फैसला हक में आने पर हिन्दुओं को जमीन दें मुसलमान : कल्बे सादिक

लखनऊ। अयोध्या में विवादित प्रकरण को कोर्ट के बाहर सुलझाने की उठती रही मांगों के बीच प्रसिद्ध शिया धर्म गुरू और ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक ने मुसलमानों से जमीन हिन्दुओं को देने की अपील की है। कल्बे सादिक ने मुम्बई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि बाबरी मस्जिद मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ‘अगर फैसला मुसलामानों के हक में न आए तो मुसलमान को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए, कोई प्रोटेस्ट न करें। अगर फैसला मुसलमान के हक में आ जाए तो मुसलामानों को बाबरी मस्जिद की जमीन हिन्दुओं को दे देना चाहिए।“ उन्होंने कहा कि कुछ देने से ही कुछ मिलता है और ऐसा करने से हम करोड़ों हिन्दुओं का दिल जीत लेंगे। सादिक के इस बयान को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के साथ-साथ देश में आपसी सौहार्द बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है। वह पहले भी इस तरह का बयान दे चुके हैं। वहीं उनके इस बयान की केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी बेहद तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मौलाना सादिक ने हमारा दिल जीत लिया है। भगवान राम न हिन्दू के हैं और न मुस्लिम के, वह भारत की आत्मा हैं। इस कार्यक्रम में योग गुरु बाबा रामदेव के साथ तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा भी मौजूद थे।

इससे पहले कल्बे सादिक ने हाल ही में इस मुद्दे को जटिल समस्या बताते हुए कहा था कि इसका समाधान जल्द से जल्द होना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों का आह्वान करते हुए कहा था कि जो लोग अयोध्या में मन्दिर बना रहे हैं उन्हें मन्दिर बनाने दीजिए। उन्होंने कहा मुसलमान उसके जबाव में मस्जिद नहीं बल्कि देश को बनाएं। मुस्लिम मस्जिद न बनाएं, देश को आगे की ओर बढ़ाएं।गौरतलब है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुवाद के लिए तीन महीने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले वह दो मुख्य पक्षों को चुनेगा। इससे पहले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की जगह उसे पक्षकार बनाने की मांग की जा चुकी है। हलफनामे में कहा है कि ढहाई गई बाबरी मस्जिद उसकी प्रॉपर्टी थी और अब वह मस्जिद को विवादित स्थल से दूर कहीं मुस्लिम बहुल इलाके में बनाना चाहता है, जो अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि की जगह से उचित दूरी पर हो।