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दस्तक-विशेष

अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री के लिए सम्बंध से अधिक महत्वपूर्ण सम्मान होता ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से… {भाग_४}
आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस मधुर हास्य से हँसते हुए बोला- देखो ना, ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से स्तम्भ {भाग_५]
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से बुरी तरह प्रभावित थी। मन की शांति के ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग ६} 
अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना ही कठिन और नीरस है। भगवान् कोई आकार ...
Comments Off on संसार भगवान की छाया, भगवान मिल जाए तो छाया के लिए प्रयास करने की क्या जरूरत
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष फीचर्ड स्तम्भ

स्तम्भ : काम का ज्वर उतरते ही पवनरेखा की देह पर आरूढ़ उग्रसेन ने भी अपनी दृष्टि की कोर से प्रकोष्ठ के द्वार पर खड़ी उस पुरुष आकृति ...
Comments Off on वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_७}
अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य

अध्यात्म : संसार में हाथ, दो पैर वाले जीवों की भरमार है। सामान्यतया उन्हें ‘मनुष्य’ कहते है। लेकिन ‘मनुष्य’ ये सब-के-सब होते नहीं। दो हाथ, दो पैर तो ...
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अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

 स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य में संतान सुख नहीं लिखा था। किंतु महाराज ...
Comments Off on रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से..भाग ३
अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष साहित्य स्तम्भ

 स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है ? ये क्या कह रही हो तुम ? ...
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अद्धयात्म आशुतोष राणा दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ

स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक उनकी चरण पादुकाएँ की रघुवंश के सिंहासन पर ...
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अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड साहित्य स्तम्भ हृदयनारायण दीक्षित

इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी भूतकाल नहीं बदल सकते। लेकिन इस भूत इतिहास ...
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