में 10 लाख लोगों पर सिर्फ एक जज है, देश की तमाम जेलों में बंद करीब दो तिहाई अभियुक्त अपने मुकदमे की बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। हाल ही में उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ जस्टिस ने चीफ जस्टिस पर अविश्वास जताया था और कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट को बचाया नहीं गया, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। रविशंकर प्रसाद ने कहा की वह इस बात को मानते हैं कि देश की कानून व्यवस्था की हालत लचर है और इसे ठीक करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह डिजिटल तकनीक की मदद से देश की न्याय व्यवस्था को गति देने की कोशिश कर रहे हैं। कानून मंत्री का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और 16 हज़ार ज़िला अदालतों के कामकाज को डिजिटल कर दिया गया है। हमने जजों की संख्या बढ़ाई है, कोर्ट में बेहतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई हैं, कोर्ट हॉल की संख्या बढ़ाई है।

कानून मंत्री देश की सुस्त कानून व्यवस्था को ठीक करने की बात तो करते हैं, लेकिन इस इंटरव्यू के दौरान वो व्यवस्था में भ्रष्टाचार की ख़बरों को टालते नज़र आते हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा, मैं पूरे देश की क़ानून-व्यवस्था को काबू में नहीं कर सकता, उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय राज्य है और क़ानून-व्यवस्था सही रखना राज्य सरकारों का काम है।रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वो सिर्फ़ ये कर सकते हैं कि राज्यों को मूलभूत सुविधाएं दे सकते हैं, उन्हें प्रशिक्षण दे सकते हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने ख़ुद राज्यों की पुलिस को उनके सामने पेश आ रही चुनौतियों निपटने का तरीका बताया है। हाल ही में 550 विशेषज्ञों के साथ किए गए एक ग्लोबल सर्वे में कहा गया कि भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है। रविशंकर प्रसाद ने कहा, दुनिया में सिर्फ 550 लोगों से बात कर ये बता देना कि कौन-सा देश ख़तरनाक है और कौन-सा नहीं, ऐसा सर्वे कभी भी सटीक नहीं हो सकता। हाल ही में उत्तर भारत के कश्मीर में आठ साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार की ख़बर आई थी, पुलिस के मुताबिक़ बच्ची को नशीली दवाएं देकर बार-बार रेप किया गया, बच्ची को मारने से कुछ वक्त पहले तक एक मंदिर में रखा गया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मामले में तुरंत जांच कर चार्जशीट दाख़िल की गई थी और उन बीजेपी नेताओं को अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। उन्होंने कहा वो इस मामले पर और कुछ टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन ये ज़रूर कह सकते हैं कि बलात्कार के मामले में उनकी सरकार ने कानूनों को और कड़ा किया है। उन्होंने बताया कि अब अगर कोई 12 साल के कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करता है तो उसे फांसी की सज़ा दी जाएगी और अगर बच्ची की उम्र 12 से 16 साल के बीच है तो 20 साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

हाल ही में कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर सवाल उठाए थे, यूएन ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया, जिसके चलते कई लोगों की मौतें हुई और बहुत से लोग घायल हुए। कानून मंत्री ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज किया और कहा कि ये रिपोर्ट बदनीयती से तैयार की गई थी, उनका आरोप है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले शख़्स का भारत के खिलाफ कोई एजेंडा था। उन्होंने बताया कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सामने भी इस रिपोर्ट का विरोध कर चुका है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कश्मीर का युवा आज भारतीय सुरक्षाबल में भर्ती हो रहा है और खेल में दिलचस्पी ले रहा है, उनका आरोप है कि पाकिस्तान यहां का माहौल ख़राब करने के लिए एक एजेंडे के तहत काम कर रहा है। कुछ वक्त पहले 49 सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी को खुला पत्र लिखा और उन पर डर और नफ़रत का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया। सेवानिवृत्त अधिकारियों के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इनमें से 90 फासदी ने 2014 के आम चुनाव में जनता से नरेंद्र मोदी को वोट न करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि देश में 200 से ज़्यादा ऐसे सिविल सेवा अधिकारी मौजूद हैं जो मोदी सरकार की नीतियों में भरोसा करते हैं और उन्हें सराहते हैं।

कई सर्वे बताते हैं कि देश कि जनता का भरोसा मोदी सरकार में कम हुआ है, किसानों समेत आम जनता का मानना है कि 2014 में किए वादे नरेंद्र मोदी ने पूरे नहीं किए। सरकार दावा करती है कि बीते सालों में भ्रष्टाचार की कमर टूटी है, लेकिन कई सर्वों में सामने आया है कि अब भी देश में हर स्तर पर भ्रष्टाचार है। रविशंकर प्रसाद ने इन सब तथ्यों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार कुछ करती है तो इसके लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरोप नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने आने के बाद डिजिटल तकनीक के ज़रिए भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश की।

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