बड़ी खुशखबरी: जल्द ही GST के दायरे में आ जाएगा पेट्रोल-डीजल, आधी होंगी कीमतें

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की जा रही है. महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगटीवार की मानें तो यह काम जल्द हो सकता है. उनके मुताबिक सभी राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की अनुमति दे दी है.  उनके मुताबिक अब इन उत्पादों को इसके तहत लाने के लिए हमें सही वक्त का इंतजार करना होगा. जीएसटी के दायरे में आने के बाद पेट्रोल और डीजल आपको महज 43 रुपये के भीतर मिलेगा. आगे समझिए इसका गणित।    

बड़ी खुशखबरी: जल्द ही GST के दायरे में आ जाएगा पेट्रोल-डीजल, आधी होंगी कीमतेंधर्मेंद्र प्रधान कर चुके हैं मांग

दरअसल पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान भी कह चुके हैं कि कीमतों पर काबू पाने के लिए जीएसटी से ही रास्ता निकल सकता है. उन्होंने बताया था कि जीएसटी परिषद से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर विचार करने को कहा है. अगर सरकार इस काम को कर दे, तो आम आदमी को काफी फायदा हो सकता है.

28 फीसदी जीएसटी लगने पर ये होगी कीमत

अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इस पर ज्यादा से ज्यादा 28 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है. क्योंकि जीएसटी में यही सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब है. 28 फीसदी टैक्स वसूले जाने पर एक लीटर पेट्रोल आपको दिल्ली में करीब 43 रुपये में पड़ेगा. जोकि पेट्रोल की मौजूदा कीमतों से लगभग आधा है.

खत्म हो जाएगा एक्साइज और वैट

अगर पेट्रोल जीएसटी के तहत आ जाता है, तो एक्साइज ड्यूटी और राज्यों की तरफ से लगने वाला वैट खत्म हो जाएगा. नई टैक्स नीति के तहत डीलर कमीशन जुड़ने के बाद एक लीटर पेट्रोल की कीमत 33.66 रुपए हो जाती है. इसमें 28 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर आपको 9.42 रुपये  और देने होंगे. इस तरह 1 लीटर पेट्रोल दिल्ली में आपको 43.08 रुपये में मिलेगा.

41 रुपये का मिलेगा एक लीटर डीजल

डीजल की बात करें, तो डीलर कमीशन जुड़ने के बाद यह 32.15 रुपये हो जाता है. इसमें 28 फीसदी जीएसटी जोड़ा जाए, तो 9.02 रुपये और जुड़ेगा. इस तरह 1 लीटर डीजल आपको महज 41.17 रुपये में मिलेगा.

कच्चे तेल की कीमतों का कम होगा दबाव

अगर पेट्रोल और डीजल जीएसटी के तहत आ जाएंगे, तो उनकी कीमत मौजूदा कीमतों से सीधे आधी हो जाएंगी. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में बदलाव होने पर भी आम आदमी की जेब पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा.