तीन वर्षों में विकास-पथ पर बढ़ती रही है सरकार

प्रधानमंत्री की गरीब कल्याण की नीतियों के कारण देश की गरीब जनता के मन में उनके प्रति एक प्रकार का विश्वास उद्भूत हुआ है, जिसकी अभिव्यक्ति जनादेश की कसौटी पर भी दिखाई देती है। मोदी सरकार की उपलब्धियों में नोटबंदी के निर्णय के अलावा अनेक योजनाएं भी रही हैं। इनमें जनधन योजना के जरिये लगभग पच्चीस करोड़ खातें खुलवाना, उज्ज्वला योजना के तहत निर्धारित समय में दो करोड़ गैस वितरण के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना, मुद्रा योजना के तहत दो करोड़ से अधिक के लोन बाँटना, सभी गांवों में बिजली के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करना आदि सरकार की पहलों से प्रगति के ढाँचे को विस्तार मिला है।

भूपेन्द्र यादव

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों के शासनकाल के दौरान सरकार के कदमों से देश की छवि में व्यापक रूप से बदलाव आया है। इस दौरान ये सरकार एक निर्णयकारी सरकार के रूप में उभरी है और यही कारण है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रशासकीय छवि, लोक-कल्याण को समर्पित नीतियों, मजबूत इच्छाशक्ति और सशक्त नेतृत्व की असीम क्षमता की स्वीति पूरे विश्व में देखने को मिली है। जब तीन साल पहले केंद्र में सत्ता-परिवर्तन हुआ था, तो केंद्र की पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लेकिन, तीन वर्षों के शासनकाल में श्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान सरकार ने अपने सुशासन के जरिये आम जनता के बीच यह संदेश प्रसारित करने में सफलता प्राप्त की है कि देश में एक पारदर्शी और उत्तरदायी सरकार चल रही है। इसका प्रमुख कारण है कि सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं और सरकार की छवि एकदम बेदाग रही है।
जहां तक देश को एक आर्थिक शक्ति बनाने की बात है, तो अब तक देश को एक राजनीतिक यूनियन कहा जाता था लेकिन जीएसटी कानून पारित कराकर देश को एक आर्थिक शक्ति बनाने की अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय सरकार ने दिया है। ये श्री नरेंद्र मोदी की सरकार के नेतृत्व की दृढ़ इच्छाशक्ति ही है कि वो गरीबों के हित और काले धन पर चोट करने के लिए नोटबंदी जैसा साहसिक निर्णय लेने में नहीं हिचकी। इस निर्णय पर विपक्ष ने जो दुष्प्रचार किया था कि नोटबंदी से देश की आर्थिक प्रगति रुक जाएगी, वो भी पूरी तरह से निर्मूल सिद्घ हुआ। प्रधानमंत्री की गरीब कल्याण की नीतियों के कारण देश की गरीब जनता के मन में उनके प्रति एक प्रकार का विश्वास उद्भूत हुआ है, जिसकी अभिव्यक्ति जनादेश की कसौटी पर भी दिखाई देती है। मोदी सरकार की उपलब्धियों में नोटबंदी के निर्णय के अलावा अनेक योजनाएं भी रही हैं। इनमें जनधन योजना के जरिये लगभग पच्चीस करोड़ खातें खुलवाना, उज्ज्वला योजना के तहत निर्धारित समय में दो करोड़ गैस वितरण के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना, मुद्रा योजना के तहत दो करोड़ से अधिक के लोन बाँटना, सभी गांवों में बिजली के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करना, आदि सरकार की पहलों से देश की प्रगति के ढाँचे को विस्तार मिला है।
