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रात तक घोषित किये जायेंगे विधानसभा चुनाव परिणाम

इस बार विधानसभा चुनावों के नतीजे आने में कुछ देरी हो सकती है। हालांकि, मीडिया के कुछ हिस्सों में नतीजों के रात तक खिंचने की जो बात कही जा रही है, वो सही नहीं लगती।

रात तक घोषित किये जायेंगे विधानसभा चुनाव परिणाम  इस बार देरी की बात क्यों?

दरअसल, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से गुजारिश की थी कि मतगणना के हर राउंड के बाद नतीजों की जानकारी लिखित में दी जाए। उसके बाद जब उम्मीदवार पक्ष की ओर से उस पर हामी भर दी जाए तभी दूसरे राउंड की गिनती शुरू की जाए। इससे हर राउंड की गिनती और फिर घोषणा में 40-45 मिनट का वक्त लग सकता है। 16 से 20 राउंड की गिनती होगी। ऐसे में माना जा रहा है कि जो बड़ी तस्वीर दोपहर 1 बजे तक दिखनी शुरू हो जाती है, उसमें ढाई से तीन घंटे की देरी हो सकती है।

क्या इस सिस्टम में कुछ नया है?

सीधा जवाब है-नहीं। अगर 7 दिसंबर को जारी, चुनाव आयोग के निर्देश को गौर से पढ़ा जाए तो उसमें साफ लिखा है कि 30 अप्रैल 2014 के पुराने आदेश से ही पैराग्राफ 10.5 और पैराग्राफ 10.6 को दोहराया जा रहा है। जिसके मुताबिक:

10.5- हर राउंड के बाद ऑब्जर्वर और रिटर्निंग अफसर, प्रत्याशी-वार नतीजों पर दस्तखत करेंगे और उन्हें ब्लैकबोर्ड/व्हाइटबोर्ड पर तुरंत लिखना होगा। पब्लिक एड्रेस सिस्टम से भी इसकी घोषणा की जाएगी। हर राउंड के नतीजे, उम्मीदवार पक्ष के साथ साझा किए जाएंगे। प्रिंट आउट की एक कॉपी मीडिया को भी दी जाएगी।

10.6- दूसरे राउंड की मतगणना तभी शुरू हो जब पिछले राउंड की सारी टेबल पर गिनती खत्म हो चुकी हो और उसके नतीजे ब्लैकबोर्ड या व्हाइटबोर्ड पर लिख दिए गए हों।

तो इस बार फर्क कैसे पड़ेगा?

दरअसल, ये आदेश तो पुराना है लेकिन इस बार माना जा रहा है कि कांग्रेस इसको लेकर काफी सख्ती से पेश आने वाली है। यानी, पहले होता ये था कि एक राउंड का कागज, संबंधित पक्षों को थमाने के साथ ही दूसरे राउंड की गिनती की ओर अधिकारी बढ़ जाते थे। लेकिन अब, जब तक पहले राउंड की हर औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती, संबंधित पक्षों की हामी नहीं भर ली जाती, अगले राउंड की गिनती शुरू नहीं हो पाएगी। जब तक ये सब चल रहा होगा, तब तक मतगणना अधिकारी खाली बैठे रहेंगे। ये प्रक्रिया निपटने के बाद ही, अगले राउंड की ईवीएम टेबल पर लाई जाएंगी। यही वजह है कि एक राउंड से दूसरे राउंड के बीच की इस देरी को मिलाकर नतीजों के अंतिम समय में कुछ फर्क आना स्वाभाविक है।

मध्य प्रदेश विधानसभा
कुल सीटें- 230
उम्मीदवार- 2899

राजस्थान विधानसभा
कुल सीटें- 199
उम्मीदवार-  2,274

तेलंगाना विधानसभा
कुल सीटें- 119
उम्मीदवार- 1821

मिजोरम विधानसभा
कुल सीटें- 40
उम्मीदवार-  209

छत्तीसगढ़ विधानसभा
कुल सीटें- 90
उम्मीदवार- 1101

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