6 साल में 114 प्रतिशत बढ़े ओरल कैंसर के मामले

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मुम्बई : इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन ऐंड रिसर्च ने डेटा जारी किया उसके मुताबिक साल 2012 में जहां कैंसर से जुड़े मामले 10 लाख के आसपास थे वहीं, साल 2018 में कैंसर के केस बढ़कर 11.5 लाख हो गए। मुंबई के परेल स्थित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के एक्सपर्ट्स की मानें तो बढ़ती आबादी और डायग्नोस्टिक टेक्नीक में आयी बेहतरी के बाद कैंसर के मामलों में हुआ ये इजाफा बहुत ज्यादा नहीं है। हालांकि नए डेटा के मुताबिक कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या में भी 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साल 2012 में जहां कैंसर से जुड़ी मौतों की संख्या 7 लाख थी वहीं, साल 2018 में यह बढ़कर 7 लाख 80 हजार हो गयी। पहले इरफान खान और अब सोनाली बेंद्रे। ये घटनाएं बताती हैं कि कैंसर दुनिया में कितनी तेजी से फैल रहा है। देश में हर साल 14.5 लाख कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। लेकिन लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव, समय पर जांच और सही इलाज से कैंसर पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। पुरुषों में कैंसर के करीब 60 फीसदी मामले मुंह और गले के कैंसर के होते हैं और इसके बाद आता है फेफड़ों का कैंसर। इन तीनों ही कैंसर की सबसे बड़ी वजह तंबाकू है। कैंसर के कुल 40 फीसदी मामले तंबाकू की वजह से होते हैं, फिर चाहे पीनेवाला तंबाकू (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का आदि) हो या फिर खाने वाला (गुटखा, पान मसाला आदि)। अगर आप खुद बीड़ी-सिगरेट नहीं पीते, लेकिन आपके आसपास कोई पीता है तो भी आपको उसके धुएं से खतरा है। स्मोकिंग से फेफड़े, गले, प्रोस्टेट, किडनी, ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर के आसार बढ़ जाते हैं। ज्यादा शराब पीना भी खतरनाक है। रोज दो से ज्यादा पेग लेने से मुंह, खाने की नली, गले, लिवर और ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

ऐल्कॉहॉल और साथ में तंबाकू का सेवन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए बीड़ी/सिगरेट के साथ शराब भी पीने वालों के लिए कैंसर का खतरा काफी ज्यादा होता है। कोई भी शख्स दिन भर में एक पेग से ज्यादा न लें। शहरों में बढ़ता प्रदूषण भी शरीर को वही नुकसान पहुंचा रहा है, जैसा बीड़ी-सिगरेट का धुआं पहुंचाता है। हवा में तय से मात्रा से ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन और लेड जैसी चीजें मौजूद हैं जो हमारे शरीर में कैंसर पैदा करने वाले केमिकल बना रही हैं। ये हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए खतरनाक है और आगे जाकर फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं। प्रदूषण से बचने के लिए सर्दियों में सुबह ज्यादा स्मॉग के वक्त बाहर न निकलें। अगर निकलना ही पड़े तो मास्क लगा कर निकलें। मास्क ऐसा हो, जिसकी रेटिंग N95 हो और सही से फिट होता हो। अगर किसी के शरीर में फैट बढ़ जाता है तो उसका वजन बढ़ जाता है। इस फैट में मौजूद एंजाइम मेल हॉर्मोन को फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजिन में बदल देते हैं। फीमेल हॉर्मोन ज्यादा बढ़ने पर ब्लड कैंसर, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट कैंसर और स‌र्विक्स (यूटरस) कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। हाई कैलरी, प्रीजर्व्ड या जंक फूड, नॉन-वेज ज्यादा लेने से समस्या और बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए पुरुषों को अपनी कमर का घेरा 40 इंच (102 सेमी) और महिलाओं को 35 इंच (88 सेमी) तक या इससे कम रखना चाहिए। अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने माना है कि सभी तरह की प्लास्टिक एक वक्त के बाद गर्म करने पर केमिकल छोड़ने लगते हैं। बार-बार गर्म करने से प्लास्टिक कंटेनर्स के केमिकल्स टूटने शुरू हो जाते हैं और फिर ये खाने-पीने की चीजों में मिल जाते हैं। नतीजन गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने से यह कैंसर का कारण बन सकता है। खाने की चीजों को भी गर्म होने पर प्लास्टिक कंटेनर में न रखें। हेपटाइटिस बी, हेपटाइटिस सी, एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) जैसे इन्फेक्शन कैंसर की वजह बन सकते हैं। हेपटाइटिस सी के इन्फेक्शन से लिवर का कैंसर और एचपीवी से महिलाओं में सर्वाइकल और पुरुषों में मुंह का कैंसर हो सकता है। ये दोनों वायरस असुरक्षित सेक्स संबंधों से फैलते हैं। सेक्सुअल रिश्तों में सफाई और ईमानदारी बरतने से सर्वाइकल कैंसर की आशंका कम हो जाती है। वैक्सीन लगवाकर भी इन वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि की रेडियोऐक्टिव किरणें हमारे शरीर में पहुंचकर सेल्स की केमिकल गतिविधियां बढ़ा देती हैं जिससे स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगर आप अलग-अलग डॉक्टरों से इलाज कराते हैं और हर डॉक्टर अलग एक्सरे कराने के लिए कहे, तो डॉक्टर को जरूर बताएं कि आप पहले कितनी बार एक्स-रे करा चुके हैं। रेडिएशन से अगर कैंसर का इलाज होता है तो रेडिएशन से कैंसर का खतरा भी होता है। इसी तरह, बहुत ज्यादा देर तक सूरज की किरणों में लेटने-बैठने से बचें।


पैरंट्स या दादा-दादी, नाना-नानी आदि को कैंसर हुआ है तो अगली पीढ़ी को कैंसर होने के चांस करीब 10 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अगर मां या बाप को कैंसर हुआ है तो बच्चे को होगा ही। ब्रेस्ट, ओवेरियन और प्रोस्टेट जैसे कुछ कैंसर माता-पिता से बच्चों में आ सकते हैं लेकिन बेहतर लाइफस्टाइल अपनाकर 10 में से 4 कैंसर को रोका जा सकता है। जिनकी मां या नानी को सर्वाइकल कैंसर हुआ है, वे महिलाएं 25-30 साल की उम्र में टेस्ट कराएं। रोजाना कम-से-कम 30 मिनट एक्सर्साइज जरूर करें। हालांकि 45-60 मिनट एक्सर्साइज करना बेहतर है। इसमें कार्डियो एक्सर्साइज ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्विमिंग आदि को जरूर शामिल करें। बच्चों और युवाओं को हर दिन कम-से-कम 1 घंटा खेल-कूद करना चाहिए। हर हफ्ते सवा तीन घंटे दौड़ लगाने या 13 घंटे पैदल चलने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की आशंका 23 फीसदी कम होती है। लंबे समय तक बैठे-लेटे या घंटों टीवी, कंप्यूटर या फोन से चिपके रहने से परहेज करें। कैंसर से बचे रहना चाहते हैं तो खुश रहें। बाहर की दुनिया में हालात कैसे भी हों, उदास, दुखी, पीड़ित-चिंतित न हों। ऐसी मनोस्थिति अक्सर बन जाती है। ऐसे में इससे जल्दी से जल्दी बाहर आने की कोशिश करें। कुछ देर या एक-दो दिन दुखी रहने से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता। अगर यह स्थिति हफ्तों, महीनों तक खिंच जाए तो इंसान के भीतर जीने की इच्छा खत्म हो जाती है। ऐसे में शरीर ऐसे रसायन छोड़ता है जो कैंसर को जन्म दे सकते हैं। 2012 से 2018 के बीच इन 6 सालों में कैंसर से होने वाली मौत में वैसे तो सिर्फ 80 हजार की ही वृद्धि हुई है जो आपको मामूली लगे लेकिन ICMR के कैंसर सेंटर डायरेक्टर डॉ रवि मेहरोत्रा की मानें तो लिप और ओरल कैविटी कैंसर के मामलों में पिछले 6 सालों में 114 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 2012 में जहां लिप और ओरल कैविटी कैंसर के मामले 56 हजार थे वहीं 2018 में ये बढ़कर 1 लाख हो गया। इसके अलावा शहरी लाइफस्टाइल से जुड़े ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2012 में जहां ब्रेस्ट कैंसर के मामले 1.4 लाख थे वहीं 2018 में 1.6 लाख।