वहीं दूसरी तरफ बैंक्रोप्सी इन्सोल्वेंसी एक्ट, माइंस एंड मिनिरल्स एक्ट, एससी-एसटी एक्ट में परिवर्तन, शत्रु संपत्ति एक्ट, बेनामी सम्पति एक्ट, जीएसटी, बैंकों के कानून में सुधार, आदि अनेकों विधायी कार्य जो लम्बे समय से प्रस्तावित पड़े हुए थे, उनपर त्वरित गति से सरकार ने विधायी कार्यवाही कर उन्हें अमलीजामा पहनाया है। इसके अलावा एक बड़ा परिवर्तन प्रधानमंत्री ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का निर्णय लेकर किया है, जिसकी मांग लम्बे समय से की जा रही थी। सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल डिजिटल अर्थव्यवस्था को ताकत प्रदान करना है। इससे देश में मनरेगा, निर्धन छात्रों को छात्रवृत्ति, वंचित वर्गों को सब्सिडी, आदि चीजों का आम लोगों तक लाभ पहुँचाने में पारदर्शिता आयी है तथा बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के द्वारा जहां कर चोरी पर अंकुश लगेगा, वहीं मध्यमवर्गीय लघु व्यापारियों को भी इससे लाभ मिलेगा। इस दिशा में मोदी सरकार द्वारा लाए गए भीम एप को एक डिजिटल क्रांति माना जा रहा है।
रक्षा नीति की बात करें तो ये देश पहली ऐसी मजबूत इच्छाशक्ति वाली सरकार है, जिसने सेना के जवानों को सर्जिकल स्ट्राइक की अनुमति दी। हमारे जवान सीमा पार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गए और आतंकी कैम्पों को ध्वस्त करके सकुशल वापस लौट आए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उक्त नीतियों और योजनाओं की सफलता का प्रमाण तीन साल के अंदर हुए ज्यादातर चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की विजय से मिल जाता है, साथ ही इस दौरान भाजपा नीत एनडीए का विस्तार भी हुआ है। अगर इन तीन सालों के दौरान देश के बजट का अध्ययन किया जाए तो ग्रामीण भारत को केंद्र में रखते हुए बजट का निर्माण हुआ है। इससे पूर्व जो बजट बनते थे, उनका निर्माण शहरी क्षेत्र को ध्यान में रखकर होता था। लेकिन, वर्तमान सरकार ने ऐतिहासिक बजट का निर्माण करते हुए न केवल ‘सबका साथ सबका विकास’ की अपनी प्रतिबद्घता को साकार करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण भारत के जीवन में परिवर्तन को भी एक आकार दिया है।
भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब जब तीन वर्ष पूरे करने जा रही है, तब हमारे विचार-प्रणेता पं़ दीन दयाल उपाध्याय का जन्मशताब्दी वर्ष भी चल रहा है। पं़ दीन दयाल उपाध्याय ने अन्त्योदय की परिकल्पना हमारे समक्ष रखी थी। तीन वर्षों के दौरान सरकार ने अपनी समस्त नीतियों और योजनाओं का आधार अन्त्योदय को ही माना है। अन्त्योदय की परिकल्पना को धरातल पर साकार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गरीब कल्याण की अपनी नीतियों और योजनाओं का लाभ ‘आधार’ के कानून के द्वारा पारदर्शी ढंग से लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गयी है। इसके जरिये गरीबों के जीवन में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ आदि योजनाओं के जरिये सरकार ने सामाजिक परिवर्तनों की दिशा में भी कदम उठाएं हैं।
हालांकि इन तीन वर्षों के दौरान विकासकार्यों की राह में सरकार को अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। विपक्ष द्वारा अक्सर संसद को बाधित किया गया, नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार का असहयोग किया गया और इससे सम्बंधित दुष्प्रचार किया गया। इस तरह की और भी परेशानियां विपक्ष ने खड़ी कीं, मगर सरकार पूरे धैर्य सहित देश के लोगों को साथ लेकर देश के विकास की राह पर सतत बढ़ती रही। कुल मिलाकर अपनी समस्त नीतियों के द्वारा सरकार द्वारा न केवल भारत के सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास करने का प्रयास किया गया है, बल्कि उस विकास में देश के सभी वर्गों को भागीदार बनने के लिए अवसर प्रदान करने का काम भी हुआ है। 
(लेखक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सांसद हैं। वर्तमान में गुजरात और बिहार में पार्टी के प्रभारी हैं। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हैं।)

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