पूर्व राष्ट्रपति के जन्मदिन पर ‘डा. कलाम कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र’ का उद्घाटन

गरीब एवं उपेक्षित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना

दस्तक ब्यूरो

लखनऊ। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में महिला सशक्तीकरण अन्तर्गत गरीब महिलाओं, विधवाओं और समाज की उपेक्षित महिलाओं के लिए ‘‘डा. कलाम कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र’’ का उद्घाटन मुख्य अतिथि आर.डी. पाल, पूर्व लोकपाल, विद्युत विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा सोमवार, 16 अक्टूबर, 2017, प्रातः 10.00 बजे मानसी इन्स्ट्टीयूट ऑफ कम्प्यूटर एजूकेशन, निकट नाका चौराहा, रकाबगंज मार्ग, बशीरतगंज, लखनऊ में किया जायेगा। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एजूकेशन एण्ड इनोवेशन फाउण्डेशन, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की प्रेरणा से इस प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की जा रही है। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी प्रदीप कुमार सिंह शामिल होंगे। इस अभियान को प्रसिद्ध शिक्षाविद् डा. जगदीश गांधी तथा विज्ञानरत्न लक्ष्मण प्रसाद, नवाचारविद् का आशीर्वाद प्राप्त है।

वर्तमान समय में सबसे ज्यादा रोजगारपरक 8 माह का फाइनेंसियल एकाउंटिग कम्प्यूटर कोर्स ‘‘डा. कलाम कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र’’ के अन्तर्गत दिया जायेगा इसके लिए निशी थापा, शिवांगी चौरसिया, निधि तिवारी, अंकिता कश्यप, रीता, रेश्मा रस्तोगी, रिया साहु, मुस्कान मिश्रा, स्मिता शुक्ला तथा अनुराधा यादव को चयनित किया गया है। इस कोर्स की वास्तविक फीस रू. 1000/- मासिक प्रति छात्रा है। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ ने दस छात्राओं के प्रशिक्षण का रुपये 400/- प्रति छात्रा फीस वहन करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है। मानसी इन्स्ट्टीयूट रूपये 400/- प्रति छात्रा छूट देगा। अर्थात प्रत्येक छात्रा से रूपये 200/- मासिक फीस ही ली जायेगी। मानसी इन्स्ट्टीयूट ऑफ कम्प्यूटर एजूकेशन की निदेशिका मुक्ता तिवारी ने प्रदेशवासियों से इस पुनीत कार्य में सहयोग, मार्गदर्शन तथा सुझाव देने की अपील की है। ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को ‘‘डा. कलाम कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र’’ से जोड़ा जा सके। इस सन्दर्भ में निदेशिका मुक्ता तिवारी से मो. 9305613127 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

महान वैज्ञानिक डॉ. कलाम के इस गूढ़ संदेश में बहुत कुछ छिपा है। ‘‘देश तभी मुस्कुरायेगा’’ जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने-अपने कार्य को ईमानदारी एवं पूर्ण निष्ठा के साथ समर्पित भाव से पूरा करे। ‘‘देश के मुस्कुराने’’ में नयी-नयी खोजों एवं नये-नये उपकरणों, उत्पादों के विकास के द्वारा समाज की सेवा करने में सत्यनिष्ठा से योगदान करना होगा। जिस प्रकार आजादी की लड़ाई के लिए महात्मा गांधी ने ‘‘करो या मरो’’ का नारा दिया था, उसी प्रकार भारत को एक ‘‘विकसित राष्ट्र’’ बनाने के लिए डा0 कलाम ने ‘फ्री पार्टनशिप’ का मूलमंत्र दिया है, जो वास्तव में देश की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा।